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मत्स्य पालन करने वालों को अधिकतम दो लाख रुपये का अनुदान : आत्मा राम
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:40 AM IST
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मत्स्य पालन करने वालों को अधिकतम दो लाख रुपये का अनुदान : आत्मा राम
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मछली पालन व्यवसाय से बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध होते है। साथ ही गांव के तालाब और बंजर पड़ी पंचायती जमीन पर बने तालाबों से ग्राम पंचायत की आय भी बढ़ रही है। जिला मत्स्य अधिकारी एवं करनाल मत्स्य किसान विकास एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आत्मा राम के अनुसार प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए अनुदान योजना स्वीकृत की है। यह स्कीम मछली पालन का व्यवसाय कर रहे या करने की चाहत रखने वालों, दोनों के लिए है। कहा कि मत्स्य पालन के लिए जिन किसानों ने अपनी निजी जमीन और गांव के पंचायती तालाब पट्टे पर लिए हैं। उन किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।
उन्होंने मीडिया को बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत मत्स्य पालन के लिए दस दिन के प्रशिक्षण के साथ 1100 रुपये भत्ता भी दिया जाएगा। जाल की खरीद करने पर भी नौ हजार रुपये का अनुदान देने का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि मछली पकड़ने का ठेका लेने पर ठेका राशि का 25 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशि दो लाख रुपये तक अनुदान दिया जाता है। मछली की थोक बिक्री के लिए दुकान के किराए पर अधिकतम पांच हजार रुपये प्रतिमाह और परचून बिक्री की दुकान के लिए अधिकतम तीन हजार रुपये प्रति माह की दर से अनुदान दिया जाता है। खुराक पर भी अनुदान 60 प्रतिशत की दर से 90 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए दिया जाता है।
एक साल में कमा रहा है पांच लाख रुपये
इंद्री क्षेत्र के गांव श्रवण माजरा निवासी किसान सुरजीत मछली पालन को अपनाकर एक साल में खर्चा निकालकर करीब पांच लाख रुपये वार्षिक तक कमा रहा है। वह इस व्यवसाय से पिछले 5-6 सालों से जुड़ा हुआ है। सुरजीत ने चार एकड़ भूमि पर मछली तालाब विकसित किया हुआ है। उसमें 40 हजार मछली के बच्चे छोडे़ थे। इससे उसने करीब 80 क्विंटल मछली का उत्पादन किया। करीब आठ लाख रुपये की मछली बेची। वह गांव के पंचायती जमीन पर बने तालाब को ठेके पर लेता है, इससे पंचायत की आमदनी में भी वृद्धि हो रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। मछली पालन व्यवसाय से बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध होते है। साथ ही गांव के तालाब और बंजर पड़ी पंचायती जमीन पर बने तालाबों से ग्राम पंचायत की आय भी बढ़ रही है। जिला मत्स्य अधिकारी एवं करनाल मत्स्य किसान विकास एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आत्मा राम के अनुसार प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए अनुदान योजना स्वीकृत की है। यह स्कीम मछली पालन का व्यवसाय कर रहे या करने की चाहत रखने वालों, दोनों के लिए है। कहा कि मत्स्य पालन के लिए जिन किसानों ने अपनी निजी जमीन और गांव के पंचायती तालाब पट्टे पर लिए हैं। उन किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा।
उन्होंने मीडिया को बताया कि इस स्कीम के अंतर्गत मत्स्य पालन के लिए दस दिन के प्रशिक्षण के साथ 1100 रुपये भत्ता भी दिया जाएगा। जाल की खरीद करने पर भी नौ हजार रुपये का अनुदान देने का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि मछली पकड़ने का ठेका लेने पर ठेका राशि का 25 प्रतिशत की दर से अधिकतम राशि दो लाख रुपये तक अनुदान दिया जाता है। मछली की थोक बिक्री के लिए दुकान के किराए पर अधिकतम पांच हजार रुपये प्रतिमाह और परचून बिक्री की दुकान के लिए अधिकतम तीन हजार रुपये प्रति माह की दर से अनुदान दिया जाता है। खुराक पर भी अनुदान 60 प्रतिशत की दर से 90 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए दिया जाता है।
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एक साल में कमा रहा है पांच लाख रुपये
इंद्री क्षेत्र के गांव श्रवण माजरा निवासी किसान सुरजीत मछली पालन को अपनाकर एक साल में खर्चा निकालकर करीब पांच लाख रुपये वार्षिक तक कमा रहा है। वह इस व्यवसाय से पिछले 5-6 सालों से जुड़ा हुआ है। सुरजीत ने चार एकड़ भूमि पर मछली तालाब विकसित किया हुआ है। उसमें 40 हजार मछली के बच्चे छोडे़ थे। इससे उसने करीब 80 क्विंटल मछली का उत्पादन किया। करीब आठ लाख रुपये की मछली बेची। वह गांव के पंचायती जमीन पर बने तालाब को ठेके पर लेता है, इससे पंचायत की आमदनी में भी वृद्धि हो रही है।
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