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बासमती धान उत्पादन का तरीका बदलने से किसान की बदल जाएगी तकदीर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jan 2022 02:36 AM IST
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chnge the style of cultivation of basmati rice
करनाल। किसान यदि बासमती धान उत्पादन का तरीका बदलें तो उनकी तकदीर बदल सकती है। यह मानना है कृषि विशेषज्ञों का। उनके अनुसार अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, यूरोपियन यूनियन व गल्फ देशों में भारतीय बासमती चावल की काफी मांग है, लेकिन शर्त है कि इसमें कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। यही कारण है कि आजादी के 75वें अमृत महोत्सव के तहत हरियाणा के 75 गांवों में ‘बासमती में कीटनाशकों के उचित उपयोग’ पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने की तैयारी की गई है।
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हार्टिकल्चर फार्मर्स प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन समूह करनाल के उपाध्यक्ष डा. एसपी तोमर ने बताया कि हरियाणा के तीन जिले करनाल (60 गांव), सोनीपत (7 गांव) और कैथल (8 गांव) में यह जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। गांवों के नाम चिन्हित किए जा रहे हैं। बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान मेरठ, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ निर्यात प्राधिकरण (एपीडा) व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान क्षेत्रीय केंद्र करनाल इसमें सहयोगी रहेंगे।
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उन्होंने बताया कि एफपीओ की ओर से वर्ष 2020-21 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह कार्य किया गया था। करनाल जिले के दो खंडों में 50 गांवों में, प्रत्येक गांव से दस किसान व प्रत्येक किसान के दो एकड़ खेतों में कुल एक हजार एकड़ में कैमिकल मुक्त बासमती धान का उत्पादन किया गया, जिसके सफल परिणाम रहे। उन्होंने कहा कि यदि किसान बासमती उत्पादन कर तरीका बदल दें तो उनकी तकदीर बदल सकती है।
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