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आज 172 सरकारी स्कूलों के 344 अध्यापक व अध्यापिकाओं को दी जाएगी किशोर प्रशिक्षण की ट्रेनिंग

Thu, 15 Nov 2018 12:25 AM IST
Updated Thu, 15 Nov 2018 12:25 AM IST
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आज 172 सरकारी स्कूलों के 344 अध्यापक व अध्यापिकाओं को दी जाएगी किशोर प्रशिक्षण की ट्रेनिंग
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे किशोर शिक्षा कार्यक्रम के तहत जिले के 172 सरकारी हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के 344 अध्यापक व अध्यापिकाओं को 15 नवंबर को ट्रेनिंग दी जाएगी। यह ट्रेनिंग नीलोखेड़ी के एसडीएमएन विद्या मंदिर स्कूल में दी जाएगी। पंचकूला निदेशालय से आए प्रशिक्षक इन अध्यापक व अध्यापिकाओं को बताएंगे कि वह 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों को किस तरह पढ़ाए और किशोर अवस्था में होने वाले बदलाव के बारे में कैसे जानकारी दें। प्रशिक्षण मिलने के बाद ये शिक्षक स्कूलों में विद्यार्थियों को किशोर शिक्षा का पाठ पढ़ाएंगे। इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ भी जागरूक किया जाएगा और उसके प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में भी बताया जाएगा। 9वीं कक्षा में प्रवेश होने के दौरान विद्यार्थी किशोर हो जाता है और वह नए युग में प्रवेश करता है। इस दौरान उनके शरीर में क्रियाएं होती हैं और अपनी दिशा भटक जाता है। इसी अवस्था में विद्यार्थी नशे की ओर दौड़ता है और कई विद्यार्थी शरीर की क्रियाओं में बदलाव होने पर डर भी जाता है। जिस कारण वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगता है। इसलिए किशोर शिक्षा कार्यक्रम के द्वारा टीचर्स बच्चों को किशोर अवस्था में होने वाले बदलाव के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

अभिभावकों की भूमिका निभाएंगे अध्यापक
9वीं कक्षा में जब विद्यार्थी दाखिला लेता है तो उस दौरान वह किशोर अवस्था में होता है। किशोर अवस्था में मेल व फीमेल में शारीरिक बदलाव भी होता है। इस शारीरिक बदलाव के कारण विद्यार्थी डर जाते हैं तो उन्हें मजबूरन अभिभावकों के साथ वह बात शेयर करनी पड़ती है लेकिन अब ये विद्यार्थी अध्यापक व अध्यापिकाओं से ही किशोर अवस्था में होने वाले बदलाव के बारे में जान सकते हैं।
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18 मोड्यूल की टीचर्स को दी जाएगी बुक
ट्रेनिंग के दौरान सभी अध्यापक व अध्यापिकाओं को 18 मोड्यूल की बुक दी जाएगी, जिसमें भारत में किशोरावस्था शिक्षा, किशोरावस्था कार्यक्रम, बड़े होने की प्रक्रिया, सकारात्मक और उत्तरदायी संबंध स्थापित करना या बनाए रखना, हम बदल रहे हैं, रूढ़िवादिता और भेदभाव को समझना और रिपोर्ट करना, नशीले पदार्थों के दुरुप्रयोग को समझना, परिणाम व समझना, मिथकों और भ्रांतियों को स्पष्ट करना, एचआईवी और एड्स की रोकथाम, संचरण व एड्स व एचआईवी की दशा, एचआईवी के प्रति किशोरों और महिलाओं की संवेदनशीलता, आरटीआई और एचआईवी, वकालत आदि के बारे में विद्यार्थियों को बताया जाएगा।
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निदेशालय के निर्देश पर वीरवार को किशोर शिक्षा कार्यक्रम प्रशिक्षण नीलोखेड़ी के एक स्कूल में कराया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में जिले के 172 सरकारी स्कूलों में 344 अध्यापक व अध्यापिकाएं शामिल होंगी और फिर ये टीचर्स स्कूल में जाकर विद्यार्थियों को किशोर शिक्षा का पाठ पढ़ाएंगे।
-डॉ. सुशील कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ, करनाल।
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