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एंबुलेंस में आए फोर्स के लिए केले...
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करनाल। इसे विडंबना कहें या फिर समय का फेर कि जिस एंबुलेंस में मरीज कराहते और जिंदगी से लड़ते हुए अस्पताल पहुंचते थे, उस एंबुलेंस में फोर्स के पेट की भूख मिटाने के लिए केले पहुंचे। मौका था सेक्टर-12 स्थित जिला सचिवालय के बाहर का, जहां किसान आंदोलन के चलते विभिन्न सुरक्षा बल एकत्रित हुए हैं। उनके खाने के लिए सुबह 12.15 पर एंबुलेंस में केले लाए गए। एक बार तो वहां पर मौजूद लोग अचंभित हुए कि एंबुलेंस अस्पताल जाने की बजाय मार्केट में क्यों रुकी, पर जैसे ही दरवाजा खोला तो उसमें केले के ढेर देख हर कोई मुस्कुरा रहा था।
लोगों का कहना था कि किसान आंदोलन के चलते केले भी एंबुलेंस में आने लगे हैं। दूसरी ओर, तहसील कार्यालय में जहां हर रोज सैकड़ों लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते थे और पूरा दिन लोगों का मेला लगा रहता था, वहां भी किसान आंदोलन के कारण सन्नाटा पसरा रहा। प्रशासन का दावा था कि रोजमर्रा की तरह सचिवालय में आमजन के काम होंगे लेकिन रजिस्ट्री के दिन भी कार्यालय में अधिकारियों के न होने के कारण कार्यालय सुनसान पड़ा रहा, जो लोग रजिस्ट्री संबंधित कार्यों के लिए आए थे, उन्हें मायूस वापस लौटना पड़ा।
सचिवालय घेराव से नहीं पहुंचे ग्राहक
जिला सचिवालय के सामने वाली मार्केट में कई बैंक व अन्य निजी कार्यालय हैं, जहां हर रोज कार्यों के लिए लोगोें का तांता लगा रहता था, लेकिन किसानों के सचिवालय घेराव की पूर्व सूचना पर लोग कार्यों के लिए न के बराबर शहर पहुंचे। बैंकों व अन्य कार्यालयों में ग्राहक न होने के कारण सभी कर्मी बाहर खड़े होकर फोर्स और लाइव स्थिति को अपने मोबाइल के कैमरों में कैद करते नजर आए। मानों कह रहे हों आज ग्राहक नहीं हैं तो फोर्स को ही कैमरे में कैद कर लें।
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लोगों का कहना था कि किसान आंदोलन के चलते केले भी एंबुलेंस में आने लगे हैं। दूसरी ओर, तहसील कार्यालय में जहां हर रोज सैकड़ों लोग अपने कार्यों के लिए पहुंचते थे और पूरा दिन लोगों का मेला लगा रहता था, वहां भी किसान आंदोलन के कारण सन्नाटा पसरा रहा। प्रशासन का दावा था कि रोजमर्रा की तरह सचिवालय में आमजन के काम होंगे लेकिन रजिस्ट्री के दिन भी कार्यालय में अधिकारियों के न होने के कारण कार्यालय सुनसान पड़ा रहा, जो लोग रजिस्ट्री संबंधित कार्यों के लिए आए थे, उन्हें मायूस वापस लौटना पड़ा।
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सचिवालय घेराव से नहीं पहुंचे ग्राहक
जिला सचिवालय के सामने वाली मार्केट में कई बैंक व अन्य निजी कार्यालय हैं, जहां हर रोज कार्यों के लिए लोगोें का तांता लगा रहता था, लेकिन किसानों के सचिवालय घेराव की पूर्व सूचना पर लोग कार्यों के लिए न के बराबर शहर पहुंचे। बैंकों व अन्य कार्यालयों में ग्राहक न होने के कारण सभी कर्मी बाहर खड़े होकर फोर्स और लाइव स्थिति को अपने मोबाइल के कैमरों में कैद करते नजर आए। मानों कह रहे हों आज ग्राहक नहीं हैं तो फोर्स को ही कैमरे में कैद कर लें।
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