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दो माह पहले आई प्लेटलेटस मशीन को मेडिकल कालेज ने नहीं किया चालू, निजी लैब पर ढीली हो रही मरीजों की जेब
Updated Tue, 30 Oct 2018 12:01 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में करीब दो महीने से प्लेटलेट्स निकालने की मशीन धूल हांक रही है। इससे रक्तदाता के ब्लड से चार गुना प्लेटलेट्स निकालती है। इस मशीन के न चलने से मरीजों को प्राइवेट लैब में जाकर 11 से 15 हजार रुपये देकर प्लेटलेट्स खरीदनी पड़ रही है।
हालांकि, नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में ब्लड से प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं, लेकिन यह प्रोसीजर नॉर्मल है, जो रक्तदाता से ब्लड लेकर फिर उस ब्लड से प्लेटलेट्स निकालते हैं। इनसे 10 हजार के आस-पास ही प्लेटलेट्स निकलते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में रखी जंबो किट मशीन से चार गुना 40 हजार तक प्लेटलेट्स निकाल सकते हैं। इस मशीन के न चलने से प्राइवेट लैब संचालकों को काफी लाभ पहुंच रहा है, क्योंकि लैब संचालक 11 से 15 हजार रुपये लेकर उसी मशीन से प्लेटलेट्स निकालकर देते हैं।
इस बारे में मेडिकल कॉलेज के अधिकारी की सुने तो वे जल्द ही मशीन शुरू करने के दावे करते हैं। इसका मतलब जब ये प्राइवेट लैब संचालक मरीजों को लूट लेंगे तब मेडिकल कॉलेज में इस मशीन को शुरू किया जाएगा। यह हालात सीएम सिटी के हैं। इतना ही नहीं मिले में बुखार के कारण कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास उनकी कोई जानकारी नहीं है।
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प्राइवेट अस्पतालों में भी नहीं मिल रहे मरीजों को बेड
वायरल और डेंगू बुखार जिलेभर में फैला हुआ है। सरकारी अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में भी वायरल बुखार और डेंगू के मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। इतना ही नहीं मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि प्राइवेट अस्पतालों में ही मरीजों बेड नहीं मिल रहे हैं। इस कारण अधिकतर मरीजों का इलाज घर से ही चल रहा है जो अस्पताल में डॉक्टर से आकर दवा ले जाते हैं। यदि शहर और गांव में खुली झोलाछाप डॉक्टर की दुकानों में देखें तो वहां भी मरीज बेंच और चारपाई पर लेटे दिखाई देते हैं।
प्लेटलेट्स कम दिखाकर डरा रहे हैं मरीजों को, स्वास्थ्य विभाग की आंखें बंद
प्राइवेट अस्पताल में खुली अधिकतर लैबोट्री में मरीजों को डराने के लिए उनकी प्लेटलेट्स कम दिखाई जाती है ताकि मरीज अस्पताल में दाखिल हो जाए। इतना ही नहीं मरीजों में 20 हजार प्लेटलेट्स दिखाकर फिर उन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है। इससे प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर का कमीशन बनता है तो वहीं प्राइवेट लैब संचालकों को फायदा हो रहा है। यह खेल प्राइवेट अस्पतालों में जोरों से चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग इस खेल को देखकर लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
मरीजों से भरे पड़े हैं अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में सिर्फ 80 डेंगू केस हैं दर्ज
शहर के सभी प्राइवेट अस्पताल वायरल और डेंगू के मरीजों से भरे हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अभी तक 80 डेंगू के मरीज दर्ज हुए हैं। इसका मुख्य कारण है कि प्राइवेट अस्पताल संचालक संदिग्ध डेंगू के मरीज का ब्लड सैंपल स्वास्थ्य विभाग को नहीं भेज रहे और न ही स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है। प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को डेंगू बताकर उन्हें लूटने का काम कर रहे हैं।
8800 घरों में मिला लारवा, 2900 को किए हैं नोटिस जारी
डिप्टी सीएमओ और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सरोज ने बताया कि उन्होंने पौने चार लाख घरों में जाकर के लारवों की जांच की है। इनमें 8800 घरों में ही लारवा पाया गया है। कार्रवाई करते हुए 2900 लोगों को नोटिस भी दिए हैं जिनके घरों, दुकानों व संस्थानों में लारवा मिला है। इसके साथ ही 20 हजार मरीजों की रक्त पट्टिकाएं बनाई हैं।
- वर्जन
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की मशीन आई हुई है। ब्लड बैंक फिलहाल नागरिक अस्पताल में है, उसे जल्द ही मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाना है। इसके बाद जल्द ही इस मशीन को शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. मुनीष पुरुथी, डीएमएस, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल।
घीड़ में रक्तदान शिविर 4 नवंबर को
