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एनीमिया मुक्त अभियान : जांच में हर दूसरा व्यक्ति खून की कमी से पीड़ित
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जिले में अभी तक 25,661 लोगों ने कराई हीमोग्लोबिन की जांच, 7844 कुपोषित व 461 अति कुपोषित श्रेणी में मिले
अनुज शर्मा
करनाल। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के आठ दिन बीत चुके हैं। इस दौरान जिले में अभी तक 25,661 लोगों ने हीमोग्लोबिन यानी खून की जांच कराई है। इनमें से 52.5 प्रतिशत यानी 13,479 लोगों में खून की कमी मिली है। इनमें 20 प्रतिशत यानी 5,174 लोगों में मध्यम, 31 प्रतिशत यानी 7,844 लोग कुपोषित व दो प्रतिशत यानी 461 लोग अति कुपोषित श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
उप-सिविल सर्जन डॉ. सरोज ने बताया कि एनीमिया मुक्त हरियाणा के तहत जिलेभर के नागरिक अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सब सेंटर व आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। जिनमें प्रशिक्षित गठित टीमें जांच कर रही हैं। यह अभियान आगामी 100 दिन यानी तीन माह तक चलेगा।
डॉ. सरोज ने बताया कि पिछले आठ दिनों में मध्यम, कुपोषित व अति कुपोषित श्रेणी में मिले 13,479 लोगों में से 65.01 प्रतिशत यानी 8,763 लोगों का इलाज शुरू करवा दिया गया है। इसके अलावा इनमें से 9.88 प्रतिशत यानी 1,332 लोगों को इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। जिससे उनका बेहतर इलाज हो सके। विशेषज्ञों की मानें तो यह समस्या अत्यधिक तला हुआ भोजन व फास्ट फूड का सेवन करने से बढ़ रही है। - संवाद
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एनीमिया के लक्षण व बचाव
डीएमईओ डॉ. अजय ने बताया कि जल्दी थक जाना व सांस फूलना, सुस्ती व नींद आते रहना, जल्दी-जल्दी बीमार पड़ना, पढ़ाई, खेल-कूद व अन्य कार्याें में मन न लगना, भूख न लगना, चक्कर आना, जीभ, हथेलियों व आंखों में सफेदपन इसके लक्षण हैं। वहीं एनीमिया मिलने पर आयरन की गोली व सिरप की आयु वर्ग अनुसार निर्धारित खुराक लें, आंत के कीड़ों के लिए हर छह माह में एल्बेंडाजोल की गोली लें, खून में हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच व उपचार करवाएं, रोजाना हरी सब्जियां, फल, अनाज और दालें खाने व व्यायाम से एनीमिया को दूर किया जा सकता है।
एनीमिया मुक्त अभियान के तहत पिछले आठ दिनों में जिले के नागरिक अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी व सब-सेंटर स्तर पर 25,661 लोगों के हीमोग्लोबिन की जांच की गई थी जिसमें 13,479 में खून की कमी मिली। एनीमिया के लक्षण दिखने पर सबसे पहले अपनी जांच कराएं। इसके बाद डॉक्टर की निगरानी में इलाज शुरू करें और बेवजह किसी भी तरह की दवा लेने से बचें।
- डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल
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अनुज शर्मा
करनाल। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के आठ दिन बीत चुके हैं। इस दौरान जिले में अभी तक 25,661 लोगों ने हीमोग्लोबिन यानी खून की जांच कराई है। इनमें से 52.5 प्रतिशत यानी 13,479 लोगों में खून की कमी मिली है। इनमें 20 प्रतिशत यानी 5,174 लोगों में मध्यम, 31 प्रतिशत यानी 7,844 लोग कुपोषित व दो प्रतिशत यानी 461 लोग अति कुपोषित श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
उप-सिविल सर्जन डॉ. सरोज ने बताया कि एनीमिया मुक्त हरियाणा के तहत जिलेभर के नागरिक अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सब सेंटर व आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष जांच शिविर लगाए जा रहे हैं। जिनमें प्रशिक्षित गठित टीमें जांच कर रही हैं। यह अभियान आगामी 100 दिन यानी तीन माह तक चलेगा।
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डॉ. सरोज ने बताया कि पिछले आठ दिनों में मध्यम, कुपोषित व अति कुपोषित श्रेणी में मिले 13,479 लोगों में से 65.01 प्रतिशत यानी 8,763 लोगों का इलाज शुरू करवा दिया गया है। इसके अलावा इनमें से 9.88 प्रतिशत यानी 1,332 लोगों को इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। जिससे उनका बेहतर इलाज हो सके। विशेषज्ञों की मानें तो यह समस्या अत्यधिक तला हुआ भोजन व फास्ट फूड का सेवन करने से बढ़ रही है। - संवाद
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एनीमिया के लक्षण व बचाव
डीएमईओ डॉ. अजय ने बताया कि जल्दी थक जाना व सांस फूलना, सुस्ती व नींद आते रहना, जल्दी-जल्दी बीमार पड़ना, पढ़ाई, खेल-कूद व अन्य कार्याें में मन न लगना, भूख न लगना, चक्कर आना, जीभ, हथेलियों व आंखों में सफेदपन इसके लक्षण हैं। वहीं एनीमिया मिलने पर आयरन की गोली व सिरप की आयु वर्ग अनुसार निर्धारित खुराक लें, आंत के कीड़ों के लिए हर छह माह में एल्बेंडाजोल की गोली लें, खून में हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच व उपचार करवाएं, रोजाना हरी सब्जियां, फल, अनाज और दालें खाने व व्यायाम से एनीमिया को दूर किया जा सकता है।
एनीमिया मुक्त अभियान के तहत पिछले आठ दिनों में जिले के नागरिक अस्पताल, सभी सीएचसी, पीएचसी व सब-सेंटर स्तर पर 25,661 लोगों के हीमोग्लोबिन की जांच की गई थी जिसमें 13,479 में खून की कमी मिली। एनीमिया के लक्षण दिखने पर सबसे पहले अपनी जांच कराएं। इसके बाद डॉक्टर की निगरानी में इलाज शुरू करें और बेवजह किसी भी तरह की दवा लेने से बचें।
- डॉ. कृष्ण कुमार, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, करनाल