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हाथ से गेहूं कटाई का कार्य हुआ शुरू
ब्यूरो /अमर उजाला, करनाल
Updated Mon, 28 Mar 2016 01:09 AM IST
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इस सीजन की हाथों से गेहूं कटाई का कार्य खेतों में कहीं कहीं शुरू हो गया है। खासतौर पर छोटे व मझले किसानों ने कुछ समय पूर्व ही खराब मौसम के डऱ से गेहूं कटाई के कार्य को छेड़ दिया है। इसके पीछे हर रोज बदलते मौसम के मिजाज को माना जा रहा है। जिन छोटे व मझले किसानों ने स्वयं ही गेहूं की कटाई करनी है। उनका यह भी मानना है कि नर्म गेहूं तो कटने के बाद खेतों में सुख ही जाएगी। मगर बरसात हो गई तो फसल और ज्यादा नष्ट हो जाएगी। इससे और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ जाएगा। इसी डऱ से कटाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके चलते धीरे धीरे कटाई का कार्य भी संपन्न हो जाएगा। अगर मौसम ने किसानों का सही साथ दिया तो आने वाले एक या दो दिन में गेहूं कटाई के कार्य में और तेजी आ जाएगी।
नरूखेडी से घोघड़ीपुर जाने वाले संपर्क मार्ग के समीप एक खेत में गेहूं की कटाई करने से संबंधित किसान महिलाओं का जब कैमरे से फोटों खींचा जा रहा था। तभी इसी दौरान एक महिला का किसानों की हो रही भारी बेकद्री का दर्द फूट पड़ा। गेहूं कटाई के कार्य को जारी रखते हुए महिला किसान ने भरे मन से कहा कि एक दो किले आले का कै जीना सै सरकार भी कुछ मद्द भी कौन्या करती। बस हम तो न्यू ही मरज्यागें। यह भी सही प्रतीत होता है कि लगातार गत दो वर्षों से बेमौसमी बरसात से फसलों का बर्बाद होंना और सही लाभकारी भाव का न मिलने की वजह से किसानों को आर्थिक तंगी का दर्द उनके दिलों को करोंच रहा है।
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नरूखेडी से घोघड़ीपुर जाने वाले संपर्क मार्ग के समीप एक खेत में गेहूं की कटाई करने से संबंधित किसान महिलाओं का जब कैमरे से फोटों खींचा जा रहा था। तभी इसी दौरान एक महिला का किसानों की हो रही भारी बेकद्री का दर्द फूट पड़ा। गेहूं कटाई के कार्य को जारी रखते हुए महिला किसान ने भरे मन से कहा कि एक दो किले आले का कै जीना सै सरकार भी कुछ मद्द भी कौन्या करती। बस हम तो न्यू ही मरज्यागें। यह भी सही प्रतीत होता है कि लगातार गत दो वर्षों से बेमौसमी बरसात से फसलों का बर्बाद होंना और सही लाभकारी भाव का न मिलने की वजह से किसानों को आर्थिक तंगी का दर्द उनके दिलों को करोंच रहा है।
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