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वादाखिलाफी पर कर्मचारियों की मोर्चाबंदी, सरकार को हिलाने की चेतावनी
Updated Sat, 22 Jul 2017 11:43 PM IST
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वादाखिलाफी पर कर्मचारियों की मोर्चाबंदी, सरकार को हिलाने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विधानसभा चुनाव को अभी दो साल का लंबा वक्त है, लेकिन राज्य सरकार की जड़े हिलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों ने अभी से मोर्चा बंदी शुरू कर दी है। एक तरफ जहां भारतीय किसान यूनियन ने कर्ज माफी के लिए राज्य सरकार को 8 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है, वहीं कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी, मांगों की लगातार अनदेखी व जनसेवा के विभागों में निजीकरण की नीतियों को लागू करने का आरोप लगाकर शनिवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय के सामने 24 घंटे का सामूहिक पड़ाव डाल दिया है। कर्मचारियों के इस महा पड़ाव का समापन रविवार को बड़े आंदोलन की घोषणा के साथ होगा। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले आयोजित इस पड़ाव में राज्य के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालय, नगर निगमों, परिषद्, पालिकाओं व विभिन्न परियोजनाओं में काम करने वाले हजारों कर्मचारी शामिल हुए और जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी शक्ति प्रदर्शन किया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर फौगाट ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए सरकार को चेतावनी दी की अगर आज शुरू हुए 24 घंटे के पड़ाव के समापन से पहले सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की तो रविवार को आगामी आंदोलन का ऐलान कर दिया जायेगा। इस महापड़ाव में शामिल होने के लिए कर्मचारी सवेरे से ही हाथों में बेनर व मांगों के समर्थन में लिखी फट्टियां लिए प्रदर्शन करते हुए सीएम सिटी पहुंचने लगे थे।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष का. सतबीर सिंह ने अपने संगठन की ओर से कर्मचारियों की मांगों और आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। वहीं, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने सामूहिक पड़ाव को संबोधित करते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा की विधानसभा चुनाव के समय भाजपा द्वारा जारी घोषणा पत्र में पंजाब के समान वेतनमान व पेंशन देने, अनुबंध पर लगे कर्मचारियों को नियमित करने, 15 हजार न्यूनतम वेतन देने, वेतन विसंगतियों दूर करने व ठेका प्रथा बंद करने का वादा किया गया था। लेकिन लगभग तीन साल बीत जाने के बावजूद एक भी सरकार ने एक भी वादे पर अमल नहीं किया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री व मुख्य संगठनकर्ता बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद पांच हजार शिक्षा प्रेरकों, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हजारों कर्मियों, लोवर मेरिट के नाम पर लगभग हजारों जेबीटी टीचर को नौकरी से हटा दिया है। सरकार ने कैशलेश मेडिकल सुविधा देने, जोखिम पूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने की मानी हुई मांगों तक लागू नहीं किया। संघ की उपाध्यक्ष सबिता, उप महासचिव जीवन, प्रेस प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना व वित्त सचिव राजेन्द्र सिंह बाटू ने कहा की सरकार के अब तक के कार्यकाल मे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सरकार व सर्व कर्मचारी संघ के बीच 10 दिसबर, 2015 व 29 मार्च, 2017 को बातचीत हुई थी, लेकिन दोनों ही मीटिंगों में सरकार कर्मचारियों की प्रमुख नीतिगत मांगो का हल करने, चुनावी वादो पर अमल करने व भ्रष्टाचार की जननी व शोषण की पोषक आउटसोर्सिंग व निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाने तथा खाली पड़े लाखों पदों को भरने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई दी। सामूहिक पड़ाव को सर्व कर्मचारी संघ व विभागीय संगठनों के नेता सबिता, आर सी जगगा, सुरेश नोहरा, एन पी सिंह चौहाञन, ईश्वर सिरोही, बिजेन्द्र पषल, लाजवंती, सुरेन्द्र गौतम, कमलजीत बतवा, सरोज, राजेन्द्र अहलावत, सुशील अरढ़ाना के साथ हजारों कर्मचारी मौजूूद रहे।
राज्य सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी में किसान व कर्मचारी
अपनी सरकार के एक हजार दिन पूरे होने पर जहां भाजपा अपनी उपलब्धियों को गिनाने में जुटी है। वहीं किसान व कर्मचारी सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार से आमने-सामने की टक्कर लेने के लिए किसान व कर्मचारी एक ही मंच पर आने की तैयारी कर रहे हैं। इसको लेकर किसान व कर्मचारी नेता अंदर खाने बातचीत कर प्लान तैयार करने में जुटे हैं। अभी तक धरना प्रदर्शन व एक-दो की हड़ताल तक सीमित कर्मचारी और किसान इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में है। एक कर्मचारी नेता ने कहा कि इस बार जो आंदोलन होगा, वह सरकार की जड़े हिला देगा। अब हम रुकने वाले नहीं, सरकार या तो हमारी मांगे माने या फिर संघर्ष के लिए तैयार रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। विधानसभा चुनाव को अभी दो साल का लंबा वक्त है, लेकिन राज्य सरकार की जड़े हिलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों ने अभी से मोर्चा बंदी शुरू कर दी है। एक तरफ जहां भारतीय किसान यूनियन ने कर्ज माफी के लिए राज्य सरकार को 8 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है, वहीं कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी, मांगों की लगातार अनदेखी व जनसेवा के विभागों में निजीकरण की नीतियों को लागू करने का आरोप लगाकर शनिवार को सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय के सामने 24 घंटे का सामूहिक पड़ाव डाल दिया है। कर्मचारियों के इस महा पड़ाव का समापन रविवार को बड़े आंदोलन की घोषणा के साथ होगा। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले आयोजित इस पड़ाव में राज्य के सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालय, नगर निगमों, परिषद्, पालिकाओं व विभिन्न परियोजनाओं में काम करने वाले हजारों कर्मचारी शामिल हुए और जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी शक्ति प्रदर्शन किया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान धर्मबीर फौगाट ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए सरकार को चेतावनी दी की अगर आज शुरू हुए 24 घंटे के पड़ाव के समापन से पहले सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की तो रविवार को आगामी आंदोलन का ऐलान कर दिया जायेगा। इस महापड़ाव में शामिल होने के लिए कर्मचारी सवेरे से ही हाथों में बेनर व मांगों के समर्थन में लिखी फट्टियां लिए प्रदर्शन करते हुए सीएम सिटी पहुंचने लगे थे।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष का. सतबीर सिंह ने अपने संगठन की ओर से कर्मचारियों की मांगों और आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। वहीं, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने सामूहिक पड़ाव को संबोधित करते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा की विधानसभा चुनाव के समय भाजपा द्वारा जारी घोषणा पत्र में पंजाब के समान वेतनमान व पेंशन देने, अनुबंध पर लगे कर्मचारियों को नियमित करने, 15 हजार न्यूनतम वेतन देने, वेतन विसंगतियों दूर करने व ठेका प्रथा बंद करने का वादा किया गया था। लेकिन लगभग तीन साल बीत जाने के बावजूद एक भी सरकार ने एक भी वादे पर अमल नहीं किया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के वरिष्ठ उप प्रधान नरेश कुमार शास्त्री व मुख्य संगठनकर्ता बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने के बाद पांच हजार शिक्षा प्रेरकों, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से हजारों कर्मियों, लोवर मेरिट के नाम पर लगभग हजारों जेबीटी टीचर को नौकरी से हटा दिया है। सरकार ने कैशलेश मेडिकल सुविधा देने, जोखिम पूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता देने की मानी हुई मांगों तक लागू नहीं किया। संघ की उपाध्यक्ष सबिता, उप महासचिव जीवन, प्रेस प्रवक्ता इंद्र सिंह बधाना व वित्त सचिव राजेन्द्र सिंह बाटू ने कहा की सरकार के अब तक के कार्यकाल मे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सरकार व सर्व कर्मचारी संघ के बीच 10 दिसबर, 2015 व 29 मार्च, 2017 को बातचीत हुई थी, लेकिन दोनों ही मीटिंगों में सरकार कर्मचारियों की प्रमुख नीतिगत मांगो का हल करने, चुनावी वादो पर अमल करने व भ्रष्टाचार की जननी व शोषण की पोषक आउटसोर्सिंग व निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाने तथा खाली पड़े लाखों पदों को भरने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई दी। सामूहिक पड़ाव को सर्व कर्मचारी संघ व विभागीय संगठनों के नेता सबिता, आर सी जगगा, सुरेश नोहरा, एन पी सिंह चौहाञन, ईश्वर सिरोही, बिजेन्द्र पषल, लाजवंती, सुरेन्द्र गौतम, कमलजीत बतवा, सरोज, राजेन्द्र अहलावत, सुशील अरढ़ाना के साथ हजारों कर्मचारी मौजूूद रहे।
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राज्य सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी में किसान व कर्मचारी
अपनी सरकार के एक हजार दिन पूरे होने पर जहां भाजपा अपनी उपलब्धियों को गिनाने में जुटी है। वहीं किसान व कर्मचारी सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार से आमने-सामने की टक्कर लेने के लिए किसान व कर्मचारी एक ही मंच पर आने की तैयारी कर रहे हैं। इसको लेकर किसान व कर्मचारी नेता अंदर खाने बातचीत कर प्लान तैयार करने में जुटे हैं। अभी तक धरना प्रदर्शन व एक-दो की हड़ताल तक सीमित कर्मचारी और किसान इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में है। एक कर्मचारी नेता ने कहा कि इस बार जो आंदोलन होगा, वह सरकार की जड़े हिला देगा। अब हम रुकने वाले नहीं, सरकार या तो हमारी मांगे माने या फिर संघर्ष के लिए तैयार रहे।
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