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Karnal News: जहरीली हुई शहर की हवा, आंखों में जलन और सांस लेने में बढ़ी परेशानी
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अंबाला रोड पर शाम के समय छाई स्माग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। शनिवार शाम करीब चार बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 471 दर्ज किया गया। जहरीली हवा और स्मॉग की मोटी चादर ने लोगों की सांसों पर संकट खड़ा कर दिया है।
सुबह से ही आसमान में धुएं और धुंध का असर दिखाई दिया। हवा में घुले प्रदूषक कणों के कारण लोगों को आंखों में तेज जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने, कैथल और चीका क्षेत्र की राइस मिलों से निकलने वाले धुएं और त्योहार के दौरान चलाए गए पटाखों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
प्रशासनिक पाबंदियों और निगरानी के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक जिले में पराली जलाने के 14 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
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आंखों से बहे आंसू....
शनिवार सुबह जैसे ही लोग घरों से बाहर निकले, उन्हें हवा में भारीपन महसूस हुआ। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की आंखों में जलन ने बुरी तरह रुलाया। नागरिक अस्पताल और निजी क्लीनिकों में सांस के मरीजों, अस्थमा पीड़ितों और छोटे बच्चों की ओपीडी में इसी शिकायत के साथ पहुंचे। डॉक्टर जितेंद्र गिल का कहना है कि हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक है, जो फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचा सकता है।
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मीठी ठंड में घुला जहर
प्रदूषण के इस संकट के बीच मौसम के तापमान में भी बदलाव देखा जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ डा. हरमीत के अनुसार, शनिवार को कैथल का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह और शाम के समय मीठी ठंड का अहसास हो रहा है, लेकिन हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषक कण जमीन की सतह के करीब ही जमा हो गए हैं, जिससे स्मॉग की स्थिति अधिक गंभीर हो गई है।
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कैथल। जिले में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। शनिवार शाम करीब चार बजे शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 471 दर्ज किया गया। जहरीली हवा और स्मॉग की मोटी चादर ने लोगों की सांसों पर संकट खड़ा कर दिया है।
सुबह से ही आसमान में धुएं और धुंध का असर दिखाई दिया। हवा में घुले प्रदूषक कणों के कारण लोगों को आंखों में तेज जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने, कैथल और चीका क्षेत्र की राइस मिलों से निकलने वाले धुएं और त्योहार के दौरान चलाए गए पटाखों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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प्रशासनिक पाबंदियों और निगरानी के बावजूद पराली जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। अब तक जिले में पराली जलाने के 14 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।
आंखों से बहे आंसू....
शनिवार सुबह जैसे ही लोग घरों से बाहर निकले, उन्हें हवा में भारीपन महसूस हुआ। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों की आंखों में जलन ने बुरी तरह रुलाया। नागरिक अस्पताल और निजी क्लीनिकों में सांस के मरीजों, अस्थमा पीड़ितों और छोटे बच्चों की ओपीडी में इसी शिकायत के साथ पहुंचे। डॉक्टर जितेंद्र गिल का कहना है कि हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक है, जो फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचा सकता है।
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मीठी ठंड में घुला जहर
प्रदूषण के इस संकट के बीच मौसम के तापमान में भी बदलाव देखा जा रहा है। कृषि विशेषज्ञ डा. हरमीत के अनुसार, शनिवार को कैथल का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह और शाम के समय मीठी ठंड का अहसास हो रहा है, लेकिन हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषक कण जमीन की सतह के करीब ही जमा हो गए हैं, जिससे स्मॉग की स्थिति अधिक गंभीर हो गई है।