फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Animal clone technology of NDRI is much cheaper than foreign technology

Karnal News: विदेशी तकनीक से काफी सस्ती है एनडीआरआई की पशु क्लोन तकनीक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Apr 2023 02:06 AM IST
विज्ञापन
Animal clone technology of NDRI is much cheaper than foreign technology
 गिर गाय का क्लोन अपनी सरोगेट माता के साथ।
माई सिटी रिपोर्टर
विज्ञापन

करनाल। एनडीआरआई ने पिछले माह 16 मार्च को ही दुनिया की पहली गिर गाय एवं देश की पहली गाय का क्लोन तैयार किया था। इससे पहले भी दुनिया के कुछ देश पशु क्लोनिंग कर चुके हैं, लेकिन एनडीआरआई की तकनीक विदेशी तकनीक से काफी सस्ती और सरल है। खास बात ये है कि इसमें डीएनए निकालने के लिए मशीन का प्रयोग नहीं किया जाता है। दैहिक कोशिकाओं को अंडे में डालकर कृत्रिम गर्भाशय में भ्रूण तैयार किया जाता है। गिर गाय के पहले क्लोन को गंगा नाम देने के पीछे भी एक विशेष कारण है। जिस तरह गंगा की धाराएं अविरल बहती रहती हैं, वैसे ही गंगा क्लोन की वंशावली भी लगातार आगे बढ़ती रही। जिससे देश में गोधन व दुग्ध की कमी न रहे। यही सोच कर क्लोन का नाम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने गंगा रखा था।
यूं तो एनडीआरआई करनाल ने भैंस की क्लोन गरिमा को भी 2009 में तैयार किया था, लेकिन गाय के दूध का देश के कुल उत्पादन में बेहद अहम योगदान है। खास बात ये है कि गिर नस्ल की गाय एक ब्यात में 3000 से 4000 लीटर तक दूध देती है। जलवायु परिवर्तन के बीच ऐसी प्रजातियों की जरूरत महसूस हुई जो गर्मी, ठंड आदि सभी तरह के मौसम को सहन करते हुए बेहतर दुग्ध उत्पादन में सहायक हो। लगातार बढ़ते तापमान को लेकर वैज्ञानिकों में जो चिंता बढ़ी है, जिसके लिए ऐसी नस्लों को संरक्षण व उनकी संख्या में इजाफा किया जाना बेहद आवश्यक है। सामान्य गर्भाधान प्रक्रिया से नौ माह में एक ब्यात ही मिलेगा लेकिन क्लोनिंग विधि से एक ही पशु से दर्जनों पशु उसी अवधि में तैयार किए जा सकते हैं।
विज्ञापन

एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि क्लोेनिंग की दिशा में 2021 में उत्तराखंड लाइव स्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड देहरादून के सहयोग से एनडीआरआई करनाल के पूर्व निदेशक डॉ. एमएस चौहान के नेतृत्व में गिर, साहीवाल और रेड-सिंधी गायों की क्लोनिंग का काम शुरू किया गया, इसके सरंक्षण और संख्या वृद्धि के लिए पशु क्लोनिंग तकनीक विकसित करना चुनौतीपूर्ण कार्य रहा लेकिन 16 मार्च को इसमें सफलता मिली और गिर नस्ल की एक क्लोन बछड़ी पैदा हुई। गिर किस्म की क्लोनिंग में साहीवाल किस्म की गाय से अंडा लिया, गिर किस्म का सेल (डीएनए) लिया और परखनली में भ्रूण तैयार करके फिर संकर प्रजाति की गाय में रोपित किया। इस कदम से दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, खासकर बुल (साड़ों) की कमी दूर होगी। भारत में मवेशियों की क्लोनिंग के लिए अनुसंधान गतिविधियों का विस्तार करने और शुरू करने में मदद मिलेगी। अब तक एनडीआरआई ने 25 क्लोन तैयार किए हैं। जिसमें से 13 जीवित हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है खासियत
गिर गाय अधिक सहनशील होती है, जो अधिक तापमान और ठंड सहन कर लेती है। मुख्यत: गुजरात में पाई जाने वाली गिर गाय में अन्य कई खूबियां भी हैं। विभिन्न ऊष्ण कटिबंध के प्रति भी रोग प्रतिरोधक है। शीघ्रता से ये बीमारियों की चपेट में नहीं आती हैं। इसलिए इसकी ब्राजील, अमेरिका, मैक्सिको और वेनेजुएला में भारी मांग है।

विदेशों से सस्ती है एनडीआरआई की क्लोन तकनीक
क्लोन वैज्ञानिकों के टीम लीडर डॉ. नरेश सेलोकर, मनोज कुमार सिंह ने बताया कि दो साल में स्वदेशी विधि विकसित करके क्लोन तैयार किया गया है। विदेशी विधियों में माइक्रोमैन्यूप्लेटर मशीन से अंडे का डीएनए निकाला जाता है। ये मशीन काफी महंगी होती है। डीएनए को हटाने के बाद जिस पशु का क्लोन तैयार करना होता है, उसकी दैहिक कोशिकाओं को अंडे में डाल दिया जाता है। एनडीआरआई द्वारा विकसित तकनीक सस्ती है, क्योंकि इसमें डीएनए निकालने के लिए मशीन का प्रयोग नहीं किया जाता है। अल्ट्रासाउंड और निर्देशित सुइयों का उपयोग कर पशु से अंडाणु लेते हैं। अनुकूल परिस्थिति में 24 घंटे तक परिपक्व करने के बाद उच्च गुणवत्ता वाली गाय की दैहिक कोशिकाओं का उपयोगदाता के रूप में होता है। जो व्युत्पन्न अंडाणु (ओपीयू) से जोड़ा जाता है। सात दिन के इन विट्रो-कल्चर के बाद विकसित भ्रूण (ब्लास्टोसिस्ट) को किसी भी गाय में स्थानांतरित करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed