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भगत सिंह के ‘रंग दे वसंती...’ से लेकर बब्बू मान के ‘कब्जा’ से भरा जोश
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करनाल। नई अनाज मंडी में मंगलवार को महापंचायत में पहुंचे युवा किसान ट्रैक्टर पर लगे स्पीकर से देशभक्ति के गीत बजाते हुए पहुंचे। उन्होंने भगत सिंह के ‘रंग दे वसंती...’ से लेकर बब्बू मान के ‘कब्जा’ सरीखे गाने बजाकर किसानों में जोश भरा। एक जीप पर डीजे और जनरेटर भी फिट कर लाया गया था।
महापंचायत में युवा किसान जहां ट्रैक्टर और खुली जीप पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा व कई संगठनों के झंडे लहराते नजर आए। वहीं बुजुर्ग किसानों का भी अपना स्टाइल दिखाई दिया। वे हुक्का व उपले लेकर पहुंच गए। अनिश्चितकालीन घेराव के आह्वान के चलते किसान अपनी तैयारी के साथ पहुंचे हैं। बारिश से बचाव के लिए ट्रालियों पर तिरपाल लगाई हुई थी। युवा किसानों की जुबां पर एक ही बात थी कि आखिर कब तक सहें। उन्होंने इस आंदोलन को आजादी की जंग सरीखा मान लिया है।
युवाओं के जोश को थामने के लिए मंचासीन किसान नेता बार-बार यही संदेश देते रहे कि शरारती तत्वों से सतर्क रहना है और कानून का उल्लंघन नहीं करना। किसी पुलिसकर्मी से नहीं भिड़ना। बेशक पुलिस लाठी-डंडे मारे। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव बी. वेंकट ने कहा कि बसताड़ा टोल प्लाजा पर लाठीचार्ज के दौरान 300 किसानों पर 1500 पुलिसकर्मी तैनात थे। आज एक हजार पुलिस के आगे दस हजार किसान खड़े हैं। ताकत शांतिपूर्वक तरीके से चले आंदोलन में है। पांच बार लाठीचार्ज हुआ था। उसके बावजूद किसान महापंचायत में इतनी संख्या में पहुंच गए।
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अटूट लंगर चलाया
महापंचायत शुरू होने के साथ ही अनाज मंडी में लंगर चालू कर दिया गया। भाकियू नेता जगदीप औलख ने मंच से किसानों को लंगर चखने और अंतिम निर्णय का इंतजार करने के लिए कहा। दूसरी ओर अनाज मंडी में धान की अगेती किस्मों की आवक हो रही है। किसान नेताओं के निर्णय के इंतजार में सैकड़ों किसान महापंचायत स्थल के पास तो कभी अन्य शेड के नीचे धान की बोरियों पर बैठे रहे। किसानों की भीड़ के चलते महज कुछ देर में ही चाय की दुकानों पर दूध समाप्त हो गया।
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महापंचायत में युवा किसान जहां ट्रैक्टर और खुली जीप पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा व कई संगठनों के झंडे लहराते नजर आए। वहीं बुजुर्ग किसानों का भी अपना स्टाइल दिखाई दिया। वे हुक्का व उपले लेकर पहुंच गए। अनिश्चितकालीन घेराव के आह्वान के चलते किसान अपनी तैयारी के साथ पहुंचे हैं। बारिश से बचाव के लिए ट्रालियों पर तिरपाल लगाई हुई थी। युवा किसानों की जुबां पर एक ही बात थी कि आखिर कब तक सहें। उन्होंने इस आंदोलन को आजादी की जंग सरीखा मान लिया है।
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युवाओं के जोश को थामने के लिए मंचासीन किसान नेता बार-बार यही संदेश देते रहे कि शरारती तत्वों से सतर्क रहना है और कानून का उल्लंघन नहीं करना। किसी पुलिसकर्मी से नहीं भिड़ना। बेशक पुलिस लाठी-डंडे मारे। अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव बी. वेंकट ने कहा कि बसताड़ा टोल प्लाजा पर लाठीचार्ज के दौरान 300 किसानों पर 1500 पुलिसकर्मी तैनात थे। आज एक हजार पुलिस के आगे दस हजार किसान खड़े हैं। ताकत शांतिपूर्वक तरीके से चले आंदोलन में है। पांच बार लाठीचार्ज हुआ था। उसके बावजूद किसान महापंचायत में इतनी संख्या में पहुंच गए।
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अटूट लंगर चलाया
महापंचायत शुरू होने के साथ ही अनाज मंडी में लंगर चालू कर दिया गया। भाकियू नेता जगदीप औलख ने मंच से किसानों को लंगर चखने और अंतिम निर्णय का इंतजार करने के लिए कहा। दूसरी ओर अनाज मंडी में धान की अगेती किस्मों की आवक हो रही है। किसान नेताओं के निर्णय के इंतजार में सैकड़ों किसान महापंचायत स्थल के पास तो कभी अन्य शेड के नीचे धान की बोरियों पर बैठे रहे। किसानों की भीड़ के चलते महज कुछ देर में ही चाय की दुकानों पर दूध समाप्त हो गया।