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Karnal News: पूजा के दौरान नहर में नहाने उतरा युवक डूबा, मातम में बदलीं छठ पर्व की खुशियां

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 02:05 AM IST
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A young man drowned while bathing in a canal during the puja, turning the joy of Chhath festival into mourning.
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। पश्चिमी यमुना नहर के घाट नंबर-16 पर मंगलवार सुबह पूजन के दौरान नहाने उतरे सदर बाजार निवासी संतोष यादव (35) डूब गए। वे करीब 100 मीटर तक नहर में तैरते रहे लेकिन बीच में जाने के बाद डूब गए। इस हादसे से परिवार में छठ पर्व की खुशियां मातम में बदल गईं। सूचना मिलते ही गोताखोर कर्ण की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया लेकिन शाम तक उनका पता नहीं चल पाया। हादसे के बाद से परिवार गुस्से में है। संतोष की पत्नी ने प्रशासन और पुलिस को चेतावनी दी है कि यदि उनके पति को नहीं ढूंढा गया तो वह भी नहर में कूदकर जान दे देंगी। उनका कहना है कि एक दिन पहले नहर में पानी कम था, मंगलवार को सुबह छह बजे के बाद जलस्तर बढ़ गया और बहाव तेज हो गया।

मूल रूप से बिहार निवासी संतोष यादव दो बेटे और पोतों के साथ नहर पर छठ पूजा के लिए पहुंचे थे। परिवार के मुताबिक, उन्हें अच्छी तरह तैरना आता था इसलिए किसी ने रोका नहीं। वह घाट के एक किनारे से दूसरे किनारे की ओर जा रहे थे तभी अचानक डूब गए। मंगलवार की शाम को भी नहर से शव मिलने की अफवाह फैली। इसकी सूचना पर परिवार मौके पर पहुंचा लेकिन वहां कुछ नहीं था। रामनगर थाना प्रभारी महावीर का कहना है कि शिकायत के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सर्च अभियान चलाया जा रहा है। युवक खुद नहर में उतरा था, बहाव में डूबने से हादसा हुआ है।
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परिजनों ने बताया कि संतोष नहर में नहा रहा था और सभी उसे आवाज दे रहे थे लेकिन वह लौटकर नहीं आया। बताया गया कि उनके पैर में पहले से चोट थी शायद इसी वजह से वह थक गए और गहराई में चले गए।
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मोटर बोट खराब, बाइक से की निगरानी

गोताखोर टीम के सदस्य कर्ण ने बताया कि वे रातभर नहर किनारे पेट्रोलिंग कर रहे थे और लोगों से पूछताछ भी कर रहे थे कि किसी को दिक्कत तो नहीं। रात करीब एक बजे टीम घर लौट गई थी, लेकिन सुबह करीब चार बजे वे फिर से पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि टीम की मोटर बोट खराब थी, इसलिए वे बाइकों से ही नहर की निगरानी कर रहे थे।




एक माह पहले पत्र लिखा, फिर भी इंतजाम अधूरे

वार्ड-20 के निगम पार्षद सुधीर यादव का कहना है कि छठ पर्व की एक माह पहले ही जिला प्रशासन से परमिशन ले ली थी। प्रशासन से सुरक्षा इंतजाम को लेकर भी पत्र लिखा गया गया था। इनका फर्ज भी बनता था कि गोताखोर और नाव यहां तैनात करें। इस बार नाव नहीं दी गई थी। सरकारी गोताखोर के सहारे सुरक्षा व्यवस्था थी। यहां निजी गोताखोर भी लगाए जाने चाहिए थे। मंगलवार को सुबह ही जलस्तर बढ़ा तो हादसा हुआ है। जबकि सोमवार की शाम को नहर में महज डेढ़ फुट ही पानी था।
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