फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड से पहले रातभर लाइन में लग जागने का दस्तुर

मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड से पहले रातभर लाइन में लग जागने का दस्तुर

Tue, 18 Jul 2017 10:31 PM IST
Updated Tue, 18 Jul 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड से पहले रातभर लाइन में लग जागने का दस्तुर
अल्ट्रासाउंड के लिए रतजगा
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। शहर में स्थित 650 करोड़ की लागत से बने मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कराने से पहले रातभर लाइन में लगकर जागने का रिवाज सा बन गया है। अल्ट्रासाउंड टेस्ट से पहले यह एक कड़ी परीक्षा है, जिसमें हर उस औरत को गुजरना पड़ता है, जो निजी अस्पताल में पैसे देकर यह टेस्ट नहीं करा सकती और सरकार की निशुल्क सेवा लेना चाहती है।
खुले आसमान के नीचे ये महिलाएं इस टेस्ट के लिए रातभर जागती हैं और सुबह का इंतजार करती हैं। सुबह फिर से टोकन के लिए मारामारी और फिर से खाली हाथ बेबस रह जाती हैं। यह दास्तां है उन दूर दराज से आई गर्भवती महिलाओं की, जिनके पास निजी अस्पतालों के लिए पैसे नहीं हैं। हालांकि, सुबह 8 बजे से टेस्ट के लिए पर्ची कटनी शुरू होती है, लेकिन उस समय इस खिड़की पर इतनी लंबी लाइन होती है कि कोई देखकर ही वापस चला जाता है। क्योंकि यहां पर रातभर से ही महिलाएं व उनके परिजन लाइन में लगे होते हैं। अब हालात ये हैं कि कॉलेज में पांच रेडियोलॉजिस्ट आ चुके हैं और अल्ट्रासाउंड के लिए दो मशीनें चालू हैं। प्रतिदिन केवल 100 अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। इनमें केवल 25 गर्भवती महिलाओं के टेस्ट होते हैं। मात्र 15 मिनट में ही ये टोकन खत्म हो जाते हैं और उसके बाद किसी गर्भवती महिला को टोकन नहीं मिलता।
विज्ञापन


बाक्स
अमर उजाला को बताई दास्तां
जब अमर उजाला की टीम ने मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग स्थित अल्ट्रासांउड केंद्र का मुआयना किया तो गर्भवती महिलाओं का दर्द जुबान पर आया। महिलाओं ने बताया कि हर रोज 50 से 60 गर्भवती महिलाएं अपना काम छोड़कर रात को भी नंबर लगवाने के लिए मेडिकल कॉलेज में डटती हैं, ताकि सुबह उनका नंबर आ जाए। पिछले दिनों इस समस्या को लेकर गर्भवती महिलाएं सड़कों पर प्रदर्शन कर चुकी हैं, लेकिन मेडिकल कालेज का प्रबंधन उनकी टोह नहीं ले रहा है। आखिर वे करें क्या और जाएं कहां?
विज्ञापन
विज्ञापन


