{"_id":"61f275b42942aef8a7164996d3eaa3f4","slug":"city-not-ready-to-deal-with-flooding","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ से निपटने को तैयार नहीं शहर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ से निपटने को तैयार नहीं शहर
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
Updated Mon, 23 Jun 2014 11:46 PM IST
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लेकिन प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के बंदोबस्त नहीं किए हैं। शहर के नाले
कूड़े-कर्कट से अटे पड़े हैं और सीवरेज ओवरफ्लो है। ऐसे में पानी निकासी
नहीं होती। थोड़ी सी बारिश में सड़कों पर पानी भर जाता है, जो बाढ़ का रूप
धारण कर लेता है।
हर साल मानसून आने पर पानी लोगों की बुरी स्थिति से गुजरना पड़ता है। जिले की सीमा से यमुना नदी गुजरती है। स्टड मजबूत नहीं होने कारण बाढ़ भी लोगों को प्रभावित करती है। पिछले वर्ष यमुना में हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए करीब आठ लाख क्यूसेक पानी ने क्षेत्र में खूब तबाही मचाई थी।
इसके करीब एक वर्ष बाद भी बाढ़ की तबाही का मंजर याद कर क्षेत्र के लोग सिहर उठते हैं। इस बार सिंचाई विभाग और प्रशासन ऐसी किसी स्थिति से निपटने के लिए हालांकि किलेबंदी में जुटा है, लेकिन पानी को रोकने के प्रयास हमेशा फेल ही हैं। डीसी बलराज सिंह ने यमुना क्षेत्र का दौरा कर अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए हैं। बीते वर्ष 15 जून को हथिनी कुंड बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया था। लोगों का आरोप था कि प्रशासन की ओर से इसकी सूचना नहीं दी गई। जिसके कारण यमुना क्षेत्र में काम कर रहे लोग, पशु, पक्षी पानी में बह गए। लोगों ने कई-कई दिन पेड़ों पर चढ़कर गुजारे थे। हजारों एकड़ में लगी सब्जियां और फल पूरी तरह से नष्ट हो गई।
गंगा दशहरे पर डुबकी नहीं लगा सके थे श्रद्धालु
हर वर्ष गंगा दशहरे के अवसर पर यमुना में जिले के हजारों लोग डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना करते हैं, परंतु बाढ़ के कारण लोग यमुना के नजदीक तक नहीं जा सके। इतना ही नहीं यमुना के घाटों पर विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें तरबूज और खरबूज की जमकर ब्रिकी होती है, लेकिन यमुना में आई बाढ़ के कारण यह फल और सब्जियां पूरी तरह से नष्ट हो गई थी।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद शव मिले थे
बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही के निशान मिले। गांव जपती छपरा के समीप एक महिला का शव मिला, जिसकी पीठ पर बच्चे का शव बंधा हुआ था। इतना ही नहीं इंद्री क्षेत्र के गांव बीबीपुर हलवाना के 10 वर्षीय सागर का शव भी मिला था, जो तरबूज निकालने के लिए पानी की लहरों में फंस गया था।
दर्जनों गांवों ने देखा मंजर
गांव चौगांवा, चंद्राव, नगली, कमालपुर गड़रियान, जपती छपरा, सैयद छपरा, डबकौल खुर्द, हलवाणा, हंसुमाजरा, सैदपुरा, बीबीपुर हलवाणा का बाढ़ के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गया था। इसके अतिरिक्त गांव महमदपुर, मोहदीनपुर, मंगलौरा के समीप और करनाल-मेरठ रोड पर भी पानी भरने के कारण यातायात प्रभावित हुआ था।
हर साल मानसून आने पर पानी लोगों की बुरी स्थिति से गुजरना पड़ता है। जिले की सीमा से यमुना नदी गुजरती है। स्टड मजबूत नहीं होने कारण बाढ़ भी लोगों को प्रभावित करती है। पिछले वर्ष यमुना में हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए करीब आठ लाख क्यूसेक पानी ने क्षेत्र में खूब तबाही मचाई थी।
इसके करीब एक वर्ष बाद भी बाढ़ की तबाही का मंजर याद कर क्षेत्र के लोग सिहर उठते हैं। इस बार सिंचाई विभाग और प्रशासन ऐसी किसी स्थिति से निपटने के लिए हालांकि किलेबंदी में जुटा है, लेकिन पानी को रोकने के प्रयास हमेशा फेल ही हैं। डीसी बलराज सिंह ने यमुना क्षेत्र का दौरा कर अधिकारियों को दिशानिर्देश दिए हैं। बीते वर्ष 15 जून को हथिनी कुंड बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया था। लोगों का आरोप था कि प्रशासन की ओर से इसकी सूचना नहीं दी गई। जिसके कारण यमुना क्षेत्र में काम कर रहे लोग, पशु, पक्षी पानी में बह गए। लोगों ने कई-कई दिन पेड़ों पर चढ़कर गुजारे थे। हजारों एकड़ में लगी सब्जियां और फल पूरी तरह से नष्ट हो गई।
गंगा दशहरे पर डुबकी नहीं लगा सके थे श्रद्धालु
हर वर्ष गंगा दशहरे के अवसर पर यमुना में जिले के हजारों लोग डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना करते हैं, परंतु बाढ़ के कारण लोग यमुना के नजदीक तक नहीं जा सके। इतना ही नहीं यमुना के घाटों पर विशाल मेले का भी आयोजन किया जाता है, जिसमें तरबूज और खरबूज की जमकर ब्रिकी होती है, लेकिन यमुना में आई बाढ़ के कारण यह फल और सब्जियां पूरी तरह से नष्ट हो गई थी।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद शव मिले थे
बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही के निशान मिले। गांव जपती छपरा के समीप एक महिला का शव मिला, जिसकी पीठ पर बच्चे का शव बंधा हुआ था। इतना ही नहीं इंद्री क्षेत्र के गांव बीबीपुर हलवाना के 10 वर्षीय सागर का शव भी मिला था, जो तरबूज निकालने के लिए पानी की लहरों में फंस गया था।
दर्जनों गांवों ने देखा मंजर
गांव चौगांवा, चंद्राव, नगली, कमालपुर गड़रियान, जपती छपरा, सैयद छपरा, डबकौल खुर्द, हलवाणा, हंसुमाजरा, सैदपुरा, बीबीपुर हलवाणा का बाढ़ के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह कट गया था। इसके अतिरिक्त गांव महमदपुर, मोहदीनपुर, मंगलौरा के समीप और करनाल-मेरठ रोड पर भी पानी भरने के कारण यातायात प्रभावित हुआ था।