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परिवार की आर्थिक तंगी और प्रथा बना रही ‘बालिका वधू’

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2022 02:09 AM IST
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'Balika Vadhu' is making family's financial crisis and custom
गगन तलवार
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करनाल। परिवार की आर्थिक तंगी और आटा-साटा जैसी पुरातनपंथी सोच आज भी बालिका को वधू बनने पर मजबूर कर रही है। यही कारण है कि जब बालिकाओं की समझ विकसित होती है तो रिश्तों में दरारें भी आती हैं और वे मनचाही जिंदगी भी नहीं जी पातीं। बाल विवाह करने में कर्णनगरी भी पीछे नहीं है।
पिछले 14 साल में यहां भी 214 मामले आ चुके हैं, इनमें से 146 विवाहों को पुलिस और महिला एवं बाल विवाह निषेध अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया है। जबकि 23 मामलों में विवाह होने के बाद पुलिस कार्रवाई हुई है। तीन मई को अक्षय तृतीया (अक्खा तीज) है, इस दिन शादियों के लिए शुभ मुहूर्त होता है, ऐसे में बाल विवाह होने का अंदेशा भी ज्यादा रहता है। अब तक सामने आए 214 मामलों में 20 प्रतिशत केस अक्षय तृतीया के दिन के ही हैं। ऐसे में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने भी पत्र जारी करके प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं।
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बाल संरक्षण अधिकारी रजनी गुप्ता के अनुसार ज्यादातर मामलों में परिवार की आर्थिक तंगी होती है, जिसमें वे बेटी को पढ़ाने का खर्च नहीं उठा सकते या फिर कुछ मामलों में अभिभावकों को बेटी के घर से भागने का अंदेशा रहता है, इसलिए वे बाल विवाह करते हैं। इसके अलावा आटा-साटा प्रथा में जिस घर में वे बेटे की शादी करते हैं, उसी घर में अपनी बेटी का भी विवाह कर देते हैं, ताकि उनकी बेटी सुखी रहे। अक्सर ऐसे मामले बड़े भाई के विवाह के दौरान होते हैं।
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शिकायत में खुद बोलीं, खत्म करना है रिश्ता
बाल विवाह के अब तक दो मामले ऐसे भी सामने आ चुके हैं, जिनमें शादी होने के कुछ समय बाद बेटियों ने शिकायत कर रिश्ते को खत्म करने की मांग की है। एक मामला 2015 और दूसरा 2017 का है। इसके अलावा 44 सेंसिटिव मामले रहे, इनमें विवाह रुकवाने के लिए कोर्ट के आदेशों की भी जरूरत पड़ी।
एक्सपर्ट व्यू
दो साल की सजा का प्रावधान
मनोवैज्ञानिक वीके मुदगिल के अनुसार शादी के लिए लड़की की उम्र 19 वर्ष या इससे अधिक तथा लड़के की उम्र 21 वर्ष या इससे अधिक होनी चाहिए। इससे कम उम्र में शादी होने पर लड़का और लड़की शादी की जिम्मेदारी उठाने में सक्षम नहीं होेते। इस कारण उनका सामाजिक और बौद्धिक विकास भी बाधित होता है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत विवाह में शामिल लोगों के खिलाफ दो साल तक की कैद व एक लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है।

इन नंबरों पर दें बाल विवाह की सूचना
अक्षय तृतीया पर बाल विवाह निषेध अधिकारी ने अपील की है कि अगर उन्हें किसी बाल विवाह की सूचना मिलती है तो पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर 112, महिला हेल्पलाइन 1091, चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 पर सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
यह है स्थिति
साल मामले मौके पर रुकवाए
2008-10 10 07
2010-11 12 06
2011-12 23 16
2012-13 18 10
2013-14 21 15
2014-15 23 16
2015-16 22 11
2016-17 20 16
2017-18 15 10
2018-19 18 17
2019-20 19 16
2020-21 13 06
कुल 214 146
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