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देशभक्ति गीतों से गूंजी कर्ण नगरी, बैंड बाजों के साथ स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन
Updated Sat, 20 Oct 2018 12:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विजयादशमी के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, करनाल के स्वयंसेवकों द्वारा पूर्ण गणवेश में खालसा सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में शस्त्र-पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया और नगर के प्रमुख मार्गों पर पथ-संचलन किया गया। इस दौरान शस्त्र-पूजन का कार्यक्रम किया गया और नगर के प्रमुख मार्गों पर देशभक्ति गीत गाते हुए संघ के घोष (बैंड) के साथ पथ-संचलन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल मुख्य वक्ता के तौर पर और वरिष्ठ समाजसेवी सरदार जगजीत सिंह ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय भाषण में जगजीत सिंह ने कहा कि आज की युवा शक्ति को एकजुट होकर देश की प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे देशहित में कार्य करने वाले संगठन के साथ जुड़कर काम करना चाहिए। डॉ. सुरेंद्र पाल ने सभी स्वयंसेवकों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सन 1925 में विजयादशमी के दिन ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी और संघ के स्थापना दिवस पर देश भर में शस्त्र-पूजन और संचलन के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि संघ के द्वारा वर्तमान वर्ष को समरसता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और देश भर में कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण समाज को जात-पात, ऊंच-नीच आदि से ऊपर उठकर और एकजुट होकर देशसेवा और प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए, इस निमित्त देश भर में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। अपने उद्बोधन में उन्होंने आग्रह किया कि विजयादशमी के इस पर्व पर हम सभी को प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रभु श्रीराम ने हम सभी के समक्ष अपने जीवन में समय-समय पर एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा होने के उदाहरण प्रस्तुत किये हैं और उनके गुणों को अपने जीवन में भी धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जब संघ की स्थापना की थी, उस समय देश अंग्रेजों का गुलाम था और हम अपने गौरवशाली इतिहास, अपनी सनातन संस्कृति को लगभग भूल चुके थे और उन्होंने लक्ष्य निर्धारित किया कि इस राष्ट्र को पुन: विश्व गुरु के स्थान पर स्थापित करेंगे और भारत माता को पुन: परम वैभव पर लेकर जाएंगे। इस देश की आने वाली पीढ़ी अपने देश के गौरवशाली इतिहास को पढ़कर गर्व का अनुभव करेगी। उन्होंने स्वयंसेवकों से निवेदन किया कि आज देश को हमारी आवश्यकता है और हम सभी को मिलकर अपना अधिक से अधिक समय देश की उन्नति और प्रगति के लिए लगाना चाहिए ताकि हम अपने राष्ट्र को पुन: विश्व के अग्रणी देशों में प्रथम स्थान पर स्थापित कर सकें। इस मौके पर शास्त्री, चरणजीत, कपिल अत्रेजा, नवीन बत्रा, मोनिक गर्ग
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करनाल। विजयादशमी के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, करनाल के स्वयंसेवकों द्वारा पूर्ण गणवेश में खालसा सीनियर सेकेंडरी विद्यालय में शस्त्र-पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया और नगर के प्रमुख मार्गों पर पथ-संचलन किया गया। इस दौरान शस्त्र-पूजन का कार्यक्रम किया गया और नगर के प्रमुख मार्गों पर देशभक्ति गीत गाते हुए संघ के घोष (बैंड) के साथ पथ-संचलन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक डॉ. सुरेंद्र पाल मुख्य वक्ता के तौर पर और वरिष्ठ समाजसेवी सरदार जगजीत सिंह ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय भाषण में जगजीत सिंह ने कहा कि आज की युवा शक्ति को एकजुट होकर देश की प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे देशहित में कार्य करने वाले संगठन के साथ जुड़कर काम करना चाहिए। डॉ. सुरेंद्र पाल ने सभी स्वयंसेवकों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सन 1925 में विजयादशमी के दिन ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई थी और संघ के स्थापना दिवस पर देश भर में शस्त्र-पूजन और संचलन के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि संघ के द्वारा वर्तमान वर्ष को समरसता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और देश भर में कार्यक्रमों के माध्यम से संपूर्ण समाज को जात-पात, ऊंच-नीच आदि से ऊपर उठकर और एकजुट होकर देशसेवा और प्रगति के लिए कार्य करना चाहिए, इस निमित्त देश भर में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। अपने उद्बोधन में उन्होंने आग्रह किया कि विजयादशमी के इस पर्व पर हम सभी को प्रभु श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रभु श्रीराम ने हम सभी के समक्ष अपने जीवन में समय-समय पर एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा होने के उदाहरण प्रस्तुत किये हैं और उनके गुणों को अपने जीवन में भी धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने जब संघ की स्थापना की थी, उस समय देश अंग्रेजों का गुलाम था और हम अपने गौरवशाली इतिहास, अपनी सनातन संस्कृति को लगभग भूल चुके थे और उन्होंने लक्ष्य निर्धारित किया कि इस राष्ट्र को पुन: विश्व गुरु के स्थान पर स्थापित करेंगे और भारत माता को पुन: परम वैभव पर लेकर जाएंगे। इस देश की आने वाली पीढ़ी अपने देश के गौरवशाली इतिहास को पढ़कर गर्व का अनुभव करेगी। उन्होंने स्वयंसेवकों से निवेदन किया कि आज देश को हमारी आवश्यकता है और हम सभी को मिलकर अपना अधिक से अधिक समय देश की उन्नति और प्रगति के लिए लगाना चाहिए ताकि हम अपने राष्ट्र को पुन: विश्व के अग्रणी देशों में प्रथम स्थान पर स्थापित कर सकें। इस मौके पर शास्त्री, चरणजीत, कपिल अत्रेजा, नवीन बत्रा, मोनिक गर्ग