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वार्डबंदी फिर विवादों में : वार्ड-1 के लोगों का आरोप,-हाईकोर्ट में याचिका के बावजूद प्रशासन ने वार्ड कर दिए रिजर्व

Fri, 19 Oct 2018 12:46 AM IST
Updated Fri, 19 Oct 2018 12:46 AM IST
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वार्डबंदी फिर विवादों में : वार्ड-1 के लोगों का आरोप,-हाईकोर्ट में याचिका के बावजूद प्रशासन ने वार्ड कर दिए रिजर्व
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। नगर निगम चुनाव से पहले वार्डबंदी फिर से विवादों में आ गई। 22 अक्तूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस पर सुनवाई होगी। दरअसल वार्ड-1 निवासी भूपिंद्र पोसवाल, रवि कुमार, अमर सिंह व रणबीर पांचाल ने 17 सितंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वार्ड-1 के नागरिकों का आरोप था कि उनके वार्ड को साजिश के तहत एससी बनाया रहा है, जबकि पहले यह वार्ड बीसी के लिए आरक्षित था। नई वार्डबंदी में भी इसी वर्ग में होना चाहिए था। याचिका में कहा गया था कि वार्ड-20 की इंदिरा कॉलोनी को उनके एरिया में जानबूझकर जोड़ दिया गया। निर्वाचन आयोग की हिदायतों के अनुसार भी इंदिरा विकास कॉलोनी को वार्ड-1 के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है, क्योंकि दोनों के बीच से नेशनल हाईवे गुजर रहा है। वैसे भी यह कॉलोनी उचाना गांव की तरफ है। यह गांव वार्ड-20 में आता है। इसलिए इस कॉलोनी के वार्ड-1 में जोड़ने को कोई औचित्य ही नहीं बनता।

पहले आपत्ति पर सुनवाई होती, फिर वार्ड रिजर्व करते
एडवोकेट प्रवीन पोसवाल ने बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट में 15 सितंबर को याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को सुनवाई के आदेश दिए थे। बाद 21 सितंबर को इसकी कॉपी डीसी व 24 को डीयूएलबी के डायरेक्टर को सौंप दी थी। इसके बावजूद 26 सितंबर को वार्ड रिजर्व कर दिए गए, जबकि पहले उनका शिकायत का निवारण होना चाहिए था। इसके विरोध में 17 अक्तूबर को फिर से हाईकोर्ट गए थे। बुधवार को निगम आयुक्त ने उनको बुलाया था, लेकिन उन्होंने हाथ खड़े कर दिए।
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ऐसे चला आंकड़ों का जादू
भूपिंद्र पोसवाल और रणबीर पांचाल ने बताया कि इंदिरा विकास कॉलोनी में एससी की आबादी 1375 है। इसके जुड़ने से वार्ड-1 का पूरा आंकड़ा बदल गया। जो वार्ड बीसी के लिए आरक्षित होना था, वह एससी श्रेणी में चला गया। अब वार्ड-1 में एससी श्रेणी की आबादी 5985 दिखाई गई है। बीसी श्रेणी के उम्मीदवार मैदान से बाहर हो गए। इसलिए वह इसका विरोध कर रहे हैं। नगर निगम के चार वार्ड एससी कैटेगिरी और दो वार्ड बीसी कैटेगिरी के प्रत्याशी के लिए आरक्षित हुए हैं। वार्ड-20 में कुल 21530 की आबादी दिखाई गई है। इसमें 9156 बीसी श्रेणी के हैं, जबकि 4111 एससी वर्ग से हैं। इंदिरा विकास कॉलोनी यदि इसमें होती तो इस वार्ड में एससी 5486 होने से यह वार्ड एससी के लिए आरक्षित हो जाता।
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एससी के लिए आरक्षित वार्ड पर एक नजर
वार्ड एससी : आबादी
16 -10333
06 -8416
14 -5959
01 -5985
बीसी के लिए यह दो वार्ड रिजर्व
वार्ड बीसी : आबादी
17 -10333
20 -9156
वार्ड-1 के लोगों के सवाल
1. इंदिरा विकास कॉलोनी को उनके वार्ड में जोड़ने का औचित्य क्या?
2. यह उचाना गांव के पास है तो इसे वार्ड-20 में क्यों नहीं जोड़ा गया?
3. इस कॉलोनी व वार्ड-1 के बीच नेशनल हाईवे है फिर भी इसे उनके वार्ड में क्यों दिखाया?
4. बलजीत एंकलेव और झंझाड़ी के बीच 12 किलोमीटर की दूरी के बाद भी यह उनके वार्ड में क्यों?

शुरुआत से विवादों में रही वार्डबंदी
दिल्ली की एमएस परफेक्ट वैबटेक प्राईवेट लिमिटेड एजेंसी ने करनाल की वार्डबंदी के लिए 15 अक्तूबर 2017 को सर्वे शुरू किया था एजेंसी को काम 15 दिसंबर तक पूरा करना था। दो महीने की बजाय पांच महीने बाद 8 मार्च 2018 को रिपोर्ट सार्वजनिक की। जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई। इस पर सवालों की झड़ी लग गई। मई में सामान्य जन सुनवाई के दौरान भी 52 आपत्तियां आई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि वार्डबंदी का सर्वे को ही सही नहीं किया गया है। निगम ने वार्डबंदी पर करीब 26 रुपये खर्च किए हैं।
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