-----------------------
बॉक्स (फोटो संख्या-4 )
सोमवार सुबह आई थी, नंबर की उम्मीद नहीं
सेक्टर 13 निवासी इशरत ने बताया कि वह सोमवार सुबह पांच बजे अल्ट्रासाउंड का नंबर लगवाने के लिए आई थी। उसका नंबर लग गया, लेकिन सोमवार को उसका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। अब वह अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए आई है। उसे उम्मीद नहीं है कि आज भी उसका नंबर आएगा या नहीं।
------------------------
बॉक्स (फोटो संख्या-5 )
दोपहर तक नहीं आया नंबर, एक दिन पहले कट चुकी है पर्ची
ऊंचा समाना की रेखा ने बताया कि वह रविवार रात को मेडिकल कॉलेज में आई थी। रातभर वह नंबर लगवाने के लिए कॉलेज में रुकी। सुबह बड़ी जद्दोजहद के बाद उसका नंबर लगा। इसके बाद मंगलवार को वह अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए केंद्र पर पहुंची है। दोपहर तक उसका नंबर नहीं आया है। जबकि अभी तक 93 अल्ट्रासाउंड हो चुके हैं।
-------------------------
बॉक्स (फोटो संख्या-6 )
5 रेडियोलॉजिस्ट आने पर भी नहीं सुधरे हालात
मेडिकल कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग में पहले एक अल्ट्रासाउंड मशीन थी। अल्ट्रासाउंड करने के लिए 1 रेडियोलॉजिस्ट थी। उस समय प्रतिदिन 100 अल्ट्रासाउंड होते थे, जिनमें 25 गर्भवती महिलाओं के होते थे। कॉलेज प्रबंधन की ओर महिलाओं को बिल्डिंग छोटी होने और रेडियोलॉजिस्ट न होने का तर्क देकर टाल दिया जाता था, लेकिन नई बिल्डिंग में शिफ्ट होने के बाद एक मशीन और आ गई। अब कॉलेज के पास 5 रेडियोलॉजिस्ट हैं। इसके बावजूद अब भी मेडिकल कॉलेज में 100 ही अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के समक्ष वही समस्या ज्यों की त्यों खड़ी है। वहीं, निजी रेडियोलॉजिस्ट रोजाना 200 से ज्यादा टेस्ट करते हैं।

पांच दिन पहले आई थी, आज आया नंबर
मूल रूप से हिमाचल और हाल में ज्योति नगर में रहने वाली अनीता ने बताया कि वह शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में सीटी स्केन करवाने के लिए आई थी, परंतु उस दिन उसका नंबर लगाकर उसे मंगलवार को आने को बोला गया। जब उसने इसका कारण पूछा तो पर्ची काटने वालों ने बोला पहले बहुत पेशेंट है। इसलिए आपका सीटी स्केन मंगलवार को होगा। अभी तक नंबर नहीं आया है।
----------------------
बॉक्स (फोटो संख्या-8 )

एमरजेंसी मरीजों को नहीं मिल पाती सुविधा
अंकित वासी छपरा खेड़ा ने बताया कि वह सोमवार रात को डांक कांवड़ लेने के लिए बाइक से हरिद्वार जा रहे थे। शामली से पहले उनकी बाइक पुलिस के बेरिकेट से टकरा गई। इसमें उसका साथी सतेंद्र, मनू और गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को इमरजेंसी में दाखिल कराया गया है। सत्येंद्र को सिर पर चोट ज्यादा होने के कारण डॉक्टर ने उन्हें सीटी स्केन कराने के लिए भेजा, लेकिन वह सुबह से यहां इंतजार कर रहे हैं, उनका नंबर नहीं है। अंकित ने कहा कि जब यहां इमरजेंसी मरीजों को भी सुविधा नहीं मिल पाती तो इतने बड़े मेडिकल कॉलेज बनाने का कोई भी फायदा नहीं है।
----
मेडिकल कॉलेज में दो मशीनों से अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अब मेडिकल कॉलेज में 5 रेडियोलॉजिस्ट हैं। इनमें से चार रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं, जबकि एक को अभी अनुमति नहीं मिली है। प्रतिदिन 100 अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। इनमें 25 गर्भवती महिलाओं के शामिल हैं। अगले सप्ताह एक नई अल्ट्रासाउंड मशीन मेडिकल कॉलेज में आ जाएगी। इससे केवल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाएंगे। इसके बाद गर्भवती महिलाओं को कोई भी परेशानी नहीं आएगी। टोकन सिस्टम को लेकर आला अधिकारी मंथन कर रहे हैं।

-डॉ. संजीव ग्रोवर, उप चिकित्सा अधीक्षक, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल।
---
इस मामले को लेकर जल्द ही मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और ऐसा सिस्टम बनाएंगे कि किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े। आगे से उतने ही लोगों को टोकन देने की व्यवस्था करने की कोशिश होगी, जितनों के टेस्ट हो सकें। जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
-डॉ. आदित्य दहिया, डीसी, करनाल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed