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किन्नर समाज, समलैंगिक समुदाय की स्वास्थ्य समस्याओं को पाठ्यक्रम में जोड़ा : डॉ. दुरेजा
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करनाल। कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में इस बार मेडिकल विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर (किन्नर समाज) और समलैंगिक समुदाय की स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित मुद्दों को जोड़ा गया है। मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ जगदीश दुरेजा ने कहा कि बदलते वक्त के साथ नए बदलाव को आत्मसात करना, उनके संस्थान का मूलमंत्र रहा है और इस दिशा में चिकित्सकों की नई पीढ़ी को समाज के हर तबके से संबंधित स्वास्थ्य अधिकारों के प्रति जागरूक करना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर और समलैंगिक समुदाय के प्रति भावी स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील बनाना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। कम्यूनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष और जन स्वास्थ्य जागरूकता के नोडल अधिकारी डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि उनके विभाग ने इस बात को समझा कि समाज में एक ऐसा भी वर्ग है जो मुख्यधारा का हिस्सा नहीं है और समाज में अमूमन तिरस्कृत है।
ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय के साथ-साथ समलैंगिक, बाइसेक्सुअल समुदाय दरकिनार कर दिए गए वर्गों में एक हैं। डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि इन समुदायों को आम जिंदगी में कई बार सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त करने में कई अड़चनों का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर ये दुर्व्यवहार आम जनता व स्वास्थ्यकर्मियों को इन समुदाय के बारे में कम जानकारी होने या इनके बारे में गलत फहमियों की वजह से होता है।
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डॉ जगदीश दुरेजा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि कम्युनिटी मेडिसिन विभाग मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नए विषयों को अपनाकर अभी से भावी चिकित्सकों को संवेदनशील बना रहा है।
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उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर और समलैंगिक समुदाय के प्रति भावी स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशील बनाना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। कम्यूनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष और जन स्वास्थ्य जागरूकता के नोडल अधिकारी डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि उनके विभाग ने इस बात को समझा कि समाज में एक ऐसा भी वर्ग है जो मुख्यधारा का हिस्सा नहीं है और समाज में अमूमन तिरस्कृत है।
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ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय के साथ-साथ समलैंगिक, बाइसेक्सुअल समुदाय दरकिनार कर दिए गए वर्गों में एक हैं। डॉ राजेश गर्ग ने कहा कि इन समुदायों को आम जिंदगी में कई बार सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को प्राप्त करने में कई अड़चनों का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर ये दुर्व्यवहार आम जनता व स्वास्थ्यकर्मियों को इन समुदाय के बारे में कम जानकारी होने या इनके बारे में गलत फहमियों की वजह से होता है।
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डॉ जगदीश दुरेजा ने कहा कि उन्हें खुशी है कि कम्युनिटी मेडिसिन विभाग मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नए विषयों को अपनाकर अभी से भावी चिकित्सकों को संवेदनशील बना रहा है।