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जैविक खेती करें, रेट अधिक मिलेंगे और खर्च कम होगा : रुपाला
Updated Wed, 10 Oct 2018 12:18 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और पंचायती राज्य मंत्री (भारत सरकार) पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि किसानों को आय दोगुना करने के लिए कुछ प्रयास खुद भी करने होंगे। सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है, लेकिन किसानों को चाहिए कि वे जैविक खेती की ओर बढ़ें, इस खेती से न केवल खर्च कम होगा, बल्कि सामान्य फसल से ज्यादा रेट जैविक फसल के मिलेंगे। इसके अलावा, किसानों को डेयरी और बागवानी की तरफ भी बढ़ना होगा। वे मंगलवार को केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा आयोजित स्वर्ण जयंती उन्नत कृषि मेले के उद्घाटन अवसर पर किसानों को संबोधित कर रहे थे।
इससे पहले, मुख्य अतिथि ने संस्थान के विभिन्न प्रदर्शनी स्टालों को दौरा किया। उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा के लगभग 20 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि अब हमें ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करनी हैं, जिनसे अधिक से अधिक बंजर भूमि को उत्पादन के योग्य बनाया जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस दिशा में सरकार हर सहयोग देने को तैयार है। इस दिशा में एक विस्तृत कार्य योजना बनाने की जरूरत है, जिसमें विभिन्न नीतिगत, अनुसंधान और सामाजिक मुद्दों को जोड़कर बंजर (लवणीय/क्षारीय) मृदाओं के सुधार में तेजी लाए जा सके।
कृषि विकास में बढ़चढ़ कर भाग लें महिलाएं
उन्होंने मेले में उपस्थित महिला किसानों को प्रेरित किया कि वह कृषि विकास में बढ़चढ़ कर भाग लें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने में कारगर सिद्ध हो सकते है। इसके लिए जैविक कृषि, बागवानी और पशुधन आधारित उद्यमों में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गाय की देशी प्रजातियों को बढ़ावा देकर दूध और दूध उत्पादों की मांग को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि पंजाब, हरियाणा राज्य में पुराली (फसल अवशेष) को जलाना गंभीर पर्यावरणीय समस्या है।
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वैज्ञानिकों की लें मदद
विशिष्ट अतिथि डॉ. एसके चौधरी, सहायक महानिदेशक (भाकृअनप., नई दिल्ली) ने अपने संबोधन में किसानों से आह्वान किया कि वह संस्थान द्वारा विकसित प्रौधोगिकियों का अधिक से अधिक उपयोग वैज्ञानिकों के परामर्श से करें। लवणीय, क्षारीय भूमि को सुधारने में यदि एक रूपया खर्च होता है तो 25 वर्षों तक 1 रुपये 90 पैसे आमदनी होती है। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रबोध चंद्र शर्मा ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के उपयोग से 20 लाख हेक्टेयर लवणग्रस्त मृदाओं का सुधार किया गया। संस्थान द्वारा विकसित बासमती की प्रजाति सीएसआर-30 द्वारा पिछले 6 वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा का लाभ हुआ है।
किसान अमरीक ने दिलाई अवशेष नहीं जलाने की शपथ
मंत्री ने किसान अमरीक सिंह गांव हजवाना को आमंत्रित किया और फसल अवशेष न जलाने के लिए उनके द्वारा सभी किसानों को शपथ दिलवाई गई। मंत्री महोदय ने 20 महिला व पुरुष प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह और प्रदर्शनी में भाग लेने आए विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी विभागों को उत्तम स्टाल प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। किसानों द्वारा उनके खेत व ट्यूबवेल से लाए गए मिट्टी एवं पानी के नमूनों की नि:शुल्क जांच की गई। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सनवाल, डॉ. डीएस बुंदेला, डॉ. कलेढोणकर, डॉ. आरके. सिंह, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. अंशुमान सिंह, अनिल शर्मा व किसान मौजूद रहे।
