{"_id":"656260d64c1a36dbcc0422a5","slug":"10-to-15-percent-land-in-32-countries-has-been-degraded-karnal-news-c-18-knl1008-270606-2023-11-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: 32 देशों में 10 से 15 प्रतिशत भूमि हो चुकी खराब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: 32 देशों में 10 से 15 प्रतिशत भूमि हो चुकी खराब
विज्ञापन
करनाल। अफ्रीकी-एशियाई ग्रामीण विकास संगठन (एएआरडीओ) के सेक्रेटरी जनरल डॉ. मनोज नरदेव सिंह ने कहा कि उनके संगठन के सदस्य 32 देशों में 10 से 15 प्रतिशत तक भूमि लवणता और क्षारीयता से प्रभावित हो चुकी है। इस समस्या से निपटने के लिए उपायों का अभाव है, जिससे उनका उत्पादन गिर रहा है। आयात निर्भरता बढ़ने से खाद्य वस्तुओं के भाव बढ़ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन से पूरी दुनिया ही प्रभावित हो रही हैं, कई देशों में अत्यधिक बाढ़ व सूखे से चिंता बढ़ गई है।
सीएसएसआरआई करनाल में निम्न गुणवत्ता वाले जल का कृषि में उपयोग विषय पर सात देशों के वैज्ञानिकों के साथ चल रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण के समापन पर पहुंचे एएआरडीओ के सेक्रेटरी जनरल डॉ. सिंह पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि अधिकांश एएआरडीओ देशों में लवणता और खराब गुणवत्ता वाले पानी की समस्या है। इन देशों में भूख व गरीबी को कम करने के लिए अधिक बुनियादी और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन का उत्पादन करने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि 2050 तक 60 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न पैदा करने की जरूरत है। एएआरडीओ देशों में मिट्टी में लवणता और क्षारीयता के बढ़ने से 10 से 15 प्रतिशत भूमि खराब हो रही है, जिससे खाद्यान्न का उत्पादन घट गया है। इसे कैसे सुधारें, इसकी तकनीक व प्रौद्योगिकी भी नहीं है। जिससे तनाव की स्थिति बनने लगी है।
विज्ञापन
आयात-निर्यात में असंतुलन हो गया है। एएआरडीओ ने स्वीकार किया है कि इस समस्या से तकनीक, शोध और नीति तीनों के समन्वय से ही सुधारा जा सकता है। इस पर संगठन गंभीरता से कार्य कर रहा है। जलवायु परिवर्तन पर कहा कि दुनिया के बहुत से देशों में कहीं अत्यधिक बाढ़ तो कहीं अत्यधिक सूखे की स्थिति बनने लगी है, जो चिंता का विषय है। एएआरडीओ ने इस दिशा में भी काम करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
सीएसएसआरआई करनाल में निम्न गुणवत्ता वाले जल का कृषि में उपयोग विषय पर सात देशों के वैज्ञानिकों के साथ चल रहे अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण के समापन पर पहुंचे एएआरडीओ के सेक्रेटरी जनरल डॉ. सिंह पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि अधिकांश एएआरडीओ देशों में लवणता और खराब गुणवत्ता वाले पानी की समस्या है। इन देशों में भूख व गरीबी को कम करने के लिए अधिक बुनियादी और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन का उत्पादन करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि 2050 तक 60 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्न पैदा करने की जरूरत है। एएआरडीओ देशों में मिट्टी में लवणता और क्षारीयता के बढ़ने से 10 से 15 प्रतिशत भूमि खराब हो रही है, जिससे खाद्यान्न का उत्पादन घट गया है। इसे कैसे सुधारें, इसकी तकनीक व प्रौद्योगिकी भी नहीं है। जिससे तनाव की स्थिति बनने लगी है।
विज्ञापन
आयात-निर्यात में असंतुलन हो गया है। एएआरडीओ ने स्वीकार किया है कि इस समस्या से तकनीक, शोध और नीति तीनों के समन्वय से ही सुधारा जा सकता है। इस पर संगठन गंभीरता से कार्य कर रहा है। जलवायु परिवर्तन पर कहा कि दुनिया के बहुत से देशों में कहीं अत्यधिक बाढ़ तो कहीं अत्यधिक सूखे की स्थिति बनने लगी है, जो चिंता का विषय है। एएआरडीओ ने इस दिशा में भी काम करना शुरू कर दिया है।