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दान एहसान नहीं बल्कि तप है : आचार्य दिनेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। आर्य समाज मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य दिनेश शरण ने कहा कि नंद बाबा के यहां नौ लाख गाय थीं। जो सभी दूध रूपी अमृत देने वाली थीं। नंद बाबा ने ऐसी बहुत सी गाय दान में दी। नंद बाबा जितना दान कर रहे थे उतना ही बढ़ता चला जाता था। दान कोई किसी पर एहसान नहीं होता दान तो अपना कल्याण होता है।
उन्होंने कहा कि कलयुग में दान करना भी एक तप है क्योंकि दान करने के लिए भी बड़े दिल की आवश्यकता होती है। हर कोई दान नहीं कर सकता जैसे ज्ञान बांटने से बढ़ता है वैसे ही धन दान करने से धन की शुद्धि होकर धन बढ़ने लग जाता है। कथा में विशेष रूप से गोवर्धन लीला की कथा भी सुनाई गई। उन्होंने कहा कि हमें कभी भी किसी प्रकार का अभिमान नहीं करना चाहिए, मन में भाव बनाना चाहिए कि मैं कुछ भी नहीं हूं और न ही मैं कुछ करने वाला हूं, करते तो कन्हैया हैं।
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इंद्री। आर्य समाज मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य दिनेश शरण ने कहा कि नंद बाबा के यहां नौ लाख गाय थीं। जो सभी दूध रूपी अमृत देने वाली थीं। नंद बाबा ने ऐसी बहुत सी गाय दान में दी। नंद बाबा जितना दान कर रहे थे उतना ही बढ़ता चला जाता था। दान कोई किसी पर एहसान नहीं होता दान तो अपना कल्याण होता है।
उन्होंने कहा कि कलयुग में दान करना भी एक तप है क्योंकि दान करने के लिए भी बड़े दिल की आवश्यकता होती है। हर कोई दान नहीं कर सकता जैसे ज्ञान बांटने से बढ़ता है वैसे ही धन दान करने से धन की शुद्धि होकर धन बढ़ने लग जाता है। कथा में विशेष रूप से गोवर्धन लीला की कथा भी सुनाई गई। उन्होंने कहा कि हमें कभी भी किसी प्रकार का अभिमान नहीं करना चाहिए, मन में भाव बनाना चाहिए कि मैं कुछ भी नहीं हूं और न ही मैं कुछ करने वाला हूं, करते तो कन्हैया हैं।
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