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Karnal News: स्कूलों की मनमानी, आरटीई के तहत नहीं दिए दाखिले
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। किताबों, वर्दी और फीस के बाद निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत दाखिले में भी मनमानी की है। कई स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग व अलाभप्रद बच्चों को समय रहते दस्तावेजों में कमी बताकर दाखिला नहीं दिया। अब उन्हें तिथि निकलने का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। ऐसे में अभिभावक और विद्यार्थी चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस तरह की कई शिकायतें शिक्षा विभाग के पास पहुंची हैं।
यह हालात तब हैं, जब नया सत्र शुरू हुए एक माह बीत चुका है और 29 अप्रैल आरटीई के तहत दाखिला देने की अंतिम तिथि थी। जारी शेड्यूल के अनुसार, 15 अप्रैल तक अभिभावकों को दाखिले के लिए आवेदन करना था। आरटीई एक्ट 2009 के तहत सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को अलाभप्रद व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नर्सरी, केजी व प्रथम कक्षा के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। दाखिले के लिए इस बार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम निर्धारित की गई है। विदित हो कि इस तरह दाखिला देने की प्रक्रिया गत वर्ष नियम 134ए को खत्म करने के बाद शुरू की गई थी।
स्कूल पर होगी कार्रवाई
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स के अनुसार शिक्षा निदेशालय की ओर जारी किए गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि अगर कोई स्कूल प्रवेश के दौरान बच्चों या अभिभावकों से किसी भी प्रकार की राशि की मांग करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई स्कूल राशि लेता है तो उससे शुल्क से 10 गुना जुर्माना लगाया जा सकता है।
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यह था दाखिले का शेड्यूल
- 15 अप्रैल तक आवेदन प्रकिया
- 17 अप्रैल को लॉटरी से ड्रा
- 22 अप्रैल को दाखिले की अंतिम तिथि
- 23 से 29 अप्रैल तक वेटिंग लिस्ट के आधार पर दाखिले
कमेटी करेगी शिकायतों का निवारण
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। संबंधित स्कूलों में पात्र बच्चों का दाखिला देना अनिवार्य है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है, जो बच्चों के आवेदन संबंधित शिकायतों व प्रश्नों का निवारण करेगी। - सदानंद वत्स, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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करनाल। किताबों, वर्दी और फीस के बाद निजी स्कूलों ने आरटीई के तहत दाखिले में भी मनमानी की है। कई स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग व अलाभप्रद बच्चों को समय रहते दस्तावेजों में कमी बताकर दाखिला नहीं दिया। अब उन्हें तिथि निकलने का हवाला देकर बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। ऐसे में अभिभावक और विद्यार्थी चक्कर काटने को मजबूर हैं। इस तरह की कई शिकायतें शिक्षा विभाग के पास पहुंची हैं।
यह हालात तब हैं, जब नया सत्र शुरू हुए एक माह बीत चुका है और 29 अप्रैल आरटीई के तहत दाखिला देने की अंतिम तिथि थी। जारी शेड्यूल के अनुसार, 15 अप्रैल तक अभिभावकों को दाखिले के लिए आवेदन करना था। आरटीई एक्ट 2009 के तहत सभी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को अलाभप्रद व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नर्सरी, केजी व प्रथम कक्षा के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होती हैं। दाखिले के लिए इस बार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवार की वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम निर्धारित की गई है। विदित हो कि इस तरह दाखिला देने की प्रक्रिया गत वर्ष नियम 134ए को खत्म करने के बाद शुरू की गई थी।
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स्कूल पर होगी कार्रवाई
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वत्स के अनुसार शिक्षा निदेशालय की ओर जारी किए गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि अगर कोई स्कूल प्रवेश के दौरान बच्चों या अभिभावकों से किसी भी प्रकार की राशि की मांग करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई स्कूल राशि लेता है तो उससे शुल्क से 10 गुना जुर्माना लगाया जा सकता है।
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यह था दाखिले का शेड्यूल
- 15 अप्रैल तक आवेदन प्रकिया
- 17 अप्रैल को लॉटरी से ड्रा
- 22 अप्रैल को दाखिले की अंतिम तिथि
- 23 से 29 अप्रैल तक वेटिंग लिस्ट के आधार पर दाखिले
कमेटी करेगी शिकायतों का निवारण
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों में ऐसे बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। संबंधित स्कूलों में पात्र बच्चों का दाखिला देना अनिवार्य है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है, जो बच्चों के आवेदन संबंधित शिकायतों व प्रश्नों का निवारण करेगी। - सदानंद वत्स, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी