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परिवहन पॉलिसी विवाद: 37 नियमों ने 73 निजी बसों पर लगाए ब्रेक

Sat, 17 Jun 2017 11:07 PM IST
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:07 PM IST
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परिवहन पॉलिसी विवाद: 37 नियमों ने 73 निजी बसों पर लगाए ब्रेक
परिवहन पॉलिसी विवाद: 37 नियमों ने 73 निजी बसों पर लगाए ब्रेक
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परमिट में दिए गए 35 नियम करने होंगे पूरे, बस स्टैंड के अंदर नहीं घुसने दी गई निजी बसें
सीसीटीवी लगाने व पेंटरों के पास लगी बसों की लाइनें, ग्रामीण रूटों पर यात्री रहे परेशान
आरटीए विभाग हुआ सख्त, नियम पूरे होने के बाद ही जारी किया जाएगा टाइम टेबल
फोटो संख्या-1 से 6 तक
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सरकार द्वारा लागू की नई परिवहन पॉलिसी के कारण जहां रोडवेज और निजी बस संचालकों में आपसी तनाव की स्थिति चल रही है, वहीं हर रोज सरकार के फरमान बदलने से नई पॉलिसी यात्रियों के लिए भी परेशानी का सबब बन गई है। रोडवेज कर्मचारियों के विरोध जताने के बाद सरकार ने प्राइवेट बसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आरटीए (रीजनल ट्रांसपोट्र अथोरिटी) की ओर से निजी बसों को 37 नियम पूरा करने के निर्देश दिये हैं, साथ ही ये भी कहा गया है कि जब तक नियम पूरे नहीं होंगे बसों को रूटों पर नहीं चलने दिया जाएगा। ऐसे में शनिवार को 73 निजी बसों को बस स्टैंड के अंदर तक नहीं घुसने नहीं दिया गया और न ही रूटों पर चलने दिया गया। शनिवार को निजी बसें बंद होने से ग्रामीण रूट प्रभावित रहे और इससे यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बता दें कि जिले में 20 मार्गों पर 73 निजी बसें चलती हैं, जोकि परिवहन विभाग द्वारा दिए गए 37 नियमों को पूरा न करने के कारण बंद कर दी गई हैं। शनिवार सुबह से ही आरटीए विभाग की टीम बस स्टैंड पर तैनात रही और निजी बसों को अंदर नहीं घुसने दिया गया। इसके अलावा रूटों पर चलने वाली बसों को भी रोक दिया गया। दोपहर तक ज्यादातर बसें खड़ी हो गई और बस संचालक नियम पूरा कराने में आपरेटर जुट गए। गौरतलब है कि वर्ष 2016 की पालिसी के तहत ये 37 नियम पूरे करने थे, लेकिन अब इतने दिन के बाद विभाग को नियमों की याद आई है, साथ ही दूसरी ओर रोडवेज की हड़ताल के बाद सरकार की तरफ से 2016 की पालिसी रद्द भी की जा चुकी है। फिलहाल निजी बस संचालक मझधार में फंसे हुए हैं। शनिवार को बसों को लेकर ग्रामीण रूटों के यात्रियों को खासी परेशानी करनी पड़ी, क्योंकि ये निजी बसें ज्यादातर गांवों के इलाकों में जाती हैं। चालकों का कहना है कि सरकार हर रोज नए नए फरमान जारी करके निजी बस संचालकों को परेशान कर रही है। जिले के 73 प्राइवेट बसों के बंद होने से संचालकों को करीब पांच लाख रुपये का रोजाना नुकसान हो रहा है।
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रोडवेज के पास नहीं पर्याप्त बसें, सवारी परेशान
रोडवेज डिपो में बसों की संख्या183 बसें हैं। जबकि रूटों पर सिर्फ 179 बसें ही दौड़ रही हैं। इनमें भी कुछ बसें तो ऐसी हैं जो हर रोज रूटों पर खराब हो जाती है। जबकि जिले में यात्रियों की संख्या को देखते हुए करीब 100 बसों की ओर जरूरत है। पिछले दो दिन से 73 बसें बंद होने से व्यवस्था ओर ज्यादा बिगड़ गई है। रोडवेज के पास पहले भी पर्याप्त बसें नहीं है। इससे यात्री को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोडवेज की बसें पिछले दो दिन से भारी भीड़ में चल रही हैं।
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इन रूटों पर चलती है प्राइवेट बसें
रूट निजी बसों की संख्या
करनाल से असंध : 12
करनाल से पूंडरी : 12
करनाल से शाहबाद : 08
नीलोखेड़ी से ढांड : 03
इंद्री से पेहवा : 06
असंध से पानीपत : 03
करनाल से बडौली पुल : 02
करनाल से मंगलौरा पुल : 01
करनाल से ढांड (वाया नीलोखेड़ी) :06
करनाल से रादौर (वाया इंद्री) : 06
असंध से कैथल : 02
करनाल से कुंजपुरा : 01
करनाल से रमाना : 01
करनाल से नड़ाना : 01
करनाल से निगदू : 02
करनाल से बैरसाल : 01
करनाल से गुमथला : 03
करनाल से सग्गा : 01
करनाल से ब्रास : 01
निसिंग से कुरुक्षेत्र : 01

विभाग ने नहीं दिया समय, अब बसें की बंद
सहकारी परिवहन सहमति के प्रदेशाध्यक्ष राजबीर मोकल ने कहा कि गुरूवार को उनकी आटीए सचिव के साथ बैठक हुई थी। बैठक में निजी बस संचालकों ने विभाग से परमिट में दिए गए नियमों को पूरा करने के लिए समय मांगा था, लेकिन विभाग की ओर से उन्हे समय नहीं दिया गया। अचानक 73 बसें बंद कर दी गई। इससे यात्रियों को परेशानी हो रही है, लेकिन ये सरकार की जिम्मेदारी है। हम नियम पूरा करने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए समय चाहिए। उनका कहना है कि बार बार मांगने पर भी निजी बसों को टाइम टेबल नहीं दिया जा रहा है।
जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी के साथ चालक परिचालक की ड्रेस की अनिवार्य
पालिसी के तहत निजी बसों को 37 नियम पूरे होंगे। इसके तहत, परिवहन विभाग ने बसों का रंग बदलने के साथ साथ निजी बसों में जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। वहीं, अब निजी बसों के चालक परिचालक रंग बिरंगे कपड़े पर नहीं पहन सकेंगे। विभाग ने सख्त हिदायत देते हुए चालक परिचालकों के लिए ग्रे कलर की पेंट शर्ट पहननी अनिवार्य कर दी है। इसी के साथ अन्य औपचारिकाताओं को पूरा करने के लिए प्राइवेट बस संचालक दिन रात जुटे हुए हैं। इसके अलावा, ड्राइवर कंडक्टर की पुलिस वेरिफिकेशन करानी होगी। ये सभी नियम पालिसी के तहत हैं।

निजी बस संचालक जब तक परमिट में दिए गए सभी नियमों को पूरा नहीं करेंगे तब तक बसों को चलने नहीं दिया जाएगा। इस बारे में तीन माह पहले ही निजी बस संचालकों को पहले भी हिदायत दी जा चुकी हैं। नियमों को पूरा करने के लिए फिलहाल सभी रूटों पर प्राइवेट बसें बंद है। जब सभी नियम पूरे होंगे उसके बाद ही बसे चलेंगी। रोडवेज व निजी बसों के विवाद के कारण अभी तक करनाल जिले में टाइम टेबल जारी नहीं किया जा चुका है। ये सभी 37 नियम परमिट के समय ही तय थे, जो भी बस नियम पूरा करेगा और जिसके पास परमिट होगा, उसे रूट पर चलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
-प्रधुमन सिंह, सचिव, आरटीए करनाल।
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