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Karnal News: एक्यूआई <bha>@</bha>238 पहुंचा, सांस रोगियों की बढ़ी परेशानी

Sat, 15 Nov 2025 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sat, 15 Nov 2025 02:23 AM IST
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AQI reaches 238, increasing problems for respiratory patients
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। शहर की हवा लगातार बिगड़ रही है। शुक्रवार शाम चार बजे तक ही शहर का एक्यूआई 231 और शाम सात बजे तक 238 पहुंच गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। हवा की खराब सेहत का असर सांस रोगियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी रोजाना 250 से पार हो रही है इनमें 25 प्रतिशत सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीज हैं। दमे व फेफड़ों की अन्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। सप्ताह पहले तक ओपीडी में मरीजों की संख्या 150 तक ही हो रही थी।
नागरिक अस्पताल से श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप ने बताया कि सीओपीडी फेफड़ों की बीमारी है जो सांस लेने में कठिनाई पैदा करती है। यह मुख्य रूप से धूम्रपान के कारण होती है, लेकिन लंबे समय तक धुएं, धूल या रसायनों के संपर्क में रहने से भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से हर रोज 40-50 मरीज सीओपीडी के आ रहे हैं। इनमें सांस फूलने, तेज खांसी, बलगम बढ़ने और सीने में जकड़न की समस्या होती है। बड़ी संख्या बुजुर्गों, पुराने दमा मरीजों और धूल-धुएं के संपर्क में रहने वालों की है।
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उन्होंने बताया कि दिवाली के बाद हवा में लगातार उठ रहे धुएं, पराली से आए प्रदूषक और ठंड में बढ़ती स्मॉग ने मिलकर शहर की वायु गुणवत्ता खराब कर दी है। प्रदूषण बढ़ने से ही अस्थमा व सीओपीडी मरीजों में दौरे पड़ रहे हैं। अस्पताल में उनकी संख्या बढ़ी है। नागरिक अस्पताल में ओपीडी लोड बीते सप्ताह में 20-25 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ओपीडी समय समाप्त होने के बावजूद भी जो मरीज आ रहे हैं।
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- एक्यूआई 200 होते ही बिगड़ जाती है सेहत
डॉ. प्रदीप ने बताया कि इस समय हवा की गुणवत्ता फेफड़ों के लिए बेहद नुकसानदेह है। वायु गुणवत्ता सूचकांक ऊपर जाते ही सांस की नलियों में सूजन बढ़ती है। ठंडी हवा श्वसन नलियों को और संकुचित करती है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 कण सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर सूजन बढ़ाते हैं। डॉ. प्रदीप का कहना है कि एक्यूआई 200 होते ही मरीजों की हालत बिगड़नी शुरू हो जाती है। पिछले एक हफ्ते में खांसी, सांस फूलने, सीने में भारीपन और बलगम की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल में कई मरीज रात को भी सांस न चलने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।



- बचाव के उपाय

पुराने मरीज अपनी दवा नियमित लें
सुबह-शाम ठंडी हवा में नहीं टहलें
बाहर निकलते समय एन-95 मास्क पहनें
घर में वेंटिलेशन बनाए रखें, ठंडी हवा से बचें
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