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165 शौचालय बदहाल, कैसे स्मार्ट होगी सिटी जनाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 02:51 AM IST
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165 toilets are in bad shape, how will the city be smart?
करनाल। शहर में नगर निगम के अधीन आने वाले शौचालयों की हालत बेहद खराब है। इन शौचालयों का इस्तेमाल करना तो दूर की बात है, इनके आसपास से गुजरना तक मुश्किल हो जाता है। हैरानी की बात यह है कि पिछले एक साल से 165 शौचालयों के रख-रखाव और सफाई के लिए विभाग टेंडर ही नहीं करवा पाया। जब शौचालयों की हालत ऐसी रहेगी तो स्मार्ट सिटी का सपना कैसे पूरा होगा। बताया जा रहा है कि शौचालयों का ठेका लेने में कोई ठेकेदार रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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अमर उजाला ने शहर के शौचालयों की पड़ताल की तो पाया कि ज्यादातर शौचालय इस्तेमाल करने योग्य नहीं हैं। शहरवासियों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ता होगा अंदाजा लगाया जा सकता है। सबसे ज्यादा परेशानी गांवों और अन्य जगहों से खरीदारी के लिए आने वाली महिलाओं को होती है। शौचालयों में कहीं जाने लायक नहीं है तो कहीं दरवाजा टूटा है, कहीं पानी की व्यवस्था ही नहीं है।
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करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए थे 165 शौचालय
नगर निगम के अधीन करीब 165 शौचालय हैं। 15 मोबाइल टॉयलेट में से 11 क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। 16 सुलभ शौचालय, 88 विभिन्न भवनों में स्थित हैं। शेष शौचालय कंक्रीट के बने हैं। वहीं एक बॉयो डाइजेस्टर शौचालय है जो मल को पानी में तबदील करता हैै। सभी शौचालयों को बनाने में विभाग ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं।
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सालाना 50 लाख है खर्चा
विभाग के अनुसार 165 शौचालयों पर सफाई और रख-रखाव के लिए प्रति माह करीब 4 लाख रुपये खर्च आता है। यानी सालाना करीब 50 लाख रुपये खर्च किया जाता है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी आमजन इन शौचालयों का उपयोग नहीं कर पा रहा है।
25 लाख के शीरो रूम पर ढाई साल से लटके हैं ताले
नगर निगम की ओर से 2018 में महिलाओं को विशेष सुविधाएं देने के मकसद से 25 लाख रुपये खर्च कर तीन शीरो रूम नेहरू पैलेस, आईटीआई चौक व एक रेलवे रोड पर महिला कॉलेज के सामने बनाए गए थे। लेकिन उन पर भी ढाई साल से ताले लटके हैं।
आसपास से गुजरना मुश्किल
शौचालयों की हालत इतनी बुरी है कि उनमें जाना तो दूर की बात उनके आसपास से गुजरना तक मुश्किल हो जाता है। विभाग ने जब इनके निर्माण पर इतनी रकम खर्च की है तो इनका रख रखाव भी करना चाहिए।
-पवन
क्या ऐसे बनेगी स्मार्ट सिटी...
सरकार की ओर से शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन जब शौचालयों की ऐसी हालत होगी तो स्मार्ट सिटी का सपना कैसे पूरा होगा। इस पर गौर करना चाहिए।
- शैंकी
जल्द टेंडर लगने की संभावना
दो-तीन बार टेंडर केे लिए कॉल की जा चुकी है लेकिन टेंडर नहीं हो पाया। हालांकि आगामी एक सप्ताह में टेंडर होने की संभावना है। वहीं, निगम की ओर से समय-समय पर शौचालयों की सफाई करवाई जाती है।

धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम

51: पुराने बस स्टेन्ड के बाहर बंद पडा जन सुविधा केन्द्र का शौचालय। अमर उजाला

51: पुराने बस स्टेन्ड के बाहर बंद पडा जन सुविधा केन्द्र का शौचालय। अमर उजाला

53: मीरा घाटी रोड पर गदंगी से अटा शौचालय। अमर उजाला

53: मीरा घाटी रोड पर गदंगी से अटा शौचालय। अमर उजाला

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