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किशोर अवस्था में होने वाली परेशानियों को दूर करेंगे
Updated Tue, 09 Jan 2018 12:30 AM IST
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किशोर अवस्था में होने वाली परेशानी के बारे में जानेंगे 823 वॉलिंटियर
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
स्वास्थ्य विभाग ने पिअर एजुकेटर प्रोग्राम के तहत 823 युवक और युवतियों को प्रशिक्षण दिया है, जो किशोर अवस्था में लड़के और लड़कियों में होने वाली परेशानी को जानते हुए दूर कराने में सहायता करेंगे। क्योंकि किशोर अवस्था में लड़का-लड़की में शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होता है जिससे वे दूसरों को बताने में हिचकिचाते हैं और उन्हें गलत आदत लग जाती है। लेकिन अब ये 823 एजुकेटर 10 से 19 साल के किशोरों को खोजेंगे, जिन्हें नशे की लत है या फिर वह मानसिक और शारीरिक परेशान है। इसके बाद ये ट्रेनर उन बच्चों को सीएचसी में काउंसलर के पास ले जाएंगे। नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत पिअर एजुकेटर प्रोग्राम के लिए आशा वर्कर्स ने अपने क्षेत्र से इन वॉलिंटियर का चुनाव किया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इनको ट्रेनिंग दी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह प्रोग्राम निसिंग, इंद्री और घरौंडा तीन ब्लॉकों में शुरू किया है। इसके बाद यह प्रोग्राम अन्य ब्लॉकों में शुरू किया जाएगा।
नशे की चपेट में आ रहे हैं किशोर
किशोर अवस्था में लड़कों में कई गलत आदतें लग जाती है, जिसमें नशा सबसे आगे है। इस अवस्था में जब किशोर अपने साथी को नशा करते हुए देखता है तो उसके मन में भी वहीं कार्य करने की इच्छा पैदा होती है। जो धीरे-धीरे लत बन जाती है। ऐसे में जिले में अधिकतर युवा नशे की चपेट में आ चुके हैं। जो देश कि भविष्य कि लिए भी और उनके भविष्य के लिए भी खतरनाक है।
ऐसे जानेंगे समस्याएं
प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षित किए गए ट्रेनर अपने हमउम्र किशोरों के साथ बातचीत करेंगे और उन होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी लेंगे और साथ ही ये भी ध्यान रखेंगे की वे क्या कर रहे हैं। यदि कोई बच्चा गलत आदत का शिकार हो रहा है तो उसके साथ वे मित्रता बढ़ाएंगे और उनकी समस्या को अच्छे से सुनेंगे, ताकि सीएचसी में बैठे काउंसलर से उनकी काउंसलिंग कराई जाए। इसके साथ ही ये पिअर ग्रुप के सदस्य बच्चों को जागरूक भी करेंगे।
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जिले के तीन ब्लॉकों में पिअर एजुकेटर प्रोग्राम शुरू किया गया है, इसके लिए 823 युवकों को ट्रेनिंग दी गई है। ये युवक अपने हमउम्र के साथ मिलजुलकर उनकी समस्याओं को जानेंगे और उनकी काउंसलिंग भी कराएंगे, ताकि उनकी समस्या को दूर किया जा सके। -डॉ. नरेश करड़वाल, मेडिकल ऑफिसर एवं कार्यकारी उप सिविल सर्जन, करनाल।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
स्वास्थ्य विभाग ने पिअर एजुकेटर प्रोग्राम के तहत 823 युवक और युवतियों को प्रशिक्षण दिया है, जो किशोर अवस्था में लड़के और लड़कियों में होने वाली परेशानी को जानते हुए दूर कराने में सहायता करेंगे। क्योंकि किशोर अवस्था में लड़का-लड़की में शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होता है जिससे वे दूसरों को बताने में हिचकिचाते हैं और उन्हें गलत आदत लग जाती है। लेकिन अब ये 823 एजुकेटर 10 से 19 साल के किशोरों को खोजेंगे, जिन्हें नशे की लत है या फिर वह मानसिक और शारीरिक परेशान है। इसके बाद ये ट्रेनर उन बच्चों को सीएचसी में काउंसलर के पास ले जाएंगे। नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत पिअर एजुकेटर प्रोग्राम के लिए आशा वर्कर्स ने अपने क्षेत्र से इन वॉलिंटियर का चुनाव किया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इनको ट्रेनिंग दी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में यह प्रोग्राम निसिंग, इंद्री और घरौंडा तीन ब्लॉकों में शुरू किया है। इसके बाद यह प्रोग्राम अन्य ब्लॉकों में शुरू किया जाएगा।
नशे की चपेट में आ रहे हैं किशोर
किशोर अवस्था में लड़कों में कई गलत आदतें लग जाती है, जिसमें नशा सबसे आगे है। इस अवस्था में जब किशोर अपने साथी को नशा करते हुए देखता है तो उसके मन में भी वहीं कार्य करने की इच्छा पैदा होती है। जो धीरे-धीरे लत बन जाती है। ऐसे में जिले में अधिकतर युवा नशे की चपेट में आ चुके हैं। जो देश कि भविष्य कि लिए भी और उनके भविष्य के लिए भी खतरनाक है।
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ऐसे जानेंगे समस्याएं
प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षित किए गए ट्रेनर अपने हमउम्र किशोरों के साथ बातचीत करेंगे और उन होने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी लेंगे और साथ ही ये भी ध्यान रखेंगे की वे क्या कर रहे हैं। यदि कोई बच्चा गलत आदत का शिकार हो रहा है तो उसके साथ वे मित्रता बढ़ाएंगे और उनकी समस्या को अच्छे से सुनेंगे, ताकि सीएचसी में बैठे काउंसलर से उनकी काउंसलिंग कराई जाए। इसके साथ ही ये पिअर ग्रुप के सदस्य बच्चों को जागरूक भी करेंगे।
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जिले के तीन ब्लॉकों में पिअर एजुकेटर प्रोग्राम शुरू किया गया है, इसके लिए 823 युवकों को ट्रेनिंग दी गई है। ये युवक अपने हमउम्र के साथ मिलजुलकर उनकी समस्याओं को जानेंगे और उनकी काउंसलिंग भी कराएंगे, ताकि उनकी समस्या को दूर किया जा सके। -डॉ. नरेश करड़वाल, मेडिकल ऑफिसर एवं कार्यकारी उप सिविल सर्जन, करनाल।