हरियाणा: सीमांत राज्यों के किसानों को नहीं मिली प्रदेश की मंडियों में धान बेचने की अनुमति, आढ़तियों के फंसे एक हजार करोड़ रुपये
सीमांत राज्यों के किसानों का हरियाणा की मंडियों में यहां के आढ़तियों से सालों पुराना लेनदेन चलता आ रहा है। इस बार हरियाणा की मंडियों में उनको गेटपास न मिलने के कारण वे अपनी फसल यहां नहीं बेच पाए। इसी वजह से हरियाणा की मंडियों में बैठे आढ़तियों का पुराना बकाया भी वहां के किसानों में फंस गया है। आढ़तियों ने सरकार से गुहार लगाई है कि अन्य राज्यों के किसानों के लिए सीमाएं खोली जाए। हरियाणा के ही किसान एक दूसरे जिले में फसल नहीं बेच पा रहे हैं।
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सीमांत राज्यों के किसानों को धान लेकर हरियाणा की मंडियों में आने की अनुमति नहीं मिलने से यहां के आढ़तियों व राइस मिलर्स के करीब एक हजार करोड़ रुपये फंस गए हैं। ऐसे में आढ़ती एसोसिएशन की ओर से तत्काल सीमांत किसानों की फसल के लिए हरियाणा की सीमाएं खोलने की मांग की गई है। यही नहीं फिलहाल यूपी और अन्य पड़ोसी राज्यों के साथ-साथ हरियाणा राज्य के अंदर भी एक जिले से दूसरे जिलों में धान ले जाने वाले किसानों को गेटपास नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे पलवल जैसे जिलों में किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
करनाल, यमुनानगर, पानीपत जिले की अनाज मंडियों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व अंबाला तथा कैथल जिले की अनाज मंडियों में पंजाब, सिरसा व डबवाली की मंडियों में राजस्थान व पंजाब आदि राज्यों के किसान धान लेकर आते हैं, क्योंकि यह निकटस्थ हैं और हरियाणा की मंडियों के आढ़तियों से उनका वर्षो पुराना लेनदेन चलता आ रहा है।
सीमांत राज्यों के किसानों को फसल की बिजाई, जुताई करनी हो या बेटी-बेटे की शादी करनी हो, हरियाणा की मंडियों में बैठे आढ़तियों व राइस मिलर्स से धन ले लेते हैं, इसके बदले वह किसान इन आढ़तियों व राइस मिलर्स को धान व गेहूं देते हैं। हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के राज्य चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि करनाल मंडी के 200 करोड़ सहित जिले की सभी मंडियों के आढ़तियों की सीमांत राज्यों के आढ़तियों पर उधारी करीब एक हजार करोड़ रुपये की है।
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हरियाणा सरकार ने पंजीकरण कराने के बावजूद अभी तक सीमांत किसानों के लिए पोर्टल नहीं खोला है, जिससे सीमांत किसान अपनी फसल हरियाणा की मंडियों में नहीं ला पा रहे हैं। यदि वह फसल लेकर नहीं आए तो आढ़तियों व मिलर्स की उधारी वाली धनराशि फंस जाएगी।
करनाल अनाज मंडी में पलवल, फरीदाबाद, होडल आदि के किसान अपना धान लेकर आते हैं। क्योंकि उन जिलों में राइस मिलर्स की संख्या काफी कम है। वहां सरकारी खरीद भी नहीं हो पाती है, लेकिन करनाल मंडी में इन जिलों के किसानों को भी गेटपास नहीं मिल रहे हैं। दूसरी तरह ऐसे किसान सैकड़ों में हैं जो हरियाणा राज्य के निवासी हैं लेकिन जमीन यूपी आदि अन्य सीमांत राज्यों में हैं, उनकी फसल को भी हरियाणा में लाने नहीं दिया जा रहा है। सरकार को तत्काल सीमांत किसानों के लिए हरियाणा की सीमाएं खोलनी चाहिए। -रजनीश चौधरी, स्टेट चेयरमैन-हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन।
पलवल जिले में सिर्फ दो राइस मिल हैं, वह भी धान खरीदना नहीं चाहते हैं। ऐसे में जिलेभर का करीब 20 हजार क्विंटल धान हर साल करनाल अनाज मंडी में लाकर बेचा जाता है। लेकिन इस बार गेटपास नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि पलवल में किसानों का धान 1200 रुपये प्रति क्विंटल में भी कोई खरीदने को तैयार नहीं हो रहा है। पूरी मंडी भरी हुई है। सरकार को कम से कम हरियाणा में तो एक दूसरे जिले में धान ले जाने की इजाजत देनी चाहिए। -गौरव तेवतिया, जिला प्रधान पलवल आढ़ती एसोसिएशन।