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Karnal News: टीवी और मोबाइल से बच्चों की आंखें हो रहीं कमजोर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Apr 2025 01:51 AM IST
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Children's eyes are getting weak due to TV and mobile
- एक वर्ष में 260 बच्चों को लगे नजर के चश्मे, इनमें ज्यादातर 11 से 15 वर्ष के शामिल
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। मोबाइल का ज्यादा समय तक इस्तेमाल और कई घंटों तक टीवी देखने से बच्चों को कम उम्र में ही नजर के चश्मे लगाने पड़ रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 18 वर्ष से कम आयु के 260 बच्चों को आंखों की कमजोरी के कारण चश्मा लगाया जा चुका है जिनमें सबसे अधिक संख्या 11 से 15 वर्ष आयु के बच्चे शामिल हैं। नागरिक अस्पताल से डीईआईसी प्रबंधक डॉ. अर्चना ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले नजर का चश्मा लगने वालों की संख्या इस साल पांच प्रतिशत अधिक रही है।



नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जिया ने बताया कि पढ़ाई के अत्यधिक दबाव के कारण बच्चों के खेलने-कूदने का समय कम हो गया है और पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक सब कुछ अब स्क्रीन पर निर्भर हो गया है। इससे आंखों की मांसपेशियों पर निरंतर दबाव पड़ता है, जो बच्चों की आंखों को कमजोर करने का कारण बन रहा है। वहीं, बच्चे जब अधिक देर तक स्क्रीन देखते हैं तो पलकें कम झपकती हैं जिससे आंखें सूखने लगती हैं। केवल पास की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने से दूर की दृष्टि में कमजोरी आने लगती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली किरणें आंखों की कोशिकाओं को हानि पहुंचाने का काम कर रही है। जिससे आंखों में जलन, सिरदर्द और धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं।
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इन बातों का रखना होगा ध्यान-

- बच्चों को शारीरिक गतिविधियां करने के लिए प्रेरित करें।

- मोबाइल व टीवी का समय सीमित करें।

- हरी सब्जियों का आहार का हिस्सा बनाएं।

- प्रत्येक छह माह में आंखों की जांच कराएं।

- पढ़ाई करते समय रोशनी का ध्यान रखें।

- आंखों व पुस्तक के बीच उचित दूरी बनाएं।





चश्मा लगवाने वाले बच्चे

आयु बच्चों की संख्या

0 से 5 वर्ष 4

6 से 10 वर्ष 41

11 से 15 वर्ष 158

16 से 18 वर्ष 57





नेत्र अंधता निवारण और दृष्टि सुधार योजना (नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस एंड विजन इम्पेयरमेंट) के अंतर्गत जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) की टीम समय-समय पर विद्यालयों में जाकर बच्चों की आंखों की जांच करती है। जिन बच्चों की दृष्टि में कमी पाई जाती है, उन्हें अस्पताल में बुलाकर निःशुल्क जांच और आवश्यकता अनुसार चश्मा प्रदान किया जाता है। टीम विद्यालयों से लगातार संपर्क में रहती है। बच्चों को आंखों की देखभाल संबंधी सुझाव दिए जाते हैं। गंभीर मामलों में बच्चों के नि:शुल्क उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। कई बार अभिभावकों को भी जागरूक किया जाता है कि वे बच्चों की आंखों से जुड़ी समस्याओं को हल्के में न लें।
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- डॉ. अर्चना शर्मा, डीईआईसी प्रबंधक
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