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शिक्षाविद लेंगे ओवम पिकअप, आईवीएफ तकनीक का प्रशिक्षण
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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में 11 से 20 नवंबर तक दस दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें आठ राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 12 शिक्षाविदों को ओवम पिकअप और आईवीएफ टेक्नालॉजी के बारे में जानकारी दी जाएगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (एनीमल साइंस) डा. बीएन त्रिपाठी बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन सत्र में शिरकत करेंगे। संस्थान के निदेशक डा. एमएस चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियां कर ली हैं। इसका उद्देश्य पशु नस्ल सुधार की तकनीक का विस्तार करना है।
प्रशिक्षण कोर्स निदेशक डा. एनके सिंह ने बताया कि ओवम पिकअप तकनीक के तहत अच्छी नस्ल की मादा जानवर से अंडाणु निकालते हैं और उसका परखनली में निषेचन कर भ्रूण बनाते हैं। यह भ्रूण पशु के शरीर से बाहर प्रयोगशाला में बनाया जाता है। भ्रूण को सरोगेट (आया) जानवर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करते हैं। जो गर्भावस्था का समय पूरा होने पर बच्चे के रूप में जन्म लेता है। इस विधि से एक साल में एक अच्छे पशु से कई सारे भ्रूण पैदा कर उनसे बहुत से बच्चे पैदा कर सकते हैं। दूसरी ओर, आईवीएफ तकनीक में अंडाणु व शुक्राणु मिलाकर निषेचन से भ्रूण बनाया जाता है।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (एनीमल साइंस) डा. बीएन त्रिपाठी बतौर मुख्य अतिथि उद्घाटन सत्र में शिरकत करेंगे। संस्थान के निदेशक डा. एमएस चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियां कर ली हैं। इसका उद्देश्य पशु नस्ल सुधार की तकनीक का विस्तार करना है।
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प्रशिक्षण कोर्स निदेशक डा. एनके सिंह ने बताया कि ओवम पिकअप तकनीक के तहत अच्छी नस्ल की मादा जानवर से अंडाणु निकालते हैं और उसका परखनली में निषेचन कर भ्रूण बनाते हैं। यह भ्रूण पशु के शरीर से बाहर प्रयोगशाला में बनाया जाता है। भ्रूण को सरोगेट (आया) जानवर के गर्भाशय में प्रत्यारोपित करते हैं। जो गर्भावस्था का समय पूरा होने पर बच्चे के रूप में जन्म लेता है। इस विधि से एक साल में एक अच्छे पशु से कई सारे भ्रूण पैदा कर उनसे बहुत से बच्चे पैदा कर सकते हैं। दूसरी ओर, आईवीएफ तकनीक में अंडाणु व शुक्राणु मिलाकर निषेचन से भ्रूण बनाया जाता है।
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