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फसल चक्र को वर्षा चक्र से जोड़े हरियाणा : राजेंद्र सिंह
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मैगसेसे पुरस्कार विजेता जलपुरुष राजेंद्र सिंह का कहना है कि हरियाणा में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर जो स्थिति पैदा हुई है, वह अगले साल इससे ज्यादा हो सकती है। इस राज्य में किसी संभावित जलवायु संकट के खतरे से बचने के लिए संभलकर चलने की जरूरत है। स्मॉग के जो बादल करनाल समेत प्रदेश में छाए थे, उनमें 20 तरह की घातक गैसें थीं। हरियाणा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए फसल चक्र को वर्षा चक्र के साथ तुरंत प्रभाव से जोड़ने की जरूरत है। इससे गंभीर होती समस्या का समाधान हो जाएगा। अन्यथा अगले साल भयानक स्थिति पैदा हो सकती है। जलपुरुष राजेंद्र सिंह मंगलवार को करनाल में एक आयोजन में शिरकत करने आए थे। इस दौरान अमर उजाला कार्यालय में एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का जो दुष्प्रभाव करनाल और हरियाणा के अन्य जिलों में हुआ है उससे बचने के कई उपाय हैं। अपनी जीवन पद्घति को भगवानमय बनाना होगा। यानी भूमि, गगन, वायु, अग्नि व नीर इन पांच महाभूत को समझकर उसके साथ सम्मान सहित जीना होगा। इससे खतरे से बचने का रास्ता खुलता है। भारतीय खेती का जो मैकेनाइजेशन, केमिकलाइजेशन हुआ है उसे आर्गेनिक करना होगा। उद्योगों के प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का काम करना होगा। आरामदायक जीवनशैली से जुड़ी परिवहन व्यवस्था चाहे वह आकाश मार्ग की हो या सड़क की, इन पर भी सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानव का प्रकृति से लेनेदेने का जो रिश्ता है उसे बराबर निभाना चाहिए। जितना पानी जीवन में इस्तेमाल करते हैं उतना पानी धरती को देना चाहिए। यह लेनदेन बराबर हो। यदि किसी भावी पर्यावरणीय खतरे से बचना है तो प्राकृतिक जीवन पद्घति व अनुकूलन का ध्यान रखना होगा। हरियाणा में पशुपालन, खेती व उद्योग में प्राकृतिक समृद्धि को भी ध्यान में रखना होगा। किस गति से विकास के काम कर रहे हैं। यदि अति गति में करेंगे तो दुर्घटनाग्रस्त होकर उल्टे गिरेंगे। यदि सद्गति से करेंगे तो देश को आगे बढ़ाएंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने उनके परामर्श पर वेट लैंड अथॉरिटी (जल भंडारण प्राधिकरण) का गठन किया है। इससे बारिश के पानी का प्रबंधन हो सकेगा। जर्मनी में ऐसा किया जाता है। वहां बारिश का पानी समुद्र में नहीं जाने देते। वर्षा ऋतु के साथ फसल चक्र जोड़ने से हरियाणा आदर्श राज्य बन जाएगा। हरियाणा में पुराने तालाब प्रदूषित हो रहे हैं। तालाबों के शुद्घिकरण का कार्य युद्घस्तर पर होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मानव का प्रकृति से लेनेदेने का जो रिश्ता है उसे बराबर निभाना चाहिए। जितना पानी जीवन में इस्तेमाल करते हैं उतना पानी धरती को देना चाहिए। यह लेनदेन बराबर हो। यदि किसी भावी पर्यावरणीय खतरे से बचना है तो प्राकृतिक जीवन पद्घति व अनुकूलन का ध्यान रखना होगा। हरियाणा में पशुपालन, खेती व उद्योग में प्राकृतिक समृद्धि को भी ध्यान में रखना होगा। किस गति से विकास के काम कर रहे हैं। यदि अति गति में करेंगे तो दुर्घटनाग्रस्त होकर उल्टे गिरेंगे। यदि सद्गति से करेंगे तो देश को आगे बढ़ाएंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने उनके परामर्श पर वेट लैंड अथॉरिटी (जल भंडारण प्राधिकरण) का गठन किया है। इससे बारिश के पानी का प्रबंधन हो सकेगा। जर्मनी में ऐसा किया जाता है। वहां बारिश का पानी समुद्र में नहीं जाने देते। वर्षा ऋतु के साथ फसल चक्र जोड़ने से हरियाणा आदर्श राज्य बन जाएगा। हरियाणा में पुराने तालाब प्रदूषित हो रहे हैं। तालाबों के शुद्घिकरण का कार्य युद्घस्तर पर होना चाहिए।
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