16 किलोमीटर में नहीं एक भी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, छूट रही बेटियों की पढ़ाई
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प्रदेश सरकार एक तरफ जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश दे रही है वहीं दूसरी ओर बेटियों की शिक्षा की ओर किसी का ध्यान नहीं है। आज भी दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां सीनियर सेकेंडरी स्कूल नहीं हैं और न ही बेटियों के लिए आसपास के स्कूलों तक जाने के लिए ट्रांसपोर्ट सुविधा है। ऐसे में ज्यादातर गांव में दसवीं कक्षा पास करने के बाद बेटियों की पढ़ाई छूट जाती है। ग्रामीण कई बार क्षेत्र के स्कूलों को अपग्रेड करवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक किसी ने भी उनकी इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया है। प्रदेश के गठन के बाद कई सरकारें बदली व प्रशासनिक अधिकारी आए, लेकिन सिवाय आश्वासन के आज तक उन्हें कुछ भी नहीं मिला है।
जिले की यमुना तलहटी में बसे दर्जनों गांवों के हालात प्रदेश के गठन के पांच दशक बाद भी नहीं सुधरे हैं। आज भी उन गांवों में पिछड़ेपन की स्थिति है। क्षेत्र में सड़के तो हैं, लेकिन बस की सुविधा नहीं है। छात्र तो हैं लेकिन स्कूल नहीं है। गांवों में जो स्कूल चल रहे हैं, उनमें अध्यापकों की संख्या नाममात्र है। इसी वजह से क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। कुंजपुरा से लेकर मंगलौरा गांव के बीच की दूरी करीब 20 किलोमीटर है तथा मंगलौरा से करनाल की दूरी 16 किलोमीटर है। इस पूरे क्षेत्र में कन्या स्कूल तो क्या, सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी नहीं है।
ऐसे में ज्यादातर गांव में पांचवीं व आठवीं कक्षा तक पढ़ने के बाद बच्चों को आसपास के अन्य गांव के हाईस्कूल में जाना पड़ता है, लेकिन दसवीं कक्षा के बाद उनके लिए अपने आसपास के क्षेत्र में पढ़ने के लिए कोई भी स्कूल उपलब्ध नहीं है। विद्यार्थियों को 11वीं व 12वीं में एडमिशन के लिए करनाल जाना पड़ता है। शहर के स्कूलों के हालात भी ज्यादा ठीक नहीं है। इसी वजह से अभिभावकों को मजबूरन प्राइवेट स्कूलों का सहारा लेना पड़ रहा है। स्कूलों की कमी का सबसे अधिक असर बेटियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। सामाजिक कुरीतियों व घरों की बंदिशों के चलते उनके लिए घर से दूर जाकर पढ़ना व फिर साइकिल या अन्य किसी साधन से आना जाना उतना आसान नहीं है। इसी वजह से इस क्षेत्र के सभी गांवों में करीब 60 प्रतिशत से अधिक लड़कियां 10वीं के बाद ही पढ़ाई छोड़ रही हैं।
इन गांवों के विद्यार्थियों को हो रही परेशानी
करनाल से मंगलौरा के बीच करीब 16 किलोमीटर की दूरी है। इस रूट के गांव नगला फार्म, नगला चौक, नगला मेघा, अमृतपुर, मंगलौरा, अंधेड़ा, मोहियुदीनपुर, चुंढीपुर, मुस्तफाबाद, गुजरान ढाकवाला, रोड़ान ढाकवाला, जमुखाला-1 व जमुखाला-2, नलीपार, नलवी खुर्द, नलवीं कलां, डबरकी, रावर, शेखपुरा सुहावना आदि गांव में एक भी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नहीं है। 20 किलोमीटर के दायरे में केवल कुंजपुरा व सूबरी गांव में दो सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। उनमें भी अध्यापकों की भारी कमी है।
दो लाख की आबादी में एक भी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नहीं
शहर की आधी आबादी वाले लाइन पार एरिया में लड़कों के लिए एक भी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नहीं है। प्रेम नगर में एक कन्या विद्यालय है, वहां पर भी अध्यापकों की भारी कमी है। शिक्षा निदेशालय के नियमों के मुताबिक तीन किलोमीटर के दायरे में तो स्कूल है। लेकिन उस तीन किलोमीटर के सफर के लिए रेलवे ओवरब्रिज के पांच किलोमीटर के फेर को नहीं जोड़ा गया है। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
जिले में 15 लाख की आबादी पर सिर्फ 88 स्कूल
जिले की आबादी 15 लाख है, इसमें अर्बन एरिया में रहने वालों की संख्या करीब पांच लाख है तथा कस्बों और जिले की 400 पंचायतों की आबादी 10 लाख है। लेकिन इन सभी पंचायतों, कस्बों व अर्बन एरिया में सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या 88 है, जो कि जनसंख्या के लिहाज से कम है।
फाइलों में अपग्रेड हो रहे स्कूल
शिक्षा विभाग की ओर से करीब पांच साल पहले जिले के दर्जनों स्कूलों को अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। विभाग ने स्कूलों में भवन निर्माण व सुविधाओं को लेकर तैयारियां पूरी कर ली थी। लेकिन पांच साल बाद भी उन स्कूलों में औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पाठ्यक्रम लागू नहीं हो सका है। विभाग द्वारा इस बार भी तीन स्कूलों को अपग्रेड करने की सिफारिश की है।
वर्जन
जिले में अंजलथली हाई स्कूल, डाचर हाई स्कूल व मोहियुदीनपुर हाई स्कूल को अपग्रेड करने की सिफारिश की गई है। इन स्कूलों में बारहवीं कक्षा के पाठ्यक्रम को शुरू करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभाग से अनुमति मिलते ही पाठ्यक्रम को लागू कर दिया जाएगा।
सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी करनाल।