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Karnal News: जरूरी न हो तो आज सफर से बचें रोडवेज की 78 बसें रहेंगी ऑफरूट
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करनाल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की करनाल पदयात्रा और अंबाला में प्रस्तावित रैली का असर वीरवार को रोडवेज की सामान्य परिवहन सेवाओं पर भी पड़ेगा। करनाल डिपो की 78 बसें दोनों आयोजनों के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। इसके अलावा निजी बस सोसायटी की भी ज्यादातर बसें बुक की गई हैं। ऐसे में दिल्ली-चंडीगढ़ समेत कई लंबे और ग्रामीण मार्गों पर बसों का संचालन प्रभावित रहेगा। यात्रियों को परेशानी से बचने के लिए सलाह है कि जरूरी न हो तो वीरवार को सफर टाल दें।
रोडवेज की 20 बसें सीधे अंबाला भेजी गई हैं जबकि 30 बसें कैथल भेजी गई हैं। यहां से इन बसों के माध्यम से लोगों को अंबाला रैली में पहुंचाया जाएगा। करनाल में आयोजित पदयात्रा और जनसभा के लिए 28 बसों की ड्यूटी इंद्री विधानसभा क्षेत्र में लगाई गई है। इन बसों से समर्थकों को कार्यक्रम में लाने की व्यवस्था की गई है। इस तरह रोडवेज की कुल 178 बसों में से 78 बसें नियमित परिवहन सेवा से बाहर रहेंगी। निजी सोसायटी की भी करीब 100 बसों का संचालन होता है।
रोडवेज के जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि प्रयास रहेगा कि सामान्य रूटों पर भी यात्रियों को परिवहन सुविधा मिलती रहे। हालांकि, बसों की उपलब्धता के अनुसार ही संचालन संभव हो पाएगा।
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दिल्ली-चंडीगढ़ और ग्रामीण रूट पर ज्यादा असर
बसों की कमी का सबसे ज्यादा असर दिल्ली-चंडीगढ़, पटियाला और लुधियाना जैसे लंबे मार्गों पर पड़ने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बसों के फेरे कम होंगे। कुछ मार्गों पर बस सेवा पूरी तरह बंद रहने की आशंका है। इससे रोजाना नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कत हो सकती है। यात्रियों के लिए कोई विशेष वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
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रोडवेज की 20 बसें सीधे अंबाला भेजी गई हैं जबकि 30 बसें कैथल भेजी गई हैं। यहां से इन बसों के माध्यम से लोगों को अंबाला रैली में पहुंचाया जाएगा। करनाल में आयोजित पदयात्रा और जनसभा के लिए 28 बसों की ड्यूटी इंद्री विधानसभा क्षेत्र में लगाई गई है। इन बसों से समर्थकों को कार्यक्रम में लाने की व्यवस्था की गई है। इस तरह रोडवेज की कुल 178 बसों में से 78 बसें नियमित परिवहन सेवा से बाहर रहेंगी। निजी सोसायटी की भी करीब 100 बसों का संचालन होता है।
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रोडवेज के जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि प्रयास रहेगा कि सामान्य रूटों पर भी यात्रियों को परिवहन सुविधा मिलती रहे। हालांकि, बसों की उपलब्धता के अनुसार ही संचालन संभव हो पाएगा।
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दिल्ली-चंडीगढ़ और ग्रामीण रूट पर ज्यादा असर
बसों की कमी का सबसे ज्यादा असर दिल्ली-चंडीगढ़, पटियाला और लुधियाना जैसे लंबे मार्गों पर पड़ने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बसों के फेरे कम होंगे। कुछ मार्गों पर बस सेवा पूरी तरह बंद रहने की आशंका है। इससे रोजाना नौकरी, कारोबार और पढ़ाई के लिए सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कत हो सकती है। यात्रियों के लिए कोई विशेष वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।