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जीएसटी से बचने का व्यापारियों ने निकाला रास्ता, एक जोड़ी जूते के दो बिल
Updated Sun, 09 Jul 2017 11:47 PM IST
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जीएसटी ने तोड़ दी सलवार-कमीज और जूते की जोड़ी
विनीत पांडेय
करनाल। जीएसटी को लागू किए अभी गिने-चुने दिन ही हुए हैं, लेकिन व्यापारियों ने इससे बचने का तरीका ढूंढ निकाला है। उपाय भी ऐसा ढूंढा है कि वे जीएसटी के तहत रहकर अपने सामान की बिक्री भी कर रहे हैं और उन्हें टैक्स भी कम देना पड़ रहा है। यह चोर रास्ता फिलहाल फुटवियर और गारमेंट्स पर निकाला गया है। सीएम सिटी के कुछ दुकानदार इस समय जूते-चप्पल और सलवार-कमीज जैसे जोड़ी में बिकने वाले आइटम को अलग-अलग करके बेच रहे हैं। इससे उन्हें कम टैक्स देना पड़ रहा है।
जीएसटी काउंसिल ने आम ग्राहकों को फायदा देने के लिए जो योजनाएं बनाई हैं, उसका इस्तेमाल व्यापारी अपना टैक्स बचाने के लिए कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत 500 रुपये से कम के जूते-चप्पलों पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया है। वहीं इससे ज्यादा कीमत वाले पर 18 फीसदी का टैक्स लगा है। इसलिए शहर के कुछ व्यापारी अब 18 फीसदी टैक्स से बचने के लिए 500 रुपये से अधिक मूल्य के जूते-चप्पल को अलग-अलग करके बेच रहे हैं। इससे उन्हें 5 फीसदी टैक्स ही देना पड़ रहा है।
एक व्यापारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि जूते-चप्पल को अगल-अलग बेचने का यह खेल 1000 हजार से कम कीमत वाले उत्पादों पर ही खेला जा रहा है। व्यापारी ने कहा कि मान लें कि कोई ग्राहक 900 का कोई जूता खरीदता है तो उसे कुछ दुकानदार 450-450 के दो बिल काट कर देते हैं। इसी तरह का खेल शहर के कुछ गारमेंट्स व्यापारी भी खेल रहे हैैं। जीएसटी के तहत 1000 रुपये से कम के कपड़ों पर 12 और उससे अधिक पर 18 फीसदी टैक्स लगाया गया है। व्यापारी इसका भी फायदा उठा रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि जीएसटी के प्रावधानों का दुरुपयोग टैक्स के अलग-अलग दर के चलते हो रहा है। जीएसटी के तहत शून्य, 5, 12, 18, 28 फीसदी (सेस अलग से) की टैक्स दर तय की गई है। इसका व्यापारी फायदा उठा रहे हैं और कानून के दायरे में रहते हुए भी टैक्स चोरी में जुटे हुए हैं।
व्यापारियों को सता रहा इनकम टैक्स का डर
जीएसटी लागू होने के बाद से व्यापारियों में सिर्फ जीएसटी को लेकर ही नहीं है बल्कि अब उन्हें इनकम टैक्स का भी डर सताने लगा है। अभी तक ले-देकर आय कम दिखाने वाले व्यापारी अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार से होने वाली सालाना आय का पूरा रिकार्ड सरकार के पास पहले ही पहुंच जाएगा। इससे वे इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय धांधली नहीं कर पाएंगे। एक व्यापारी ने बताया कि शहर के कई ऐसे व्यापारी हैं जो कमाते तो करोड़ों में हैं, लेकिन इनकम टैक्स भरते समय अपनी आय लाखों में दिखाते हैं, ऐसे व्यापारियों को अब पूरा इनकम टैक्स भरना होगा।
गलत रास्ता अपनाने वाले को नुकसान होगा
जीएसटी से बचने के लिए जो भी गलत रास्ता निकालेगा, उसे खुद ही नुकसान होगा। किसी को ऐसा नहीं करना चाहिए। हालांकि जीएसटी से व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। आज के समय में व्यापार शून्य पर पहुंच गया है। यूपी और पंजाब से आने वाले छोटे व्यापारियों ने यहां आना बंद कर दिया है। इस मंदी से उबरने में 3 से 4 महीने और लगेंगे।
- रामपाल धीर, मालिक, धीरज हवाई चप्पल।
यह नियमानुसार है, इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते। जो भी व्यापारी इस तरह से कर रहे वे सब कुछ जीएसटी के नियम के अनुसार कर रहे हैं। वे अभी तक किसी भी तरह के नियम नहीं तोड़े, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। अगर नियम में बदलाव होता है तो जरूर कार्रवाई होगी।
