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Karnal News: संपत्ति कर भुगतान में सरकारी संस्थानों से आधार, पीपीपी अब जरूरी नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jan 2024 04:41 AM IST
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Aadhaar, PPP no longer necessary for property tax payments from government institutions
- हरियाणा सरकार ने संपत्तिकर भुगतान को लेकर कई अन्य नियमों का भी किया सरलीकरण
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देव शर्मा
करनाल। नगर निगम का करोड़ों रुपया सरकारी संस्थानों, कार्यालयों पर बकाया है, लेकिन अब हरियाणा सरकार ने इसकी राह आसान करते हुए सरकारी संस्थानों, विभागों के कार्यालयों से आधारकार्ड और परिवार पहचान पत्र की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इसके साथ ही अब संपत्ति कर के अग्रिम भुगतान की व्यवस्था को भी बंद कर दिया गया है। जिन लोगों ने संपत्तिकर का अग्रिम भुगतान किया हुआ है, उन्हें चालू वित्तीय वर्ष का संपत्तिकर लेने के बाद शेष को वापस किया जा रहा है।
हरियाणा सरकार बकाया संपत्तिकर के एक मुश्त भुगतान पर शतप्रतिशत ब्याजमाफी दे रही है। इसके साथ-साथ पिछले एरियर पर 15 प्रतिशत और चालू वित्तीय वर्ष पर 15 प्रतिशत की छूट 29 फरवरी तक दी जा रही है। इसके लिए संपत्तिकर आईडी को स्वप्रमाणित करना आवश्यक है। जो लोग संपत्तिकर आईडी को स्वप्रमाणित नहीं करेंगे, उन्हें ये लाभ नहीं मिल पाएगा।
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नगर निगम का करीब 330 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें एक बड़ी राशि जो करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये है वह सरकारी संस्थानों व विभागों पर बकाया है। सरकारी संस्थानों व विभागीय कार्यालय अधीक्षकों को संपत्ति कर भुगतान में एक दिक्कत का सामना करना पड़ता था, क्योंकि इसमें संबंधित अधिकारी को अपना परिवार पहचान पत्र और आधार कार्ड लगाना होता था, जिसके आधार पर ओटीपी आता था। अधिकारी व्यक्तिगत आधार कार्ड या पीपीपी लगाने से बचते थे। जिसके कारण अधिकांश कार्यालयों व संस्थानों से एक लंबे समय से संपत्ति कर का भुगतान नहीं हो पा रहा था, लेकिन निजी व गैरसरकारी संस्थान व संपत्तियों से आधारकार्ड व परिवार पहचान पत्र की पूर्ववत व्यवस्था ही जारी रहेगी।
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नगर निगम के कर अधीक्षक ने बताया कि अब हरियाणा सरकार ने सरकारी संस्थानों, विभागों से संपत्तिकर भुगतान को लेकर आधारकार्ड व परिवार पहचान पत्र लगाने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। अब ओटीपी संबंधित संस्थान व विभाग की ई-मेल पर आया करेगा, जिससे किसी अधिकारी को अपना आधारकार्ड व पीपीपी नहीं लगाना होगा।
अब 500 से कम रखनी होंगी शिकायतें
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से दिशा निर्देश जारी किए गए हैं कि वह कोई भी निकाय 500 से अधिक शिकायतें लंबित नहीं रख सकता है। इसकी रिपोर्ट भी मांगी गई है। इसमें संपत्ति कर आईडी मेंं नाम, मोबाइल फोन नंबर व क्षेत्र का नाम आदि सभी तरह की शिकायतें शामिल हैं। हालांकि करनाल नगर निगम के पास सिर्फ 310 शिकायतें ही लंबित हैं।

अग्रिम संपत्तिकर भुगतान की व्यवस्था खत्म
अब हरियाणा सरकार ने अग्रिम संपत्तिकर भुगतान की व्यवस्था को बंद कर दिया है। नगर निगम के कर विभाग के अधिकारी ने बताया कि ये दिशा निर्देश हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में दिए गए हैं। अक्सर ऐसे लोग, जो विदेशों में या फिर करनाल शहर से बाहर रहते हैं, वह अपनी संपत्ति का कर अग्रिम दे देते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। समय पर ही उन्हें भुगतान करना होगा। जिन लोगों ने संपत्तिकर अग्रिम दिया हुआ है, उसे चालू वित्तीय वर्ष में समाहित किया जा रहा है, फिर भी जिन कर अग्रिम कर बच रहा है, वह उन्हें वापस किया जा रहा है।
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