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पार्कों के नाम पर हर माह खर्च किये जा रहे 6.50 लाख, पार्क मेंटेंन नहीं तो फिर किसकी हो रही मेंटीनेंस
Updated Thu, 09 Aug 2018 01:18 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सीएम सिटी के करीब 220 छोटे बड़े पार्कों की देखरेख और मरम्मत को लेकर नगर निगम और हुडा विभाग द्वारा करीब साढ़े छह लाख रुपये प्रति माह खर्च किए जा रहे हैं। नगर निगम के अंतर्गत 191 पार्क आते हैं और इन पर करीब चार लाख रुपये का खर्च मरम्मत पर होता है।
इसी प्रकार, हुडा विभाग के पास करीब 29 पार्क हैं, इन पर हर महीने खर्च 269580 रुपये खर्च दिखाया जाता है, जबकि सच्चाई ये है कि शहर के आधे से ज्यादा पार्क ऐसे हैं, जिनको आज तक निगम और हुडा की ओर देखा तक नहीं है। अमर उजाला द्वारा 17 जुलाई से चलाई कि मेरा पार्क बदहाल क्यों, मुहिम के तहत सच्चाई सामने आई है। उजाला अब तक सेक्टरों, कॉलोनियों समेत शहर के मुख्य पार्कों की खस्ताहाल तस्वीरें जनता के सामने रख चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार जब पार्कों को पूरी तरह से मेंटेन ही नहीं किया गया तो ये पैसा किसकी मरम्मत कर रहा है? पार्कों की देखभाल के मामले में गड़बड़ी की बू आ रही है। शहर के सामाजिक संस्थाओं समेत पार्षदों ने मामले की गंभीरता से जांच की मांग है।
बता दें कि 17 जुलाई से अमर उजाला ने शहर के पार्कों के हालात बताने को लेकर एक मुहिम चलाई। इसके तहत, सेक्टरों समेत अन्य कॉलोनियों के पार्कों के हालात बताए गए। खास बात ये है कि कुल पार्कों में से आधे से ज्यादा पार्क इतने खस्ताहाल हैं कि उनकी मरम्मत केवल कागजों में ही चल रही है। बावजूद इसके हुडा और निगम के अधिकारी दावे करते नहीं थकते। खुद पर बात आती है तो दोनों विभागों के उच्च अधिकारी रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशनों पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या विभाग केवल कागजों में ही पार्कों को सुंदर बना रहे हैं?
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अटल पार्क के मरम्मत पर खर्च होते हैं एक लाख, 82 हजार
अटल पार्क सीएम सिटी का सबसे बड़ा पार्क है, इसकी मरम्मत पर हुडा हर महीने एक लाख, 82 हजार रुपये खर्च करता है, लेकिन इस पार्क की सुंदरता बढ़ाने वाले झरने और झील कई साल से सूखे पड़े हैं, बरसात के दिनों में ही पार्क की झील में पानी आता है। इतना ही नहीं पार्क में शौचालय और पीने के पानी की सुविधा भी नाम मात्र है, क्योंकि यह पार्क करीब 52 एकड़ में बना हुआ है। सैर करने वाले लोगों कहना है कि यदि इस पार्क पर हकीकत में ही इतनी मोटी रकम खर्च की जाए तो यह पार्क पहले से कई गुना सुंदर दिखाई देने लगेगा, लेकिन ऐसा होता ही नहीं। इसकी भी विभाग को जांच करानी चाहिए।
जानिए किसी पार्क पर कितने रुपये होते हैं खर्च
पार्क : प्रति माह खर्च
सेक्टर-8 अटल पार्क : 1.82 लाख, हुडा विभाग
सेक्टर-12 फव्वारा पार्क : 36 हजार, हुडा विभाग
सेक्टर-12 रोज गार्डन : 24 हजार हुडा विभाग
सेक्टर-4 के पांच पार्क : 12600, आरडब्ल्यूए, विभाग हुडा
सेक्टर-5 के पांच पार्क : 14980, आरडब्ल्यूए, विभाग हुडा
जानिए कहां पर कितने हैं पार्क
नगर निगम के पास शहर में छोटे और बड़े करीब 191 पार्क हैं, जिसमें सेक्टर-13 में 15 पार्क, सेक्टर-7 में 24 पार्क, सेक्टर-6 में 23 पार्क, सेक्टर-9 में 12 पार्क, सेक्टर-12 पार्ट टू 4 पार्क, सेक्टर-8 में 10 पार्क, सेक्टर-8 पार्ट टू में 11 पार्क, सेक्टर-14 में चार पार्क, सेक्टर-13 एक्सटेंशन में 10, ओल्ड में 13 और हाउसिंग बोर्ड में 7 पार्क हैं। इससे अलग कर्ण पार्क, मुगल कैनाल में 26 पार्क, कर्ण ताल, स्वर्ण जयंती पार्क, स्वामी विवेकानंद पार्क सहित कॉलोनियों के छोटे व बड़े पार्क हैं।
आरडब्ल्यूए को दिए जाते हैं 1.35 रुपये स्क्वायर मीटर के हिसाब से पैसे
