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Karnal News: बजट जारी किया लेकिन नहीं शुरू हो पाया लाइटों की मरम्मत का काम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jul 2025 02:31 AM IST
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Budget was released but work of repairing lights could not be startedBudget was released but work of repairing lights could not be started
- एजेंसी ने केवल सर्वे ही किया, अधिकारियों का दावा- एक सप्ताह में लाइटें ठीक करने के दिए आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर


करनाल। स्मार्ट सिटी की ओर से शहर की बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के लिए करोड़ों रुपये का बजट तो जारी कर दिया गया लेकिन मरम्मत कार्य अभी तक धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है। नगर निगम ने मरम्मत कार्य का जिम्मा एक निजी एजेंसी को सौंपा है वह भी लाइटों को दुरुस्त नहीं करा पा रही है। जिसकी वजह से अब शहरवासी रात के अंधेरे में असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
निगम अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी को मैनपावर उपलब्ध करवाने और बंद पड़ी लाइटों को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। शहर के कई मुख्य मार्गों, चौक-चौराहों और कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं लेकिन उनकी मरम्मत की दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
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सर्वे तक सीमित एजेंसी की कार्रवाई

एजेंसी ने शहर में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों का सर्वे तो किया है लेकिन काम की शुरुआत नहीं होने से निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कई क्षेत्रों में तो हाईमास्ट लाइटें भी बंद पड़ी हैं, जिससे रात के समय दुर्घटनाओं और अपराधों का खतरा बढ़ जाता है।
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नगर निगम ने लोगों की शिकायतें दर्ज करने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर और मोबाइल एप भी जारी किया है, जिससे कोई भी नागरिक अपने क्षेत्र की खराब लाइट की जानकारी दे सकता है। हालांकि पहले भी कई बार लोग शिकायत कर चुके हैं लेकिन समाधान नहीं मिलने से लोगों में नाराजगी है।





लोग बोले- सिर्फ घोषणा से नहीं होगा काम



स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारी केवल घोषणाओं और आदेशों तक सीमित हैं। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। रात में अंधेरे के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। महिला एवं बुजुर्गों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है। शहर के मुख्य मार्गों जैसे पुरानी बस स्टैंड से आंबेडकर चौक, जीटी रोड, निर्मल कुटिया चौक आदि इलाकों में लाइटें लंबे समय से खराब हैं। वहीं, निगम ने हाल ही में 60 नई हाईमास्ट लाइटें खरीदने की घोषणा भी की थी लेकिन पुरानी लाइटों को दुरुस्त करने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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