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Karnal News: खिलाड़ियों के लिए मिसाल बनीं बॉक्सिंग प्रशिक्षक मीना कुमारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2024 06:52 AM IST
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Boxing trainer Meena Kumari became an example for players
सुखदेव चौहान
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करनाल। बॉक्सिंग में भीम अवार्ड विजेता अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज एवं प्रशिक्षक मीना कुमारी खिलाड़ियों के लिए मिसाल बनी हैं। वह मुक्केबाजी में सात बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी हैं। वर्तमान में वह हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में सब इंस्पेक्टर के पद पर रहते हुए, यहां की बॉक्सिंग अकादमी में खिलाड़ियों की प्रतिभा निखार रही हैं।
रेवाड़ी के मुंडी गांव से निकली मीना ने तमाम पाबंदियों के बावजूद अपनी कामयाबी की पटकथा खुद लिखी। मीना का कहना है कि उन्होंने यह मुकाम अपनी काबिलियत के दम पर पाया है। वह पवित्र ग्रंथ गीता को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा खिलाड़ियों को देती हैं। मीना का कहना है कि दो भाइयों की इकलौती बहन व ग्रामीण परिवेश से होने के कारण उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन उनके हौसले इतने बुलंद थे कि कामयाबी में तमाम कठिनाइयां भी पीछे छूट गईं।
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मीना के पति सुनील कुमार ने बताया कि उनके पिता स्व. रघुवीर सिंह जो कि भारतीय सेना में थे, कड़क स्वभाव के थे। रेवाड़ी का ग्रामीण परिवेश होने के कारण बेटियों का घर से निकलना मुश्किल था। उस समय बॉक्सिंग अकादमी में दाखिला लेना ही मुश्किल था। मीना बॉक्सिंग में खेलने के सपने संजोती थी लेकिन पिता से बात करने की हिम्मत नहीं हुई।
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एक दिन मीना ने अपने पिता के समक्ष यह बात रख ही दी तो वह मान गए। वहीं से मीना के कॅरिअर की शुरुआत हुई। फिर भाई अजय कुमार रोजाना उन्हें अकादमी लेकर जाते थे। भारतीय सेना में कार्यरत भाई दिनेश ने भी उनका भरपूर साथ दिया जिसकी बदौलत वह अपने लक्ष्य को पूरा कर पाईं। मीना ने बताया कि जब वह अभ्यास के लिए जाती थीं तो उनकी दादी भोली देवी कुछ खाने के लिए अपनी जेब से पैसे देती थीं।
मीना ने बताया कि जब उनका वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चयन हुआ तो वह पिता के साथ खेत में भूसा ढोने का काम कर रही थीं तभी गांव के एक व्यक्ति ने उनको जानकारी दी। इस दौरान उनका पासपोर्ट भी नहीं था और न ही पासपोर्ट बनवाने के लिए पैसे थे। ऐसे में मुश्किल से पैसे जुटाए तो उनके पासपोर्ट की फाइल कार्यालय में गुम हो गई फिर भी विदेश की धरा पर कांस्य पदक जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बनीं।
उन्होंने बताया कि एक बार पिता ने चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्हें भेजने से मना किया तो उनके कोच व महिला खिलाड़ियों की टीम घर पर ही पहुंच गई। ऐसे में पिता भी राष्ट्रीय खेलों में उन्हें जाने से नहीं रोक पाए। चीन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान तो परिवार वालों ने बिल्कुल मना कर दिया था लेकिन उस दौरान भी मनोज ने काफी साथ दिया।


प्रदेश की पहली महिला बॉक्सर जिसने वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती
मीना कुमारी बताती हैं कि उन्होंने बॉक्सिंग का सफर उनके मुख्य कोच गुरचरण से प्रेरित होकर शुरू किया। बॉक्सर मोहम्मद अली की कहानी उनके पाठ्यक्रम में आई तो उससे भी प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि जब वह महिला खिलाड़ियों को खेलते देखती थीं तो उनके मन में भी बॉक्सर बनने का जुनून जागा। सभी पारिवारिक पाबंदियों को तोड़कर उन्होंने बॉक्सिंग के रिंग में कदम रखा तो वह वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने वाली प्रदेश की पहली महिला बॉक्सर बनीं।

उपलब्धियां
- एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
- अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक विजेता।
- लगातार सात बार राष्ट्रीय चैंपियन रहीं।
- ऑल इंडिया पुलिस गेम में सात पदक जीते।
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