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डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन में भ्रष्टाचार का कनेक्शन
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। प्रति साल 27 करोड़ रुपये शहर में सफाई और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं। स्वच्छता के दावे भी इसी खर्च के मुताबिक बड़े किए जा रहे हैं। हकीकत इसके परे है। घरों से कचरा तो उठाया जा रहा है, लेकिन नगर निगम के कर्मचारी नहीं बल्कि शहरवासियों द्वारा निजी तौर पर लगाए गए कर्मियों द्वारा।
इतना ही नहीं शहरवासी इसके बदले कर्मचारी को प्रति घर 50 से 70 रुपये तक दे रहे हैं। कागजों में पूरे शहर में ये कार्य ठेकेदारों के सफाई कर्मचारियों द्वारा दिखाया जा रहा है, लेकिन ये कार्य दूसरे लोग कर रहे हैं और बाकायदा लोग इसके लिए पेमेंट भी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि आखिरकार फिर से ये 27 करोड़ रुपये कहां पर खर्च दिखाए जा रहे हैं? खुद शहरवासी इस कचरा कलेक्शन योजना में जुटे कर्मचारी ही भ्रष्टाचार का कनेक्शन होने के आरोप लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले साल सफाई का ठेका 22.50 करोड़ में था। इस बार का ठेका पांच करोड़, प्रति साल अधिक 27 करोड़ रुपये में दिया गया है। इस पैसे में शहर के सभी 20 वार्डों में सफाई होगी। साथ ही बाजारों समेत कामर्शियल इलाकों में नाइट स्वीपिंग भी शामिल हैं। इतनी मोटी रकम सफाई पर खर्च किए जाने के बावजूद शहरवासियों को इसका लाभ कम मिल रहा है, जहां पर मिल रहा है, वहां लोगों को प्रति माह पैसे देने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं इस पैसे में से भी ठेकेदार पैसे वसूल रहा है।
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पिछले साल भी यह मामला निगम अधिकारियों के सामने आया था, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं किया गया। अनुमान है कि पूरे शहर में ऐसे 250 से ज्यादा लोग घरों से कूड़ा उठा रहे हैं, जो निगम ठेकेदारों के कर्मचारी नहीं हैं और पिछले कई साल से वे इस कार्य को कर रहे हैं। अब नए ठेके बाद ठेकेदारों ने इन्हीं लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। पहला तो उनसे एरिया छुड़वाने की धमकी, दूसरा काम करना है तो ठेकेदारों को भी पैसे में हिस्सेदारी चाहिए। ये काम शुरू भी हो गया है, लेकिन निगम अधिकारियों का दावा है कि इस तरह के किसी भी गलत कार्य की उनको भनक नहीं है।
लोग बोले, हम कई साल से दे रहे कचरे के पैसे
सेक्टर-9 निवासी ऋतु देवी, राजबीर सिंह ने बताया कि वे पिछले चार साल से घर से कूड़ा उठाने के लिए पैसे दे रहे हैं। इतना नहीं हमारी गली में निगम की ट्राली नहीं आई। घरों से कचरा उठान वे खुद पैसे देकर निजी तौर पर करा रहे हैं, न कि नगर निगम की ओर से। ऋतु देवी बताती हैं कि पिछले साल तो बाकायदा पैसों की रसीदें तक दी जाती थीं। कुछ इसी प्रकार के हालात, सेक्टर-6,7,8 व 9 समेत अन्य सेक्टरों के हैैं। सेक्टर-4 के हरीश कुमार व रोहताश सिंह ने बताया कि वे कर्मचारी को प्रति माह पैसे देते हैं।
कूड़ा उठाने वालों से भी वसूले जा रहे 30 रुपये