मानव केयर संस्था के सदस्य पद्म सिंह ने बताया कि संस्था की ओर से 4 नवंबर को गांव घीड़ गांव में रक्तदान शिविर लगाया जाएगा, ताकि जरूरतमंद मरीजों को रक्त के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्तदान शिविर में 18 से 60 वर्ष तक का हर स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में करीब दो महीने से प्लेटलेट्स निकालने की मशीन धूल हांक रही है। इससे रक्तदाता के ब्लड से चार गुना प्लेटलेट्स निकालती है। इस मशीन के न चलने से मरीजों को प्राइवेट लैब में जाकर 11 से 15 हजार रुपये देकर प्लेटलेट्स खरीदनी पड़ रही है।
हालांकि, नागरिक अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में ब्लड से प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं, लेकिन यह प्रोसीजर नॉर्मल है, जो रक्तदाता से ब्लड लेकर फिर उस ब्लड से प्लेटलेट्स निकालते हैं। इनसे 10 हजार के आस-पास ही प्लेटलेट्स निकलते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में रखी जंबो किट मशीन से चार गुना 40 हजार तक प्लेटलेट्स निकाल सकते हैं। इस मशीन के न चलने से प्राइवेट लैब संचालकों को काफी लाभ पहुंच रहा है, क्योंकि लैब संचालक 11 से 15 हजार रुपये लेकर उसी मशीन से प्लेटलेट्स निकालकर देते हैं।
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इस बारे में मेडिकल कॉलेज के अधिकारी की सुने तो वे जल्द ही मशीन शुरू करने के दावे करते हैं। इसका मतलब जब ये प्राइवेट लैब संचालक मरीजों को लूट लेंगे तब मेडिकल कॉलेज में इस मशीन को शुरू किया जाएगा। यह हालात सीएम सिटी के हैं। इतना ही नहीं मिले में बुखार के कारण कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास उनकी कोई जानकारी नहीं है।
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प्राइवेट अस्पतालों में भी नहीं मिल रहे मरीजों को बेड
वायरल और डेंगू बुखार जिलेभर में फैला हुआ है। सरकारी अस्पताल से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में भी वायरल बुखार और डेंगू के मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। इतना ही नहीं मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि प्राइवेट अस्पतालों में ही मरीजों बेड नहीं मिल रहे हैं। इस कारण अधिकतर मरीजों का इलाज घर से ही चल रहा है जो अस्पताल में डॉक्टर से आकर दवा ले जाते हैं। यदि शहर और गांव में खुली झोलाछाप डॉक्टर की दुकानों में देखें तो वहां भी मरीज बेंच और चारपाई पर लेटे दिखाई देते हैं।
प्लेटलेट्स कम दिखाकर डरा रहे हैं मरीजों को, स्वास्थ्य विभाग की आंखें बंद
प्राइवेट अस्पताल में खुली अधिकतर लैबोट्री में मरीजों को डराने के लिए उनकी प्लेटलेट्स कम दिखाई जाती है ताकि मरीज अस्पताल में दाखिल हो जाए। इतना ही नहीं मरीजों में 20 हजार प्लेटलेट्स दिखाकर फिर उन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाई जाती है। इससे प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर का कमीशन बनता है तो वहीं प्राइवेट लैब संचालकों को फायदा हो रहा है। यह खेल प्राइवेट अस्पतालों में जोरों से चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग इस खेल को देखकर लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
मरीजों से भरे पड़े हैं अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में सिर्फ 80 डेंगू केस हैं दर्ज
शहर के सभी प्राइवेट अस्पताल वायरल और डेंगू के मरीजों से भरे हुए हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में अभी तक 80 डेंगू के मरीज दर्ज हुए हैं। इसका मुख्य कारण है कि प्राइवेट अस्पताल संचालक संदिग्ध डेंगू के मरीज का ब्लड सैंपल स्वास्थ्य विभाग को नहीं भेज रहे और न ही स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है। प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को डेंगू बताकर उन्हें लूटने का काम कर रहे हैं।
8800 घरों में मिला लारवा, 2900 को किए हैं नोटिस जारी
डिप्टी सीएमओ और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सरोज ने बताया कि उन्होंने पौने चार लाख घरों में जाकर के लारवों की जांच की है। इनमें 8800 घरों में ही लारवा पाया गया है। कार्रवाई करते हुए 2900 लोगों को नोटिस भी दिए हैं जिनके घरों, दुकानों व संस्थानों में लारवा मिला है। इसके साथ ही 20 हजार मरीजों की रक्त पट्टिकाएं बनाई हैं।
- वर्जन
मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की मशीन आई हुई है। ब्लड बैंक फिलहाल नागरिक अस्पताल में है, उसे जल्द ही मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया जाना है। इसके बाद जल्द ही इस मशीन को शुरू कर दिया जाएगा। -डॉ. मुनीष पुरुथी, डीएमएस, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल।
घीड़ में रक्तदान शिविर 4 नवंबर को
मानव केयर संस्था के सदस्य पद्म सिंह ने बताया कि संस्था की ओर से 4 नवंबर को गांव घीड़ गांव में रक्तदान शिविर लगाया जाएगा, ताकि जरूरतमंद मरीजों को रक्त के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। रक्तदान शिविर में 18 से 60 वर्ष तक का हर स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।