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करनाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और पंचायती राज्य मंत्री (भारत सरकार) पुरुषोत्तम रूपाला ने कहा कि किसानों को आय दोगुना करने के लिए कुछ प्रयास खुद भी करने होंगे। सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है, लेकिन किसानों को चाहिए कि वे जैविक खेती की ओर बढ़ें, इस खेती से न केवल खर्च कम होगा, बल्कि सामान्य फसल से ज्यादा रेट जैविक फसल के मिलेंगे। इसके अलावा, किसानों को डेयरी और बागवानी की तरफ भी बढ़ना होगा। वे मंगलवार को केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा आयोजित स्वर्ण जयंती उन्नत कृषि मेले के उद्घाटन अवसर पर किसानों को संबोधित कर रहे थे।
इससे पहले, मुख्य अतिथि ने संस्थान के विभिन्न प्रदर्शनी स्टालों को दौरा किया। उन्होंने गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा के लगभग 20 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि अब हमें ऐसी प्रौद्योगिकियां विकसित करनी हैं, जिनसे अधिक से अधिक बंजर भूमि को उत्पादन के योग्य बनाया जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस दिशा में सरकार हर सहयोग देने को तैयार है। इस दिशा में एक विस्तृत कार्य योजना बनाने की जरूरत है, जिसमें विभिन्न नीतिगत, अनुसंधान और सामाजिक मुद्दों को जोड़कर बंजर (लवणीय/क्षारीय) मृदाओं के सुधार में तेजी लाए जा सके।
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कृषि विकास में बढ़चढ़ कर भाग लें महिलाएं
उन्होंने मेले में उपस्थित महिला किसानों को प्रेरित किया कि वह कृषि विकास में बढ़चढ़ कर भाग लें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने में कारगर सिद्ध हो सकते है। इसके लिए जैविक कृषि, बागवानी और पशुधन आधारित उद्यमों में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गाय की देशी प्रजातियों को बढ़ावा देकर दूध और दूध उत्पादों की मांग को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि पंजाब, हरियाणा राज्य में पुराली (फसल अवशेष) को जलाना गंभीर पर्यावरणीय समस्या है।
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वैज्ञानिकों की लें मदद
विशिष्ट अतिथि डॉ. एसके चौधरी, सहायक महानिदेशक (भाकृअनप., नई दिल्ली) ने अपने संबोधन में किसानों से आह्वान किया कि वह संस्थान द्वारा विकसित प्रौधोगिकियों का अधिक से अधिक उपयोग वैज्ञानिकों के परामर्श से करें। लवणीय, क्षारीय भूमि को सुधारने में यदि एक रूपया खर्च होता है तो 25 वर्षों तक 1 रुपये 90 पैसे आमदनी होती है। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रबोध चंद्र शर्मा ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के उपयोग से 20 लाख हेक्टेयर लवणग्रस्त मृदाओं का सुधार किया गया। संस्थान द्वारा विकसित बासमती की प्रजाति सीएसआर-30 द्वारा पिछले 6 वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा का लाभ हुआ है।
किसान अमरीक ने दिलाई अवशेष नहीं जलाने की शपथ
मंत्री ने किसान अमरीक सिंह गांव हजवाना को आमंत्रित किया और फसल अवशेष न जलाने के लिए उनके द्वारा सभी किसानों को शपथ दिलवाई गई। मंत्री महोदय ने 20 महिला व पुरुष प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र व स्मृति चिन्ह और प्रदर्शनी में भाग लेने आए विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी विभागों को उत्तम स्टाल प्रमाण पत्र भी प्रदान किए। किसानों द्वारा उनके खेत व ट्यूबवेल से लाए गए मिट्टी एवं पानी के नमूनों की नि:शुल्क जांच की गई। इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र यादव, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सनवाल, डॉ. डीएस बुंदेला, डॉ. कलेढोणकर, डॉ. आरके. सिंह, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. अंशुमान सिंह, अनिल शर्मा व किसान मौजूद रहे।