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अतिक्रमण व कुतों के कारण रोजाना हो रहे विवाद, नगर निगम के पास नहीं कोई इलाज

Mon, 09 Apr 2018 12:32 AM IST
Updated Mon, 09 Apr 2018 12:32 AM IST
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अतिक्रमण व कुतों के कारण रोजाना हो रहे विवाद, नगर निगम के पास नहीं कोई इलाज
अतिक्रमण और कुत्तों के कारण आए दिन हो रहे विवाद, नगर निगम के पास नहीं कोई इलाज
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। शहर के होला मोहल्ला में दुकानदार के बाहर अतिक्रमण करके रखे गए सामान पर पालतू कुत्ते के पेशाब करने पर उठा विवाद पहला नहीं है। अनुमान है कि अतिक्रमण और आवारा कुत्तों और पालतू कुत्तों के कारण शहर में रोजाना चार से पांच झगड़े हो रहे हैं। अतिक्रमण से बाजारों में रोजाना ग्राहक और दुकानदार उलझते हैं। पालतू कुत्तों को लेकर पड़ोसियों के साथ विवाद भी होते रहते हैं। इस पूरे प्रकरण में नगर निगम की भूमिका न के बराबर है। वह न तो बाजारों से अतिक्रमण हटवा पा रहा रहा है और न ही पालतू या लावारिस कुत्तों की व्यवस्था कर पा रहा है। इसलिए वे कहीं भी शौच कर देते हैं। करनाल को खुले में शौच मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, लेकिन इन कुत्तों के खुले में शौच करने से गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने घर में पालतू कुत्ता रखता है तो उसे इसका नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। लेकिन, अभी तक शहर के किसी भी व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया है। अनुमान है कि शहर के करीब 1500 से ज्यादा लोग घर में कुत्ते पाल रहे हैं। ये लोग कुत्तों को खुले में सड़क या फिर पार्कों में ही मल-मूत्र कराते हैं। इससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। बता दें कि दिल्ली और इंदौर के अंदर पालतू कुत्तों के खुले में मल मूत्र त्यागने पर मालिक पर जुर्माना लगाया जाता है। करनाल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। एडवोकेट राजेश शर्मा, देवेंद्र सचदेवा और एडवोकेट अभिषेक तंवर ने मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

कुत्ते के खुले में मल-मूत्र त्यागने से हर साल पांच लाख हो रहे बीमार
एक शोध के मुताबिक कुत्तों के खुले में मूत्र और मल आदि करने से इंसानों में एंटीबायोटिक रजिस्टेंस इंफेंक्शन वाइसेरल लाइशमानियासिस तेजी से फैल रहा है। यह एक लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी को काला पीलिया भी कहा जाता है। लीवर, स्पलीन और बोनमेरो को प्रभावित करता है। इस बीमारी से हर साल दुनिया में पांच लाख लोग प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुत्तों का खुले में मल-मूत्र त्यागना खतरनाक है।
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नेहरू पैलेस : बरामदों में सजा दी दुकानें
सबसे ज्यादा अतिक्रमण सदर बाजार, कर्ण गेट, कमेटी चौक, सर्राफा बाजार और नेहरू पैलेस में है। कुंजपुरा रोड, बस स्टैंड, पुरानी सब्जी मंडी, परशुराम चौक, दयाल सिंह कॉलेज के पास भी दुकानदारों ने अतिक्रमण किया हुआ है। इनमें सबसे खास बात ये है कि नेहरू पैलेस के दुकानदारों ने तो ग्राहकों के चलने के लिए बनाए गए बरामदों तक में कब्जा कर लिया है। -
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-वर्जन
पालतू कुत्ता रखने के लिए नगर निगम में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए। बहुत समय से करनाल में इस प्रकार का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है। कुत्तों के मल मूत्र आदि त्यागने को लेकर निश्चित स्थान तय करने और जुर्माना आदि लगाने को लेकर यह मामला सदन में रखा जाएगा। बाजारों में अतिक्रमण की बात है तो पिछले तीन दिन से अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी है। आगे भी यह चलता रहेगा।
-धीरज कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर निगम।
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