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पुलिस पर हमला कर खीरा को भगाने में मदद करने वाला उसका मौसेरा भाई गिरफ्तार
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पुलिस पर हमला कर सुनील उर्फ खीरा को यमुनानगर जेल ले जाने से पहले से छुड़ाने में उसके मौसेरे भाई मनजीत का अहम रोल था। उसे सीआईए-1 पुलिस ने अवैध हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया है। वहीं एक लाख रुपये का इनामी बदमाश सुनील उर्फ खीरा और उसका साथी अंकुश कमालपुर को राजस्थान बीकानेर की पुलिस ने पकड़ा हुआ है। इन्हें करनाल पुलिस अगले सप्ताह वीरवार तक प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आएगी।
सीआईए-1 इंचार्ज इंस्पेक्टर दीपेंद्र राणा ने बताया कि उन्हें इनामी बदमाश सुनील उर्फ खीरा को भगाने में मदद करने वाले उसके एक अन्य साथी के बारे में सूचना मिली थी। सूचना मिलने पर मुख्य सिपाही रोहित कुमार की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया गया। आरोपी मंजीत उर्फ बिन्ना निवासी कर्ण विहार करनाल को अवैध देसी पिस्तौल और एक राउंड के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि खीरा को भगाने वाला अंकुश कमालपुर, फुसगढ़ अभिषेक व एक आरोपी पलवल का था। पुलिस पर गोली चलाने वाले ये तीनों थे और मंजीत कार लेकर अल्फा सिटी के पास खड़ा था। खीरा को छुड़ाने के बाद वे उसे कार में लेकर कुरुक्षेत्र की तरफ भागे थे। मनजीत घर चला गया था।
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जेल से खीरा करता था मासी के लड़के मनजीत से बात
सीआईए वन इंचार्ज दीपेंद्र राणा ने बताया कि खीरा जगाधरी जिला जेल में बंद था। वहां बात करने के लिए मंजीत का नंबर दिया हुआ था। इतना ही नहीं खीरा अवैध रूप से मोबाइल जेल में रखता था और उससे भी बात करता था। फोन पर बात करने से ही उन्होंने पूरी योजना बनाई थी। मनजीत ने ही तीनों साथियों को शाहबाद से अवैध हथियार लेकर दिये थे। फिर वे किसी की बाइक मांगकर नये बस स्टैंड पर गये थे। बाइक को वहीं छोड़कर फरार हो गये थे।
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ये था मामला
28 मई को यमुनानगर पुलिस सात साल की सजा काट रहे मोनू उर्फ सुनील उर्फ खीरा को यमुनानगर जेल ले जा रही थी। जब पुलिस कर्मचारी खीरा को लेकर नये बस स्टैंड पर पहुंचे तो खीरा के तीन दोस्तों ने पुलिस के तीन कर्मचारियों पर फायरिंग की और उनकी आंखों में मिर्च पाउडर भी झोंक दिया। इस दौरान दो पुलिस कर्मचारियों की टांगों में गोली लगी थी। तीनों बदमाश अपने साथी खीरा को लेकर फरार हो गये थे। खीरा पर हत्या लूट सहित कई मामले दर्ज हैं।
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मूल रूप से पानीपत का रहने वाला है खीरा, नौ मामले हैं दर्ज
कैदी और हत्यारोपी बदमाश सुनील उर्फ मोनू उर्फ खीरा मूल रूप से पानीपत जिले के भादड़ गांव का रहने वाला है लेकिन पिछले कई सालों से उसका परिवार करनाल की कर्ण विहार गली नंबर सात में रहता है। 2015 में सुनील के खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद यमुनानगर में लूट, डकैती, नशा तस्करी सहित चार मामले दर्ज हैं तो वहीं करनाल में हत्या सहित पांच मामले दर्ज हैं।
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सीआईए-1 इंचार्ज इंस्पेक्टर दीपेंद्र राणा ने बताया कि उन्हें इनामी बदमाश सुनील उर्फ खीरा को भगाने में मदद करने वाले उसके एक अन्य साथी के बारे में सूचना मिली थी। सूचना मिलने पर मुख्य सिपाही रोहित कुमार की अध्यक्षता में एक टीम का गठन किया गया। आरोपी मंजीत उर्फ बिन्ना निवासी कर्ण विहार करनाल को अवैध देसी पिस्तौल और एक राउंड के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि खीरा को भगाने वाला अंकुश कमालपुर, फुसगढ़ अभिषेक व एक आरोपी पलवल का था। पुलिस पर गोली चलाने वाले ये तीनों थे और मंजीत कार लेकर अल्फा सिटी के पास खड़ा था। खीरा को छुड़ाने के बाद वे उसे कार में लेकर कुरुक्षेत्र की तरफ भागे थे। मनजीत घर चला गया था।
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जेल से खीरा करता था मासी के लड़के मनजीत से बात
सीआईए वन इंचार्ज दीपेंद्र राणा ने बताया कि खीरा जगाधरी जिला जेल में बंद था। वहां बात करने के लिए मंजीत का नंबर दिया हुआ था। इतना ही नहीं खीरा अवैध रूप से मोबाइल जेल में रखता था और उससे भी बात करता था। फोन पर बात करने से ही उन्होंने पूरी योजना बनाई थी। मनजीत ने ही तीनों साथियों को शाहबाद से अवैध हथियार लेकर दिये थे। फिर वे किसी की बाइक मांगकर नये बस स्टैंड पर गये थे। बाइक को वहीं छोड़कर फरार हो गये थे।
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ये था मामला
28 मई को यमुनानगर पुलिस सात साल की सजा काट रहे मोनू उर्फ सुनील उर्फ खीरा को यमुनानगर जेल ले जा रही थी। जब पुलिस कर्मचारी खीरा को लेकर नये बस स्टैंड पर पहुंचे तो खीरा के तीन दोस्तों ने पुलिस के तीन कर्मचारियों पर फायरिंग की और उनकी आंखों में मिर्च पाउडर भी झोंक दिया। इस दौरान दो पुलिस कर्मचारियों की टांगों में गोली लगी थी। तीनों बदमाश अपने साथी खीरा को लेकर फरार हो गये थे। खीरा पर हत्या लूट सहित कई मामले दर्ज हैं।
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मूल रूप से पानीपत का रहने वाला है खीरा, नौ मामले हैं दर्ज
कैदी और हत्यारोपी बदमाश सुनील उर्फ मोनू उर्फ खीरा मूल रूप से पानीपत जिले के भादड़ गांव का रहने वाला है लेकिन पिछले कई सालों से उसका परिवार करनाल की कर्ण विहार गली नंबर सात में रहता है। 2015 में सुनील के खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद यमुनानगर में लूट, डकैती, नशा तस्करी सहित चार मामले दर्ज हैं तो वहीं करनाल में हत्या सहित पांच मामले दर्ज हैं।