सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों पर लटके रहे ताले

अमर उजाला ब्यूरो/करनाल Updated Fri, 31 Jan 2014 12:00 AM IST
CBSE affiliated schools are hanging on the locks
शिक्षा नियमावली सेक्शन 134 ए और स्कूल भवनों पर लाखों रुपये के थोपे गए प्रापर्टी टैक्स के विरोध में वीरवार को जिले भर में सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध तमाम प्राइवेट स्कूलों पर ताले लटके रहे।

स्कूल संचालकों ने सरकार द्वारा उन पर थोपी जा रही नीतियों के विरोध में पूरा दिन हड़ताल रखी। जिले भर के करीब साठ हजारों छात्रों को हड़ताल के कारण एक दिन की स्कूल में होने वाली पढ़ाई का नुकसान झेलना पड़ा।

स्कूल संचालकों की मानें तो सरकार अपनी जिद्द पर अड़ी है। ऐसे हालात में स्कूल संचालकाें ने भी अपने तेवर नरम नहीं करने की ठान ली है। निजी स्कूल संचालकों ने धमकी भरे लहजे में कहा कि सरकार ने अपना रवैया ढीला नहीं किया तो वे लोग अपने स्कूलों में नए शिक्षा सत्र 2014-2015 के लिए दाखिले नहीं करेंगे।

वीरवार को जिले भर के सीबीएसई तथा आईसीएसई के तमाम 75 स्कूलों पर पूरा दिन ताला लटका रहा। हड़ताल की जानकारी नहीं होने के कारण कुछ छात्र स्कूलों में पहुंचे, लेकिन स्कूल पर ताला लटका होने के कारण उन्हें वापस घर जाना पड़ा।

इक्का-दुक्का स्कूलों में प्रैक्टिकल के छात्र पहुंचे। स्कूल संचालकाें ने डिस्ट्रिक्ट इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के आह्वान पर की गई हड़ताल के कारण वीरवार को पूरा दिन स्कूल बंद रहे। निजी स्कूल के कई संचालक वीरवार को इस मामले में किए जा रहे विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुए।

डिस्ट्रिक्ट इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष आरएस विर्क और संयुक्त सचिव कुलजिंद्र मोहन सिंह बाठ ने कहा सरकार स्कूल संचालकों पर शिक्षा नियमावली के सेक्शन 134 ए को घूमा फिरा कर थोप रही है।

पिछले साल सरकार से दस प्रतिशत बच्चे बीपीएल श्रेणी के सभी स्कूलों में दाखिल करने पर सहमति बनी थी, लेकिन सरकार ने यह मामला पूरा उलटा कर दिया। सरकार ने अपनी गाइड लाइन में साफ कर दिया कि सभी स्कूलों में पहले जो गरीब बच्चे शिक्षा ले रहे हैं, वे पढ़ते रहेंगे।

उन्हें पहले की तरह लाभ मिलता रहेगा। इसके अलावा दस प्रतिशत बच्चे प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन में आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के शामिल करने होंगे। दो लाख रुपये तक की आय के लोगों को आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग के लोगों की सूची में शामिल किया गया है।

ऐसे हालात में 90 प्रतिशत बच्चे उनके स्कूलों में पहले ही पढ़ रहे हैं। दो लाख रुपये की आमदनी वाले व्यक्ति को वह गरीब नहीं मान सकते। सरकार ने उन लोगों की मांग को नहीं माना तो वह लोग फरवरी मध्य में दोबारा हड़ताल पर जा सकते हैं।

साथ ही कहा कि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो वे नए सेशन के लिए स्कूलों में दाखिले नहीं करेंगे। दूसरी ओर, उन लोगों ने कहा कि लाखों रुपये का प्रापर्टी टैक्स भरना उन लोगों के बूते से बाहर है। वह लोग भी राहत चाहते हैं।

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