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Karnal News: संसद में मुद्दा उठने से कृषि यंत्र इंडस्ट्री को संजीवनी की उम्मीद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Dec 2022 09:00 AM IST
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Agriculture machinery industry hopes for revival due to issue raised in Parliament
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। प्रदूषण की मार कहें या एनजीटी की सख्ती से बढ़ती परेशानी, लेकिन करनाल की 1500 करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली कृषि यंत्र इंडस्ट्री महंगी होती पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और कोयले पर लगती पाबंदी से डगमगा रही है। सांसद संजय भाटिया के संसद में मुद्दा उठाए जाने के बाद यहां के उद्यमियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
एनजीटी की जो पाबंदियां लगाई जा रही हैं और 31 दिसंबर 2022 के बाद कोयला संचालित बॉयलर उद्यमों को बंद करने का नोटिस जारी किया गया है। उससे उद्यमियों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। हालांकि करनाल में बॉयलर संचालित इंडस्ट्री कम ही हैं। जो अन्य इंडस्ट्री हैं, उसमें शहरी क्षेत्र में तो अधिकांश इंडस्ट्री में पीएनजी पहुंच चुकी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में अभी अधिकांश स्थानों पर पीएनजी की लाइन नहीं पहुंच सकी है। सबसे खास बात तो ये है कि जब तक एनजीटी के आदेश नहीं थे, तो पीएनजी कंपनियों के अधिकारी उद्यमियों के पास जाकर उन्हें कनेक्शन देने के लिए लालायित रहते थे लेकिन जब से एनजीटी के आदेश आए हैं, तब से पीएनजी गैस कंपनियों के अधिकारियों व कर्मचारियों के भी भाव बढ़ गए हैं।
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पीएनजी के भाव लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे अब उद्यमियों का लागत मूल्य कई गुना बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता ये है कि महंगी पीएनजी से उत्पादित महंगे उत्पाद एनसीआर से बाहर की फैक्ट्रियों के मुकाबले वैश्विक बाजार में ठहर नहीं पा रहे हैं, क्योंकि ग्राहक को तो जहां सस्ता प्रोडक्ट मिलेगा, वह तो वहीं से खरीदेगा। इसलिए करनाल की इंडस्ट्री घाटे की मार भी झेलने को विवश है।
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इस बड़ी समस्याओं को करनाल के सांसद द्वारा संसद में उठाए जाने के बाद अब उद्यमियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। उद्यमियों को कहना है कि अब शायद सरकार का ध्यान उद्यमियों की दिक्कतों की ओर जाए और पीएनजी के भावों को नियंत्रित करने की कोई कार्ययोजना तैयार हो। साथ ही अन्य दिक्कतों का भी निराकरण हो सकेगा।
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पीएनजी वास्तव में लगातार महंगी होती जा रही है, एक साल में ही इसकी कीमतें दोगुने से अधिक हो गई हैं। पीएनजी सिस्टम पर फैक्ट्री को लाना भी बेहद महंगा है। क्षेत्र में बॉयलर संचालित कई उद्योग हैं, जिन पर बंदी का खतरा उत्पन्न हो गया है। सरकार को तत्काल इस पर ध्यान देना चाहिए। सांसद ने सही समय पर सही मुद्दा उठाया है।

- मनोज अरोड़ा, प्रधान एचएसआईआईडीसी एसोसिएशन करनाल (फोटो-1003)
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इसमें कोई दो राय नहीं कि प्रदूषण खत्म होना चाहिए लेकिन इंडस्ट्री को संचालित करने और कीमतों में समन्वय बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पीएनजी की कीमतों पर नियंत्रण हो। उत्पादन लागत अधिक आएगी तो प्रोडक्ट भी महंगे होंगे, ऐसा होता है तो एनसीआर क्षेत्र के बाहर की फैक्ट्रियों के प्रोडक्ट के सामने बाजार में हमारे महंगे प्रोडक्ट कैसे ठहर सकेंगे।
- भावुक मेहता, महासचिव, करनाल एग्रीकल्चर इंप्लीमेंट्स मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन (फोटो-1004)
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