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फिर सुखिर्यों में मेडिकल कालेज, कष्ट निवारण समिति की बैठक में लगे गंभीर आरोप, डॉक्टर मरीजों से करते हैं मारपीट, नौकरियों में फैल
Updated Sat, 27 Oct 2018 12:18 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की करतूतें एक बार फिर सुर्खियां बन रही हैं। इस बार भी आरोप वहीं हैं, जिसके लिए ये कॉलेज और यहां के चिकित्सक जाने जाते हैं। कष्ट निवारण समिति की बैठक और कॉलेज के चिकित्सकों पर आरोपों की झड़ी लगी रही। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक मरीजों से मारपीट करते हैं और नौकरी लगवाने के लिए मेडिकल कॉलेज में ठेकेदार को रुपये भी देने पड़ते हैं। इतना ही नहीं अब तो चिकित्सक और भी चमत्कार करने लगे हैं, मरीज को बिना चेक किए ही दवाई लिख देते हैं। ये आरोप लगते ही पूरा सदन मेडिकल कॉलेज के खिलाफ खड़ा हो गया और सभी आरोपों का समर्थन किया। इतना ही नहीं सदन के सदस्यों ने मंत्री नायब सिंह सैनी को आरोप सत्य होने का दावा तक किया। बात यहीं नहीं रुकी बैठक में मौजूद घरौंडा के विधायक और हैफेड के चेयरमैन हरविंद्र कल्याण ने भी अपना दर्द बया किया। कल्याण ने कहा कि, मंत्री जी इस मेडिकल कॉलेज को संभाल लो, यहां के हालात बड़े खराब हैं। मेडिकल कॉलेज में तो चिकित्सकों का बुरा हाल है करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद भी मरीजों को इलाज की बजाए चिकित्सकों से धक्के मिलते हैं। इस पर मंत्री सैनी ने मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर व ठेकेदार को अगली बैठक में तलब किया है। साथ ही जांच के आदेश भी दिए हैं।
नौकरी के नाम पर मांगे 70 हजार रुपये
बता दें पिछली कष्ट निवारण समिति की बैठक में गढ़ी बीरबल निवासी जोनी शर्मा ने शिकायत दी थी कि एक अप्रैल, 2017 से वह बाला जी सुरक्षा सेवा गुरुग्राम के माध्यम से वह मेडिकल कॉलेज में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर कार्य कर रहा था। शिफ्ट चेंज करने के नाम पर उसके सहायक ने ठेकेदार के नाम पर 70 हजार रुपये मांगे। रुपये न देने पर षड्यंत्र का शिकार बनाकर उसको हर रोज ड्यूटी पर आने के बावजूद भी गैर हाजिर दिखाकर कर व अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उसे नौकरी से हटा दिया गया। जब उसने अपनी गरीबी का हवाला देकर दोबारा नौकरी पर रखने की बात कही तो फिर से उससे रुपये मांगे। इस मामले में राज्यमंत्री ने जांच के निर्देश दिए थे।
कॉलेज के डायरेक्टर व ठेकेदार तलब
शुक्रवार को हुई कष्ट निवारण समिति की बैठक में मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर की जगह पर डीएमएस मुनिष परूथी वहां पहुंचे और ठेकेदार भी सदन में नहीं पहुंचा। इसलिए मंत्री ने मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर व ठेकेदार को अगली मीटिंग में तलब किया है। पंचायत भवन में आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में इस बार भी दस मामले रखे गए। बैठक की अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी ने की। दस में से सात मामलों को निपटाया गया और तीन मामले पेंडिंग रखे गए।
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कम वेतन देकर सफाई कर्मचारियों से ठेकेदार उठवाता है शौच
सफाई कर्मचारी गीता ने शिकायत दी कि सेक्टर-12 में 24 सफाई कर्मचारियों की सीट है लेकिन ठेकेदार दस सफाई कर्मचारियों पर ही वहां की सफाई करवाता है। सरकार ने सफाई कर्मचारियों का वेतन बढ़ा दिया है, लेकिन ठेकेदार तीन साल से उन्हें सात हजार रुपये महीना ही दे रहा है। जब वे पूरी सेलरी मांगते हैं तो नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती हैं, जब उन्होंने हुडा विभाग के अधिकारी को इसकी शिकायत की तो ठेकेदार ने उनसे शौच उठवाया। सदन में शिकायत सुनते ही राज्य मंत्री ने तुरंत श्रम विभाग के अधिकारी को इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए और कहा कि इस मामले की जांच कर ठेकेदार पर तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाए।
सभी ठेकेदारों की होगी जांच, एक ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने के दिए निर्देश
सफाई कर्मचारियों की शिकायत पर पूर्व मेयर ने राज्य मंत्री से कहा कि हर विभाग में ठेकेदार कर्मचारियों को कम सेलरी देकर उनका शोषण कर रहे हैं। इतना सुनते ही मंत्री ने डीसी को निर्देश दिए कि श्रम विभाग से सभी ठेकेदारों की जांच की जाए कि वे कर्मचारियों को कितनी सेलरी दे रहे हैं और कर्मचारियों का पीएफ जमा हो रहा है कि नहीं। इसके साथ ही उन्होंने हुडा के अधिकारी को निर्देश दिए कि इस ठेकेदार का टेंडर कैंसिल कर इसे ब्लैक लिस्ट किया जाए।
