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अधिकांश मनुष्यों की असफलता का कारण अधूरा ज्ञान होता है: डॉ. गुप्ता
Updated Tue, 09 Jan 2018 12:30 AM IST
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असफलता का कारण अधूरा ज्ञान : डॉ. गुप्ता
अमर उजाला ब्यूरो
निसिंग।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सात दिवसीय एनएसएस कैंप के छठे दिन स्वयंसेवकों को कृषि विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण बचाओ और एक अध्यापक की भूमिका में जीवन में ज्ञान कभी पूरा नहीं हो पाता, को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी डॉ. राधेश्याम गुप्ता व कृषि अधिकारी रवि राणा पहुंचे। अध्यापक की भूमिका के बारे में डॉ. राधेश्याम गुप्ता ने कहा कि जीवन में ज्ञान कभी पूरा नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि ज्ञान जब, जहां और जिससे मिले लेना चाहिए। ज्ञान के बिना मनुष्य अधूरा है। अधिकांश मनुष्यों की असफलता का कारण अधूरा ज्ञान होता है। गुप्ता ने बच्चों से कुछ प्रश्न भी पूछे। कृषि अधिकारी रवि राणा ने कहा कि कंबाइन से धान की कटाई के बाद बचे धान के अवशेषों को किसान आग लगा देते है। इससे धुएं के रूप में हमारे पर्यावरण में जहर घुल रहा है। खेतों में लगाई जाने वाली आग से हमारे मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो जाते है, साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति भी घट जाती है। इसी के साथ खेतों में आग लगाने से पैदा हुए धुएं से लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है। राणा ने कहा कि किसानों से अवशेषों जलाने की बजाय खाद के रूप में प्रयोग करने की अपील की। इस मौके पर यूनिट प्रभारी सूबे सिंह, मोनिका देवी, ऋषिराज शर्मा, दलबीर सिंह, ईश्वर सिंह और दर्शना देवी आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
निसिंग।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सात दिवसीय एनएसएस कैंप के छठे दिन स्वयंसेवकों को कृषि विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण बचाओ और एक अध्यापक की भूमिका में जीवन में ज्ञान कभी पूरा नहीं हो पाता, को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में खंड विकास अधिकारी डॉ. राधेश्याम गुप्ता व कृषि अधिकारी रवि राणा पहुंचे। अध्यापक की भूमिका के बारे में डॉ. राधेश्याम गुप्ता ने कहा कि जीवन में ज्ञान कभी पूरा नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि ज्ञान जब, जहां और जिससे मिले लेना चाहिए। ज्ञान के बिना मनुष्य अधूरा है। अधिकांश मनुष्यों की असफलता का कारण अधूरा ज्ञान होता है। गुप्ता ने बच्चों से कुछ प्रश्न भी पूछे। कृषि अधिकारी रवि राणा ने कहा कि कंबाइन से धान की कटाई के बाद बचे धान के अवशेषों को किसान आग लगा देते है। इससे धुएं के रूप में हमारे पर्यावरण में जहर घुल रहा है। खेतों में लगाई जाने वाली आग से हमारे मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो जाते है, साथ ही जमीन की उर्वरा शक्ति भी घट जाती है। इसी के साथ खेतों में आग लगाने से पैदा हुए धुएं से लोगों को सांस लेने में भी परेशानी होती है। राणा ने कहा कि किसानों से अवशेषों जलाने की बजाय खाद के रूप में प्रयोग करने की अपील की। इस मौके पर यूनिट प्रभारी सूबे सिंह, मोनिका देवी, ऋषिराज शर्मा, दलबीर सिंह, ईश्वर सिंह और दर्शना देवी आदि मौजूद रहे।