शहर में नगर निगम द्वारा सफाई का ठेका छोड़ा हुआ है। इसके तहत पूरा शहर और निगम के अंतर्गत एरिया को कवर किया जाता है। ऐसे में जो लोग पहले से ही शहरवासियों के घरों से कूड़ा उठा रहे हैं, निगम के ठेकेदार उनको या तो घरों से कूड़ा उठाने के लिए मना करते हैं या फिर लोगों से वसूले से जा रहे प्रति घर से 50 रुपये में से 30 रुपये तक मांगते हैं। नाम न छापने पर एक सफाई कर्मी ने बताया कि, मजबूरी में हमें इस बार रेट बढ़ाना पड़ा है, क्योंकि ठेकेदार के बंदे या घर छोड़ने के लिए कहते हैं या फिर पैसे मांगते हैं। ऐसे में हमने अब प्रति घर के लिए 70 रुपये रेट करने पड़े।
वार्ड नंबर-1 के पार्षद ने की शिकायत
पद की शपथ लेते ही पार्षद भी एक्टिव हो गए हैं और सफाई को लेकर ठेकेदारों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। वार्ड नंबर एक के पार्षद एडवोकेट नवीन का कहना है कि जैसे ही उन्होंने कार्य संभाला तो सफाई को लेकर कर्मचारियों से बात की। चेकिंग के दौरान सफाई कर्मचारी कम मिले, जबकि ठेकेदार द्वारा कागजों में ज्यादा दिखाए जा रहे हैं। मैंने इस मामले की शिकायत निगम आयुक्त और मेयर को की है। एडवोकेट नवीन का कहना है कि, वे सफाई के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे, हर हाल में स्वच्छता चाहिए। इस मामले को लेकर वे आगामी सदन की बैठक में जरूर उठाएंगे। उधर, संबंधित जोन के ठेकेदार कुनाल मदान का कहना है कि कर्मचारी पूरे है और सफाई सही की जा रही है।
सफाई में लापरवाही बर्दास्त नहीं : मेयर
इस बारे में दोबारा से मेयर चुनी गईं रेणु बाला गुप्ता का कहना है कि स्वच्छता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल की पहली प्राथमिकताओं से एक है। इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही और गड़बड़ी बर्दास्त नहीं की जाएगी। स्वच्छता को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों से जवाब तलब किया जाएगा। अगर इस मामले में किसी अधिकारी या फिर ठेकेदार की कमी है तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। जहां तक डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की बात है, इसकी समीक्षा की जाएगी। साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, ताकि शहर के लोगों को दिक्कत न हो।
कैसे मिलेगी स्वच्छता में टॉप रैंकिंग
करनाल। स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 को लेकर नगर निगम के अधिकारी दावे करते नहीं थकते, लेकिन हकीकत शहरवासी बताते हैं। पुराने शहर से लेकर निगम के आउटर एरिया में सफाई को लेकर संतोषजनक कार्य नहीं हो रहा है। बता दें कि करीब साढ़े चार लाख की आबादी वाले शहर करनाल से रोजाना 140 से 150 टन कचरा निकलता है। पिछले साल करनाल स्वच्छता में हरियाणा में प्रथम स्थान पर रहा था, इसके अलावा देश में 65वां स्थान प्राप्त किया था। निगम के अधिकारी इस बार टॉप टेन में शामिल होने के दावे करते हैं, लेकिन इन हालात में अच्छी रैंकिंग कैसे मिलेगी, इसको लेकर किसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
सफाई को लेकर आज से नहीं शुरू से ही नगर निगम के अधिकारी गंभीर हैं। इसमें अधिकारियों से लेकर ठेकेदारों तक की जिम्मेदारी तय की गई है। जहां तक डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की बात है, इसकी लगातार समीक्षा की जाती है। जहां से भी शिकायत आती है, वहां पर समाधान किया जाता है। शहरवासियों द्वारा घरों में निजी कर्मचारी को पैसे देने और ठेकेदारों द्वारा वसूलने की जानकारी नहीं है। हम इस मामले की जांच कराएंगे और अगर कोई गलत कार्य करता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। - धीरज कुमार, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर।