- आनंद सिंह, आबकारी एवं कराधान उपायुक्त
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विनीत पांडेय
करनाल। जीएसटी को लागू किए अभी गिने-चुने दिन ही हुए हैं, लेकिन व्यापारियों ने इससे बचने का तरीका ढूंढ निकाला है। उपाय भी ऐसा ढूंढा है कि वे जीएसटी के तहत रहकर अपने सामान की बिक्री भी कर रहे हैं और उन्हें टैक्स भी कम देना पड़ रहा है। यह चोर रास्ता फिलहाल फुटवियर और गारमेंट्स पर निकाला गया है। सीएम सिटी के कुछ दुकानदार इस समय जूते-चप्पल और सलवार-कमीज जैसे जोड़ी में बिकने वाले आइटम को अलग-अलग करके बेच रहे हैं। इससे उन्हें कम टैक्स देना पड़ रहा है।
जीएसटी काउंसिल ने आम ग्राहकों को फायदा देने के लिए जो योजनाएं बनाई हैं, उसका इस्तेमाल व्यापारी अपना टैक्स बचाने के लिए कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत 500 रुपये से कम के जूते-चप्पलों पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाया है। वहीं इससे ज्यादा कीमत वाले पर 18 फीसदी का टैक्स लगा है। इसलिए शहर के कुछ व्यापारी अब 18 फीसदी टैक्स से बचने के लिए 500 रुपये से अधिक मूल्य के जूते-चप्पल को अलग-अलग करके बेच रहे हैं। इससे उन्हें 5 फीसदी टैक्स ही देना पड़ रहा है।
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एक व्यापारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि जूते-चप्पल को अगल-अलग बेचने का यह खेल 1000 हजार से कम कीमत वाले उत्पादों पर ही खेला जा रहा है। व्यापारी ने कहा कि मान लें कि कोई ग्राहक 900 का कोई जूता खरीदता है तो उसे कुछ दुकानदार 450-450 के दो बिल काट कर देते हैं। इसी तरह का खेल शहर के कुछ गारमेंट्स व्यापारी भी खेल रहे हैैं। जीएसटी के तहत 1000 रुपये से कम के कपड़ों पर 12 और उससे अधिक पर 18 फीसदी टैक्स लगाया गया है। व्यापारी इसका भी फायदा उठा रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि जीएसटी के प्रावधानों का दुरुपयोग टैक्स के अलग-अलग दर के चलते हो रहा है। जीएसटी के तहत शून्य, 5, 12, 18, 28 फीसदी (सेस अलग से) की टैक्स दर तय की गई है। इसका व्यापारी फायदा उठा रहे हैं और कानून के दायरे में रहते हुए भी टैक्स चोरी में जुटे हुए हैं।
व्यापारियों को सता रहा इनकम टैक्स का डर
जीएसटी लागू होने के बाद से व्यापारियों में सिर्फ जीएसटी को लेकर ही नहीं है बल्कि अब उन्हें इनकम टैक्स का भी डर सताने लगा है। अभी तक ले-देकर आय कम दिखाने वाले व्यापारी अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापार से होने वाली सालाना आय का पूरा रिकार्ड सरकार के पास पहले ही पहुंच जाएगा। इससे वे इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय धांधली नहीं कर पाएंगे। एक व्यापारी ने बताया कि शहर के कई ऐसे व्यापारी हैं जो कमाते तो करोड़ों में हैं, लेकिन इनकम टैक्स भरते समय अपनी आय लाखों में दिखाते हैं, ऐसे व्यापारियों को अब पूरा इनकम टैक्स भरना होगा।
गलत रास्ता अपनाने वाले को नुकसान होगा
जीएसटी से बचने के लिए जो भी गलत रास्ता निकालेगा, उसे खुद ही नुकसान होगा। किसी को ऐसा नहीं करना चाहिए। हालांकि जीएसटी से व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। आज के समय में व्यापार शून्य पर पहुंच गया है। यूपी और पंजाब से आने वाले छोटे व्यापारियों ने यहां आना बंद कर दिया है। इस मंदी से उबरने में 3 से 4 महीने और लगेंगे।
- रामपाल धीर, मालिक, धीरज हवाई चप्पल।
यह नियमानुसार है, इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते। जो भी व्यापारी इस तरह से कर रहे वे सब कुछ जीएसटी के नियम के अनुसार कर रहे हैं। वे अभी तक किसी भी तरह के नियम नहीं तोड़े, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। अगर नियम में बदलाव होता है तो जरूर कार्रवाई होगी।
- आनंद सिंह, आबकारी एवं कराधान उपायुक्त