नगर निगम ने अधिकतर पार्क आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) को तीन रुपये पर स्क्वायर मीटर दिया हुआ है। जो पार्कों की मरम्मत करते हैं, इसी प्रकार, हुडा विभाग ने 1.35 रुपये पर स्क्वायर मीटर के हिसाब से आरडब्ल्यूए को पार्क की मरम्मत के लिए दिए हुए हैं। हर महीने इस रेट के मुताबिक आरडब्ल्यूए मरम्मत खर्च का बिल बनाकर हर महीने निगम और हुडा को देते हैं और फिर दोनों विभाग उन बिलों को पास पेमेंट आरडब्ल्यूए को देती है।
तीन माह से नहीं मिली पेमेंट : प्रधान
नगर निगम केवल दावे करती है, हकीकत ये है कि पिछले तीन माह से पार्कों की मरम्मत को लेकर भेजे गए बिल निगम द्वारा पास नहीं किए गए हैं। ऐसे में आरडब्ल्यूए किस प्रकार से पार्कों की देखरेख कर सकती है। पार्क सही तभी रह सकते हैं कि जब प्रॉपर कर्मचारियों को वेतन समय पर दिया जाए। बिल को लेकर निगम के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन उन पर कोई असर नहीं है। -अशोक ढिंगरा, प्रधान, आरडब्ल्यूए, सेक्टर-13।
बारिश के कारण पार्कों में घास की कटाई का कार्य नहीं हो पाया था, इस लिए अब घास की कटाई कराई जा रही है। कुछ पार्क आरडब्ल्यूए को दिए हुए हैं। यदि उन्होंने पार्क की मेंटेनेंस नहीं कराई तो नोटिस देकर बिल रोक सकते हैं और पार्क में जाकर उनके हालत भी देखे जाएंगे। हर पार्क को दुरुस्त किया जाएगा। खर्च में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। -कुलदीप, एसडीओ, हुडा विभाग करनाल।
निगम द्वारा अधिकतम पार्क आरडब्ल्यूए को दिए हुए हैं। यदि पार्क में कोई समस्या है तो वे इस बारे में सभी आरडब्ल्यूए से मीटिंग करेंगे। इससे अलग एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ है। जिस पर लोग अपने पार्क की बदहाली की फोटो खींचकर भेज सकते हैं। इसके तुरंत बाद पार्कों को साफ सुधरा किया जाएगा। पार्कों को लेकर निगम गंभीर है, क्योंकि यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। -राजीव मेहता, नगर निगम आयुक्त करनाल।
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करनाल। सीएम सिटी के करीब 220 छोटे बड़े पार्कों की देखरेख और मरम्मत को लेकर नगर निगम और हुडा विभाग द्वारा करीब साढ़े छह लाख रुपये प्रति माह खर्च किए जा रहे हैं। नगर निगम के अंतर्गत 191 पार्क आते हैं और इन पर करीब चार लाख रुपये का खर्च मरम्मत पर होता है।
इसी प्रकार, हुडा विभाग के पास करीब 29 पार्क हैं, इन पर हर महीने खर्च 269580 रुपये खर्च दिखाया जाता है, जबकि सच्चाई ये है कि शहर के आधे से ज्यादा पार्क ऐसे हैं, जिनको आज तक निगम और हुडा की ओर देखा तक नहीं है। अमर उजाला द्वारा 17 जुलाई से चलाई कि मेरा पार्क बदहाल क्यों, मुहिम के तहत सच्चाई सामने आई है। उजाला अब तक सेक्टरों, कॉलोनियों समेत शहर के मुख्य पार्कों की खस्ताहाल तस्वीरें जनता के सामने रख चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिरकार जब पार्कों को पूरी तरह से मेंटेन ही नहीं किया गया तो ये पैसा किसकी मरम्मत कर रहा है? पार्कों की देखभाल के मामले में गड़बड़ी की बू आ रही है। शहर के सामाजिक संस्थाओं समेत पार्षदों ने मामले की गंभीरता से जांच की मांग है।
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बता दें कि 17 जुलाई से अमर उजाला ने शहर के पार्कों के हालात बताने को लेकर एक मुहिम चलाई। इसके तहत, सेक्टरों समेत अन्य कॉलोनियों के पार्कों के हालात बताए गए। खास बात ये है कि कुल पार्कों में से आधे से ज्यादा पार्क इतने खस्ताहाल हैं कि उनकी मरम्मत केवल कागजों में ही चल रही है। बावजूद इसके हुडा और निगम के अधिकारी दावे करते नहीं थकते। खुद पर बात आती है तो दोनों विभागों के उच्च अधिकारी रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशनों पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या विभाग केवल कागजों में ही पार्कों को सुंदर बना रहे हैं?