करनाल। प्रति साल 27 करोड़ रुपये शहर में सफाई और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं। स्वच्छता के दावे भी इसी खर्च के मुताबिक बड़े किए जा रहे हैं। हकीकत इसके परे है। घरों से कचरा तो उठाया जा रहा है, लेकिन नगर निगम के कर्मचारी नहीं बल्कि शहरवासियों द्वारा निजी तौर पर लगाए गए कर्मियों द्वारा।
इतना ही नहीं शहरवासी इसके बदले कर्मचारी को प्रति घर 50 से 70 रुपये तक दे रहे हैं। कागजों में पूरे शहर में ये कार्य ठेकेदारों के सफाई कर्मचारियों द्वारा दिखाया जा रहा है, लेकिन ये कार्य दूसरे लोग कर रहे हैं और बाकायदा लोग इसके लिए पेमेंट भी कर रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि आखिरकार फिर से ये 27 करोड़ रुपये कहां पर खर्च दिखाए जा रहे हैं? खुद शहरवासी इस कचरा कलेक्शन योजना में जुटे कर्मचारी ही भ्रष्टाचार का कनेक्शन होने के आरोप लगा रहे हैं।
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गौरतलब है कि पिछले साल सफाई का ठेका 22.50 करोड़ में था। इस बार का ठेका पांच करोड़, प्रति साल अधिक 27 करोड़ रुपये में दिया गया है। इस पैसे में शहर के सभी 20 वार्डों में सफाई होगी। साथ ही बाजारों समेत कामर्शियल इलाकों में नाइट स्वीपिंग भी शामिल हैं। इतनी मोटी रकम सफाई पर खर्च किए जाने के बावजूद शहरवासियों को इसका लाभ कम मिल रहा है, जहां पर मिल रहा है, वहां लोगों को प्रति माह पैसे देने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं इस पैसे में से भी ठेकेदार पैसे वसूल रहा है।
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पिछले साल भी यह मामला निगम अधिकारियों के सामने आया था, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं किया गया। अनुमान है कि पूरे शहर में ऐसे 250 से ज्यादा लोग घरों से कूड़ा उठा रहे हैं, जो निगम ठेकेदारों के कर्मचारी नहीं हैं और पिछले कई साल से वे इस कार्य को कर रहे हैं। अब नए ठेके बाद ठेकेदारों ने इन्हीं लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। पहला तो उनसे एरिया छुड़वाने की धमकी, दूसरा काम करना है तो ठेकेदारों को भी पैसे में हिस्सेदारी चाहिए। ये काम शुरू भी हो गया है, लेकिन निगम अधिकारियों का दावा है कि इस तरह के किसी भी गलत कार्य की उनको भनक नहीं है।
लोग बोले, हम कई साल से दे रहे कचरे के पैसे
सेक्टर-9 निवासी ऋतु देवी, राजबीर सिंह ने बताया कि वे पिछले चार साल से घर से कूड़ा उठाने के लिए पैसे दे रहे हैं। इतना नहीं हमारी गली में निगम की ट्राली नहीं आई। घरों से कचरा उठान वे खुद पैसे देकर निजी तौर पर करा रहे हैं, न कि नगर निगम की ओर से। ऋतु देवी बताती हैं कि पिछले साल तो बाकायदा पैसों की रसीदें तक दी जाती थीं। कुछ इसी प्रकार के हालात, सेक्टर-6,7,8 व 9 समेत अन्य सेक्टरों के हैैं। सेक्टर-4 के हरीश कुमार व रोहताश सिंह ने बताया कि वे कर्मचारी को प्रति माह पैसे देते हैं।
कूड़ा उठाने वालों से भी वसूले जा रहे 30 रुपये
शहर में नगर निगम द्वारा सफाई का ठेका छोड़ा हुआ है। इसके तहत पूरा शहर और निगम के अंतर्गत एरिया को कवर किया जाता है। ऐसे में जो लोग पहले से ही शहरवासियों के घरों से कूड़ा उठा रहे हैं, निगम के ठेकेदार उनको या तो घरों से कूड़ा उठाने के लिए मना करते हैं या फिर लोगों से वसूले से जा रहे प्रति घर से 50 रुपये में से 30 रुपये तक मांगते हैं। नाम न छापने पर एक सफाई कर्मी ने बताया कि, मजबूरी में हमें इस बार रेट बढ़ाना पड़ा है, क्योंकि ठेकेदार के बंदे या घर छोड़ने के लिए कहते हैं या फिर पैसे मांगते हैं। ऐसे में हमने अब प्रति घर के लिए 70 रुपये रेट करने पड़े।
वार्ड नंबर-1 के पार्षद ने की शिकायत
पद की शपथ लेते ही पार्षद भी एक्टिव हो गए हैं और सफाई को लेकर ठेकेदारों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। वार्ड नंबर एक के पार्षद एडवोकेट नवीन का कहना है कि जैसे ही उन्होंने कार्य संभाला तो सफाई को लेकर कर्मचारियों से बात की। चेकिंग के दौरान सफाई कर्मचारी कम मिले, जबकि ठेकेदार द्वारा कागजों में ज्यादा दिखाए जा रहे हैं। मैंने इस मामले की शिकायत निगम आयुक्त और मेयर को की है। एडवोकेट नवीन का कहना है कि, वे सफाई के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे, हर हाल में स्वच्छता चाहिए। इस मामले को लेकर वे आगामी सदन की बैठक में जरूर उठाएंगे। उधर, संबंधित जोन के ठेकेदार कुनाल मदान का कहना है कि कर्मचारी पूरे है और सफाई सही की जा रही है।
सफाई में लापरवाही बर्दास्त नहीं : मेयर
इस बारे में दोबारा से मेयर चुनी गईं रेणु बाला गुप्ता का कहना है कि स्वच्छता देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम मनोहर लाल की पहली प्राथमिकताओं से एक है। इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही और गड़बड़ी बर्दास्त नहीं की जाएगी। स्वच्छता को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों से जवाब तलब किया जाएगा। अगर इस मामले में किसी अधिकारी या फिर ठेकेदार की कमी है तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। जहां तक डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन की बात है, इसकी समीक्षा की जाएगी। साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, ताकि शहर के लोगों को दिक्कत न हो।
कैसे मिलेगी स्वच्छता में टॉप रैंकिंग
करनाल। स्वच्छ सर्वेक्षण-2019 को लेकर नगर निगम के अधिकारी दावे करते नहीं थकते, लेकिन हकीकत शहरवासी बताते हैं। पुराने शहर से लेकर निगम के आउटर एरिया में सफाई को लेकर संतोषजनक कार्य नहीं हो रहा है। बता दें कि करीब साढ़े चार लाख की आबादी वाले शहर करनाल से रोजाना 140 से 150 टन कचरा निकलता है। पिछले साल करनाल स्वच्छता में हरियाणा में प्रथम स्थान पर रहा था, इसके अलावा देश में 65वां स्थान प्राप्त किया था। निगम के अधिकारी इस बार टॉप टेन में शामिल होने के दावे करते हैं, लेकिन इन हालात में अच्छी रैंकिंग कैसे मिलेगी, इसको लेकर किसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।
सफाई को लेकर आज से नहीं शुरू से ही नगर निगम के अधिकारी गंभीर हैं। इसमें अधिकारियों से लेकर ठेकेदारों तक की जिम्मेदारी तय की गई है। जहां तक डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की बात है, इसकी लगातार समीक्षा की जाती है। जहां से भी शिकायत आती है, वहां पर समाधान किया जाता है। शहरवासियों द्वारा घरों में निजी कर्मचारी को पैसे देने और ठेकेदारों द्वारा वसूलने की जानकारी नहीं है। हम इस मामले की जांच कराएंगे और अगर कोई गलत कार्य करता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। - धीरज कुमार, डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर।