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रामायण मानव जीवन का दर्पण है : स्वामी सत्यानंद महाराज

Wed, 14 Nov 2018 12:26 AM IST
Updated Wed, 14 Nov 2018 12:26 AM IST
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रामायण मानव जीवन का दर्पण है : स्वामी सत्यानंद महाराज
अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। वैद्य देवेंद्र बत्तरा, दर्शना बत्तरा की अध्यक्षता में उत्तम औषधालय के प्रांगण में चल रही कार्तिक मास की कथा में महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद महाराज के पधारने पर माल्यार्पण कर स्वागत किया। उन्होंने प्रवचन करते हुए कहा कि दर्पण शब्द का अर्थ होता है शीशा, शीशे के सामने जब आदमी खड़ा होता है, उसके वास्तविक स्वरूप का परिचय शीशा बतलाता है। आगे आने वाली व्यवस्था का पूर्ण रूपेण संकेत और सावधान भी करता है। धर्म सम्राट चक्रवर्ती राजा दशरथ का समय राजकाल की व्यवस्था को करते हुए बहुत समय व्यतीत हो गया। अचानक सम्राट चक्रवर्ती राजा दशरथ अपनी नित्य क्रिया को संपन्न करने के बाद शीशा को उठाया। सम्राट के सामने वर्तमान और भविष्य झलकने लगा। शीशा देखने केे बाद महसूस हुआ कि मैं वृद्ध अवस्था को प्राप्त हो गया हूं। मेरे कानों के पास बाल सफेद हो गए हैं। अब हमको अपने सिर के ऊपर से राजा का ताज उतारकर श्रीराम को समर्पित कर देना चाहिए। यह रामायण भूत, भविष्य और वर्तमान को प्रदर्शित करता है। यही रामायण का सारांश है। पं. एमना गौड़ ने कहा कि नरोत्तम एक प्रकांड विद्वान था। उसकी विद्वता के चर्चे दशों दिशाओं में थे जिससे उसको अभिमान हो गया था और उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। वह अपने माता-पिता एवं गुरु का घोर अपमान करता था। तब शनिदेव को क्रोध आ गया वह न्यायकारी हैं। जो माता पिता की सेवा नहीं करता शनिदेव की सबसे पहले दृष्टि उस पर पड़ती है। चाहे वो कितना बड़ा ही साधक क्यों न हो और उसकी सभी सिद्धियां धीरे-धीरे समाप्त होती जाती हैं। पं. चेतन देव शर्मा ने कार्तिक मास की कथा करते हुए कहा भागीरथ के वंश में सौरदास नाम का एक राजा हुआ, जिसका पुत्र मित्रसह था। मित्रसह गुरु वशिष्ठ के श्राप से राक्षस हो गया। परंतु गंगा जल के प्रभाव से वह भी भगवान जी के परम पद को प्राप्त हुआ। ऋषि पूछने लगे हे सूत जी गुरु वशिष्ठ ने किस कारण से श्राप दिया सो आप कृपा करके बताएं। राजा शिकार की तलाश में चल पड़ा कुछ दूर जाकर राजा ने देखा कि पर्वत की कंदरा में एक व्याघ्र और व्याघ्री थे। राजा ने उनको देखते ही धनुष बाण चलाया और उन पर छोड़ दिया, जिससे व्याघ्री घायल होकर गिर पड़ी और मर गई। तब व्याघ्र राक्षस रूप धारण कर बड़े क्रोध में आकर कहने लगा कि हे राजन तुमने मेरे साथ बड़ा अन्याय किया है इसका बदला मैं अवश्य लूंगा। चल रही कार्तिक मास की कथा में रूपा पब्लिकेशन के डायरेक्टर कपिश मेहरा का जन्मदिन, ऋषि अरोड़ा का जन्मदिन केक काटकर मनाया गया। इस अवसर पर वैद्य देवेंद्र बतरा, दर्शना बतरा, मानव बतरा, सुभाष गुरेजा, भारत भूषण, सुभाष वधावन, राजेंद्र मोहन, रामलाल, डॉ. दीनानाथ आदि ने हवन यज्ञ करके पुण्य प्राप्त किया।
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