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करनाल। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज की करतूतें एक बार फिर सुर्खियां बन रही हैं। इस बार भी आरोप वहीं हैं, जिसके लिए ये कॉलेज और यहां के चिकित्सक जाने जाते हैं। कष्ट निवारण समिति की बैठक और कॉलेज के चिकित्सकों पर आरोपों की झड़ी लगी रही। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक मरीजों से मारपीट करते हैं और नौकरी लगवाने के लिए मेडिकल कॉलेज में ठेकेदार को रुपये भी देने पड़ते हैं। इतना ही नहीं अब तो चिकित्सक और भी चमत्कार करने लगे हैं, मरीज को बिना चेक किए ही दवाई लिख देते हैं। ये आरोप लगते ही पूरा सदन मेडिकल कॉलेज के खिलाफ खड़ा हो गया और सभी आरोपों का समर्थन किया। इतना ही नहीं सदन के सदस्यों ने मंत्री नायब सिंह सैनी को आरोप सत्य होने का दावा तक किया। बात यहीं नहीं रुकी बैठक में मौजूद घरौंडा के विधायक और हैफेड के चेयरमैन हरविंद्र कल्याण ने भी अपना दर्द बया किया। कल्याण ने कहा कि, मंत्री जी इस मेडिकल कॉलेज को संभाल लो, यहां के हालात बड़े खराब हैं। मेडिकल कॉलेज में तो चिकित्सकों का बुरा हाल है करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद भी मरीजों को इलाज की बजाए चिकित्सकों से धक्के मिलते हैं। इस पर मंत्री सैनी ने मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर व ठेकेदार को अगली बैठक में तलब किया है। साथ ही जांच के आदेश भी दिए हैं।
नौकरी के नाम पर मांगे 70 हजार रुपये
बता दें पिछली कष्ट निवारण समिति की बैठक में गढ़ी बीरबल निवासी जोनी शर्मा ने शिकायत दी थी कि एक अप्रैल, 2017 से वह बाला जी सुरक्षा सेवा गुरुग्राम के माध्यम से वह मेडिकल कॉलेज में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर कार्य कर रहा था। शिफ्ट चेंज करने के नाम पर उसके सहायक ने ठेकेदार के नाम पर 70 हजार रुपये मांगे। रुपये न देने पर षड्यंत्र का शिकार बनाकर उसको हर रोज ड्यूटी पर आने के बावजूद भी गैर हाजिर दिखाकर कर व अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उसे नौकरी से हटा दिया गया। जब उसने अपनी गरीबी का हवाला देकर दोबारा नौकरी पर रखने की बात कही तो फिर से उससे रुपये मांगे। इस मामले में राज्यमंत्री ने जांच के निर्देश दिए थे।
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कॉलेज के डायरेक्टर व ठेकेदार तलब
शुक्रवार को हुई कष्ट निवारण समिति की बैठक में मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर की जगह पर डीएमएस मुनिष परूथी वहां पहुंचे और ठेकेदार भी सदन में नहीं पहुंचा। इसलिए मंत्री ने मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर व ठेकेदार को अगली मीटिंग में तलब किया है। पंचायत भवन में आयोजित कष्ट निवारण समिति की बैठक में इस बार भी दस मामले रखे गए। बैठक की अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी ने की। दस में से सात मामलों को निपटाया गया और तीन मामले पेंडिंग रखे गए।
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कम वेतन देकर सफाई कर्मचारियों से ठेकेदार उठवाता है शौच
सफाई कर्मचारी गीता ने शिकायत दी कि सेक्टर-12 में 24 सफाई कर्मचारियों की सीट है लेकिन ठेकेदार दस सफाई कर्मचारियों पर ही वहां की सफाई करवाता है। सरकार ने सफाई कर्मचारियों का वेतन बढ़ा दिया है, लेकिन ठेकेदार तीन साल से उन्हें सात हजार रुपये महीना ही दे रहा है। जब वे पूरी सेलरी मांगते हैं तो नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती हैं, जब उन्होंने हुडा विभाग के अधिकारी को इसकी शिकायत की तो ठेकेदार ने उनसे शौच उठवाया। सदन में शिकायत सुनते ही राज्य मंत्री ने तुरंत श्रम विभाग के अधिकारी को इस मामले की जांच करने के निर्देश दिए और कहा कि इस मामले की जांच कर ठेकेदार पर तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जाए।
सभी ठेकेदारों की होगी जांच, एक ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने के दिए निर्देश
सफाई कर्मचारियों की शिकायत पर पूर्व मेयर ने राज्य मंत्री से कहा कि हर विभाग में ठेकेदार कर्मचारियों को कम सेलरी देकर उनका शोषण कर रहे हैं। इतना सुनते ही मंत्री ने डीसी को निर्देश दिए कि श्रम विभाग से सभी ठेकेदारों की जांच की जाए कि वे कर्मचारियों को कितनी सेलरी दे रहे हैं और कर्मचारियों का पीएफ जमा हो रहा है कि नहीं। इसके साथ ही उन्होंने हुडा के अधिकारी को निर्देश दिए कि इस ठेकेदार का टेंडर कैंसिल कर इसे ब्लैक लिस्ट किया जाए।