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अटल पार्क के मरम्मत पर खर्च होते हैं एक लाख, 82 हजार
अटल पार्क सीएम सिटी का सबसे बड़ा पार्क है, इसकी मरम्मत पर हुडा हर महीने एक लाख, 82 हजार रुपये खर्च करता है, लेकिन इस पार्क की सुंदरता बढ़ाने वाले झरने और झील कई साल से सूखे पड़े हैं, बरसात के दिनों में ही पार्क की झील में पानी आता है। इतना ही नहीं पार्क में शौचालय और पीने के पानी की सुविधा भी नाम मात्र है, क्योंकि यह पार्क करीब 52 एकड़ में बना हुआ है। सैर करने वाले लोगों कहना है कि यदि इस पार्क पर हकीकत में ही इतनी मोटी रकम खर्च की जाए तो यह पार्क पहले से कई गुना सुंदर दिखाई देने लगेगा, लेकिन ऐसा होता ही नहीं। इसकी भी विभाग को जांच करानी चाहिए।
जानिए किसी पार्क पर कितने रुपये होते हैं खर्च
पार्क : प्रति माह खर्च
सेक्टर-8 अटल पार्क : 1.82 लाख, हुडा विभाग
सेक्टर-12 फव्वारा पार्क : 36 हजार, हुडा विभाग
सेक्टर-12 रोज गार्डन : 24 हजार हुडा विभाग
सेक्टर-4 के पांच पार्क : 12600, आरडब्ल्यूए, विभाग हुडा
सेक्टर-5 के पांच पार्क : 14980, आरडब्ल्यूए, विभाग हुडा
जानिए कहां पर कितने हैं पार्क
नगर निगम के पास शहर में छोटे और बड़े करीब 191 पार्क हैं, जिसमें सेक्टर-13 में 15 पार्क, सेक्टर-7 में 24 पार्क, सेक्टर-6 में 23 पार्क, सेक्टर-9 में 12 पार्क, सेक्टर-12 पार्ट टू 4 पार्क, सेक्टर-8 में 10 पार्क, सेक्टर-8 पार्ट टू में 11 पार्क, सेक्टर-14 में चार पार्क, सेक्टर-13 एक्सटेंशन में 10, ओल्ड में 13 और हाउसिंग बोर्ड में 7 पार्क हैं। इससे अलग कर्ण पार्क, मुगल कैनाल में 26 पार्क, कर्ण ताल, स्वर्ण जयंती पार्क, स्वामी विवेकानंद पार्क सहित कॉलोनियों के छोटे व बड़े पार्क हैं।
आरडब्ल्यूए को दिए जाते हैं 1.35 रुपये स्क्वायर मीटर के हिसाब से पैसे
नगर निगम ने अधिकतर पार्क आरडब्ल्यूए (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) को तीन रुपये पर स्क्वायर मीटर दिया हुआ है। जो पार्कों की मरम्मत करते हैं, इसी प्रकार, हुडा विभाग ने 1.35 रुपये पर स्क्वायर मीटर के हिसाब से आरडब्ल्यूए को पार्क की मरम्मत के लिए दिए हुए हैं। हर महीने इस रेट के मुताबिक आरडब्ल्यूए मरम्मत खर्च का बिल बनाकर हर महीने निगम और हुडा को देते हैं और फिर दोनों विभाग उन बिलों को पास पेमेंट आरडब्ल्यूए को देती है।
तीन माह से नहीं मिली पेमेंट : प्रधान
नगर निगम केवल दावे करती है, हकीकत ये है कि पिछले तीन माह से पार्कों की मरम्मत को लेकर भेजे गए बिल निगम द्वारा पास नहीं किए गए हैं। ऐसे में आरडब्ल्यूए किस प्रकार से पार्कों की देखरेख कर सकती है। पार्क सही तभी रह सकते हैं कि जब प्रॉपर कर्मचारियों को वेतन समय पर दिया जाए। बिल को लेकर निगम के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन उन पर कोई असर नहीं है। -अशोक ढिंगरा, प्रधान, आरडब्ल्यूए, सेक्टर-13।
बारिश के कारण पार्कों में घास की कटाई का कार्य नहीं हो पाया था, इस लिए अब घास की कटाई कराई जा रही है। कुछ पार्क आरडब्ल्यूए को दिए हुए हैं। यदि उन्होंने पार्क की मेंटेनेंस नहीं कराई तो नोटिस देकर बिल रोक सकते हैं और पार्क में जाकर उनके हालत भी देखे जाएंगे। हर पार्क को दुरुस्त किया जाएगा। खर्च में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। -कुलदीप, एसडीओ, हुडा विभाग करनाल।
निगम द्वारा अधिकतम पार्क आरडब्ल्यूए को दिए हुए हैं। यदि पार्क में कोई समस्या है तो वे इस बारे में सभी आरडब्ल्यूए से मीटिंग करेंगे। इससे अलग एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया हुआ है। जिस पर लोग अपने पार्क की बदहाली की फोटो खींचकर भेज सकते हैं। इसके तुरंत बाद पार्कों को साफ सुधरा किया जाएगा। पार्कों को लेकर निगम गंभीर है, क्योंकि यह लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है। -राजीव मेहता, नगर निगम आयुक्त करनाल।