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Karnal News: पॉक्सो के मामले में आरोपी को अदालत से नियमित जमानत, छह माह की हिरासत के बाद मिली राहत
Thu, 11 Dec 2025 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Thu, 11 Dec 2025 01:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (रेप एवं पॉक्सो मामलों) के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेम राज की अदालत ने 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़े पॉक्सो एक्ट एवं बीएनएसएस की धाराओं के तहत दर्ज मामले में हाल में कैथल रोड पर रह रहे व मूलरूप से सहारनपुर के रहने वाले 20 वर्षीय आरोपी को नियमित जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी चार जून से न्यायिक हिरासत में है और अब उसकी आगे की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
मामला 23 जनवरी को दर्ज हुई प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें पीड़िता के भाई ने शक के आधार पर आरोप लगाया था कि उसकी 16 वर्षीय बहन को आरेापी बहला-फुसलाकर ले गया। जांच के दौरान पुलिस ने युवती को आरोपी के घर से बरामद किया और पीड़िता का बयान धारा 183 बीएनएसएस के तहत दर्ज किया। ट्रायल के दौरान पीड़िता, उसके भाई और मां तीनों ने अदालत में लगाए गए आरोपों से इन्कार करते हुए आरोपी को पूरी तरह निर्दोष बताया। पीड़िता ने गवाही में कहा कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि धारा 183 के तहत दिया गया बयान मात्र सहायक स्वरूप का होता है और जब ट्रायल में पीड़िता सहित मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए हों, तब ऐसी पूर्व बयानबाजी का कोई स्वतंत्र मूल्य नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि आरोपी को जेल में रखने से अभियोजन को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होगा। अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने के निर्देश जारी किए हैं।
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कुरुक्षेत्र। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (रेप एवं पॉक्सो मामलों) के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हेम राज की अदालत ने 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़े पॉक्सो एक्ट एवं बीएनएसएस की धाराओं के तहत दर्ज मामले में हाल में कैथल रोड पर रह रहे व मूलरूप से सहारनपुर के रहने वाले 20 वर्षीय आरोपी को नियमित जमानत पर रिहा करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी चार जून से न्यायिक हिरासत में है और अब उसकी आगे की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता नहीं है।
मामला 23 जनवरी को दर्ज हुई प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें पीड़िता के भाई ने शक के आधार पर आरोप लगाया था कि उसकी 16 वर्षीय बहन को आरेापी बहला-फुसलाकर ले गया। जांच के दौरान पुलिस ने युवती को आरोपी के घर से बरामद किया और पीड़िता का बयान धारा 183 बीएनएसएस के तहत दर्ज किया। ट्रायल के दौरान पीड़िता, उसके भाई और मां तीनों ने अदालत में लगाए गए आरोपों से इन्कार करते हुए आरोपी को पूरी तरह निर्दोष बताया। पीड़िता ने गवाही में कहा कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। अदालत ने यह भी माना कि धारा 183 के तहत दिया गया बयान मात्र सहायक स्वरूप का होता है और जब ट्रायल में पीड़िता सहित मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए हों, तब ऐसी पूर्व बयानबाजी का कोई स्वतंत्र मूल्य नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि आरोपी को जेल में रखने से अभियोजन को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं होगा। अदालत ने आरोपी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने के निर्देश जारी किए हैं।
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