फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   चार बहनें लावारिस शवों की कर रहीं अंत्येष्टि

चार बहनें लावारिस शवों की कर रहीं अंत्येष्टि

Fri, 08 Mar 2013 05:32 AM IST
Karnal
Karnal Updated Fri, 08 Mar 2013 05:32 AM IST
विज्ञापन
करनाल। हिंदू धर्म में मान्यता है कि मृत्यु के बाद यदि मनुष्य की अस्थियों को गंगा मां की पावन गोद मिल जाए, तो वह मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। भिन्न-भिन्न हादसों में लावारिस के तौर पर मरने वालों को यह मोक्ष मार्ग कैसे नसीब हो। ये बीड़ा उठाया है शहर की चार बेटियों ने।
विज्ञापन

जो अपने पिता और चाचा के साथ इस तरह के लावारिस शवों की ना केवल अस्थियां चुनती हैं, बल्कि उनका तर्पण भी हरिद्वार जाकर कराती हैं। इस पुण्य के मार्ग पर चलकर ये बेटियां कितने ही लावारिस लोगों का विधिवत संस्कार का पुण्य अर्जित कर चुकी हैं। इनके जोश और जज्बे को सलाम किए बिना इस महिला दिवस के क्या मायने हो सकते हैं। अपने आप में महिला दिवस पर ये लीक से हटकर कुछ नया करने की चाह ही है।
विज्ञापन


दो सगे भाइयों की बेटी हैं चारों बहनें
शहर के चार चमन और मीरा घाटी क्षेत्र में एक ही परिवार के दो भाइयों के परिवार ने समाज में बड़ा बदलाव करने का काम किया है। इस परिवार की लड़कियां लावारिस लोगों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित कर जहां पुण्य कमा रहे हैं, वहीं सामाजिक परिवर्तन लाने में बड़ा योगदान करने की जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। प्राचीन संस्कृति के अनुसार किसी की शवयात्रा में महिलाएं शामिल नहीं होती थी और न ही शिवपुरी तक जाती थी। अंतिम संस्कार के समय मुखाग्नि भी पुरुष द्वारा ही देने की प्रथा रही है, लेकिन कई साल पहले हरियाणा में वर्तमान में भिवानी की सांसद श्रुति चौधरी ने अपने पिता सुरेंद्र सिंह को मुखाग्नि देकर इस प्रथा को तोड़ा था। अब करनाल शहर में ही दो परिवार ऐसा पुण्य का काम कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


छठी कक्षा भी छात्रा भी इस कार्य में
चार चमन निवासी एवं कृषि विभाग में कार्यरत राजकुमार और उनकी पत्नी सुमन के साथ उनकी पुत्री बीएससी की छात्रा नेहा और कक्षा छठी की छात्रा जिया, चचेरे भाई मीराघाटी निवासी प्रॉपर्टी डीलर चरणजीत और उनकी पत्नी सुनीता, बेटी बीकॉम की छात्रा डॉली और कक्षा 12वीं की छात्रा मीनल के परिवार के छह लोग इस पुण्य के काम में लगे हैं। राजकुमार और चरणजीत के अनुसार वह पिछले करीब बीस साल से इस काम में लगे हैं। बस इस दिशा में काम करने के लिए दिल में ख्याल आया था कि अपने लिए तो सब जीते हैं। दूसरों के लिए कुछ जिया जाए। इसी बात को लेकर बच्चों में भी संस्कार डाले गए। उनकी बेटियां भी बचपन से उनके साथ जाती हैं। जब छह महीने की बेटी होती थी तो वह अपने पूर्वजों की तरह अस्थियों को उनका हाथ लगवा कर ले जाते थे।


गंगा में प्रवाहित करते हैं अस्थियां
वह लोग हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हरिद्वार कनखल में गंगा में अस्थियां प्रवाहित करते हैं। वह मॉडल टाउन के शिवपुरी से अस्थियां ले जाते हैं। उनका दिल है अब पूरा जीवन इस काम को निभाया जाए। इतना ही नहीं उन लोगों को देख कर अब समाज के काफी लोग इस बदलाव की दिशा में कदम आगे बढ़ाने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed