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बेरिकेड्स तोड़कर सीएम कैंप आफिस का घेराव करने पहुंचे दिव्यांग, पुसिस के छुड़वाए पसीने
Updated Fri, 26 Oct 2018 12:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विकलांग अधिकार मंच हरियाणा के बैनर तले गुरुवार को दिव्यांगों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सीएम कैंप ऑफिस का घेराव करने जाते सय पुलिस ने बैरिकेड्स लगातार उनको रोकने की कोशिश की। करीब एक घंटे तक यहां पर धक्का-मुक्की और जोर आजमाइश होती रही, लेकिन दिव्यांगों के आगे पुलिस कर्मचारी टिक नहीं पाई। आखिरकार बैरिकेड्स को तोड़ते हुए दिव्यांग सीएम कैंप ऑफिस के बाहर पहुंच गए और कैंप का घेराव कर जमकर बवाल काटा यहां पर मंच की ओर से जिला समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ऐसे में सरकार की तरफ से 27 अक्तूबर को उनके प्रतिनिधिमंडल को शाहबाद में वार्ता के लिए बुलाया। इसके बाद ही दिव्यांग शांत हुए।
प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन की अध्यक्षता राज्य प्रधान ऋषिकेश राजली ने की व संचालन राज्य महासचिव योगेश शांडिल्य ने किया। राष्ट्रीय विकलांग अधिकार मंच के महासचिव मुरलीधरन नेहा कि दिव्यांगों को जहां से सुविधाएं शुरू होती हैं यानि मेडिकल प्रमाण पत्र जो की पहली प्राथमिकता का काम है के लिए ही संघर्ष करना पड़ता है। कई जगहों पर डाक्टरों द्वारा स्थायी विकलांगता होते हुए भी मेडिकल का नवीनीकरण करते समय विकलांगता प्रतिशत घटाया जाता है।
अभी तक पूरे देश में 60 प्रतिशत दिव्यांगों का ही प्रमाण पत्र बन पाया है। एनपीआरडी की मांग पर देश में दिव्यांगों के लिए सार्वभौमिक पहचान पत्र तो बनने लग गए, जिसकी गति अभी बहुत धीमी है। 2.5 करोड़ विकलांगों में से केवल 10 लाख विकलांगों को ही सार्वभौमिक पहचान पत्र मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों को गरीब मानते हुए बीपीएसल राशन कार्ड बनाने के आदेश जारी किए हैं मगर हरियाणा में दिव्यांगों के राशन कार्ड ही काटे जा रहे हैं। मंच के राज्य सलाहकार नरेश ने कहा कि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को पहले भी अवगत करवाया जा चुका है मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। दिव्यांगों में रोष बढ़ता जा रहा है। इस अवसर पर सीटू के राज्य अध्यक्ष सतबीर सिंह, जगपाल सिंह, सिनोज गिल, नवीन, पवन देशवाल, अश्विनी, पंकज शर्मा, रवीना शर्मा ने प्रदर्शनकारी दिव्यांगों को संबोधित किया। कांग्रेस, इनेलो, सीपीआईएम तथा बसपा ने दिव्यांगों को समर्थन दिया। मांगों का ज्ञापन समाज कल्याण अधिकारी को सौंपा गया।
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पुलिस पर भारी पड़े दिव्यांग
लघु सचिवालय से प्रदर्शन करते हुए दिव्यांग सीएम कैंप आफिस की तरफ बढ़े। ऐसे में पुलिस ने उनको रोकने के लिए रास्ते में बैरिकेड्स लगा दिए। काफी देर तक दिव्यांग यहीं पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। दिव्यांग बार बार पुलिस से गुहार लगाते रहे कि उन्हें कैंप आफिस तक जाने दिया गया, पर बात नहीं बन सकी। इस पर गुस्साए दिव्यांगों ने पुलिस के पसीने छुड़वा दिए और लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए। दिव्यांगों ने सरकार के प्रति भारी गुस्सा दिखाते हुए बैरीकेट को तोड़ दिया और कैंप कार्यालय के बाहर जा पहुंचे। जोरदार नारे लगाए गए। यहां समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
ये हैं दिव्यांगों की मांगें
दिव्यांगों के पदों की पहचान की जाए, खाली पड़े पदों को भरा जाए, कच्चे दिव्यांग कर्मचारियों को पक्का किया जाए, नये दिव्यांग अधिनियम 2016 को
राज्य में लागू किया जाए, 40 प्रतिशत से उस पर के सभी दिव्यांगों को बस पास व अन्य सुविधाएं दी जाएं, दिव्यांग मासिक पेंशन पांच हजार रुपये लागू किया
जाए, दिव्यांग पेंशनधारकों के परिवार के लिए निराश्रित पेंशन पुन: बहाल की जाए। सभी जरूरतमंद दिव्यांगों केे बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाएं,
दिव्यांगों के लिए बहुउद्देशीय कैंप लगाए जाएं, जिला स्तर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष स्कूल खोले जाएं। स्वयं रोजगार के लिए
दिव्यांगों को सस्ती दर पर सब्सिडी सहित ऋण उपलब्ध करवाए जाएं।
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करनाल। विकलांग अधिकार मंच हरियाणा के बैनर तले गुरुवार को दिव्यांगों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। सीएम कैंप ऑफिस का घेराव करने जाते सय पुलिस ने बैरिकेड्स लगातार उनको रोकने की कोशिश की। करीब एक घंटे तक यहां पर धक्का-मुक्की और जोर आजमाइश होती रही, लेकिन दिव्यांगों के आगे पुलिस कर्मचारी टिक नहीं पाई। आखिरकार बैरिकेड्स को तोड़ते हुए दिव्यांग सीएम कैंप ऑफिस के बाहर पहुंच गए और कैंप का घेराव कर जमकर बवाल काटा यहां पर मंच की ओर से जिला समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ऐसे में सरकार की तरफ से 27 अक्तूबर को उनके प्रतिनिधिमंडल को शाहबाद में वार्ता के लिए बुलाया। इसके बाद ही दिव्यांग शांत हुए।
प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन की अध्यक्षता राज्य प्रधान ऋषिकेश राजली ने की व संचालन राज्य महासचिव योगेश शांडिल्य ने किया। राष्ट्रीय विकलांग अधिकार मंच के महासचिव मुरलीधरन नेहा कि दिव्यांगों को जहां से सुविधाएं शुरू होती हैं यानि मेडिकल प्रमाण पत्र जो की पहली प्राथमिकता का काम है के लिए ही संघर्ष करना पड़ता है। कई जगहों पर डाक्टरों द्वारा स्थायी विकलांगता होते हुए भी मेडिकल का नवीनीकरण करते समय विकलांगता प्रतिशत घटाया जाता है।
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अभी तक पूरे देश में 60 प्रतिशत दिव्यांगों का ही प्रमाण पत्र बन पाया है। एनपीआरडी की मांग पर देश में दिव्यांगों के लिए सार्वभौमिक पहचान पत्र तो बनने लग गए, जिसकी गति अभी बहुत धीमी है। 2.5 करोड़ विकलांगों में से केवल 10 लाख विकलांगों को ही सार्वभौमिक पहचान पत्र मिले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों को गरीब मानते हुए बीपीएसल राशन कार्ड बनाने के आदेश जारी किए हैं मगर हरियाणा में दिव्यांगों के राशन कार्ड ही काटे जा रहे हैं। मंच के राज्य सलाहकार नरेश ने कहा कि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को पहले भी अवगत करवाया जा चुका है मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। दिव्यांगों में रोष बढ़ता जा रहा है। इस अवसर पर सीटू के राज्य अध्यक्ष सतबीर सिंह, जगपाल सिंह, सिनोज गिल, नवीन, पवन देशवाल, अश्विनी, पंकज शर्मा, रवीना शर्मा ने प्रदर्शनकारी दिव्यांगों को संबोधित किया। कांग्रेस, इनेलो, सीपीआईएम तथा बसपा ने दिव्यांगों को समर्थन दिया। मांगों का ज्ञापन समाज कल्याण अधिकारी को सौंपा गया।
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पुलिस पर भारी पड़े दिव्यांग
लघु सचिवालय से प्रदर्शन करते हुए दिव्यांग सीएम कैंप आफिस की तरफ बढ़े। ऐसे में पुलिस ने उनको रोकने के लिए रास्ते में बैरिकेड्स लगा दिए। काफी देर तक दिव्यांग यहीं पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। दिव्यांग बार बार पुलिस से गुहार लगाते रहे कि उन्हें कैंप आफिस तक जाने दिया गया, पर बात नहीं बन सकी। इस पर गुस्साए दिव्यांगों ने पुलिस के पसीने छुड़वा दिए और लगाए गए बैरिकेड्स हटा दिए। दिव्यांगों ने सरकार के प्रति भारी गुस्सा दिखाते हुए बैरीकेट को तोड़ दिया और कैंप कार्यालय के बाहर जा पहुंचे। जोरदार नारे लगाए गए। यहां समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
ये हैं दिव्यांगों की मांगें
दिव्यांगों के पदों की पहचान की जाए, खाली पड़े पदों को भरा जाए, कच्चे दिव्यांग कर्मचारियों को पक्का किया जाए, नये दिव्यांग अधिनियम 2016 को
राज्य में लागू किया जाए, 40 प्रतिशत से उस पर के सभी दिव्यांगों को बस पास व अन्य सुविधाएं दी जाएं, दिव्यांग मासिक पेंशन पांच हजार रुपये लागू किया
जाए, दिव्यांग पेंशनधारकों के परिवार के लिए निराश्रित पेंशन पुन: बहाल की जाए। सभी जरूरतमंद दिव्यांगों केे बीपीएल राशन कार्ड बनाए जाएं,
दिव्यांगों के लिए बहुउद्देशीय कैंप लगाए जाएं, जिला स्तर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए विशेष स्कूल खोले जाएं। स्वयं रोजगार के लिए
दिव्यांगों को सस्ती दर पर सब्सिडी सहित ऋण उपलब्ध करवाए जाएं।