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अवैध निर्माण गिराए जाने पर ग्रामीणों ने की प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी
Updated Sun, 04 Jun 2017 11:48 PM IST
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अवैध निर्माण गिराए जाने पर ग्रामीणों ने की नारेबाजी
इन्द्री। नगला मेघा गांव में प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण गिराए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मुआवजे की मांग की। प्रशासन ने दो दिन पहले कोर्ट के आदेश पर गांव में अवैध मकानों को गिरा दिया था। ग्रामीणों ने इससे आहत होकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त कर मुआवजे की मांग की। ग्रामीण पुष्पा, राजकली, नेहा, केला, ममता, बाला, सुनीता, रूमा, बीमला, संकुतला, पूनम, रत्तीराम, सुनील, कुलदीप, नाथी, जय कुमार, सुबरी आदि का कहना हैं पहले तो प्रशासन द्वारा उनके मकान व शौचालय बनवाए गए थे, लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही उनकी जगह को अवैध बताकर गिराने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को प्रशासन के अधिकारी अवैध जगह में बने मकानों को गिराने के लिए आए और ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। लेकिन फिर भी उन्होंने प्रशासन को एक दिन का समय देने की मांग की। ताकि वह अवैध जगह से अपना सामान उठा सके, लेकिन प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और मकान गिरा दिए। उनका कुछ सामान मलबे में दब गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कुछ पशुओं को भी चोट आई हैं। ग्रामीणों का कहना है सरकार के द्वारा जो शौचालय उनके घरों में बनाए गये थे। वह तोड़ दिए गए हैं। इससे अब मजबूर होकर वह खुले में शौच जाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना हैं कि प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में आकर यह कदम उठाया हैं। बीडीपीओं राजकुमार ने बताया कि गांव में मुनादी के साथ भी लोगों को सूचना दे दी गई थी और 27 अप्रैल को भी एक नोटिस दिया गया था। इसके बाद अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई की गई है।
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इन्द्री। नगला मेघा गांव में प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण गिराए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मुआवजे की मांग की। प्रशासन ने दो दिन पहले कोर्ट के आदेश पर गांव में अवैध मकानों को गिरा दिया था। ग्रामीणों ने इससे आहत होकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त कर मुआवजे की मांग की। ग्रामीण पुष्पा, राजकली, नेहा, केला, ममता, बाला, सुनीता, रूमा, बीमला, संकुतला, पूनम, रत्तीराम, सुनील, कुलदीप, नाथी, जय कुमार, सुबरी आदि का कहना हैं पहले तो प्रशासन द्वारा उनके मकान व शौचालय बनवाए गए थे, लेकिन उसके कुछ दिन बाद ही उनकी जगह को अवैध बताकर गिराने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को प्रशासन के अधिकारी अवैध जगह में बने मकानों को गिराने के लिए आए और ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। लेकिन फिर भी उन्होंने प्रशासन को एक दिन का समय देने की मांग की। ताकि वह अवैध जगह से अपना सामान उठा सके, लेकिन प्रशासन ने उनकी एक न सुनी और मकान गिरा दिए। उनका कुछ सामान मलबे में दब गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कुछ पशुओं को भी चोट आई हैं। ग्रामीणों का कहना है सरकार के द्वारा जो शौचालय उनके घरों में बनाए गये थे। वह तोड़ दिए गए हैं। इससे अब मजबूर होकर वह खुले में शौच जाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना हैं कि प्रशासन ने राजनीतिक दबाव में आकर यह कदम उठाया हैं। बीडीपीओं राजकुमार ने बताया कि गांव में मुनादी के साथ भी लोगों को सूचना दे दी गई थी और 27 अप्रैल को भी एक नोटिस दिया गया था। इसके बाद अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई की गई है।