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खुले में डेढ़ लाख एमटी धान
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1.5 lakh MT paddy in the open
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिलेभर की मंडियों में डेढ़ लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान आ चुका है, जो कि खुले में पड़ा है। जिनका रखवाला किसान के अलावा कोई नहीं है। ऐसे में खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ी दी है। मौसम विभाग ने करीब एक सप्ताह पहले ही बारिश की संभावना जताई थी। बावजूद इसके अभी तक धान ढकने के इंतजाम नहीं किए गए। न ही लिफ्टिंग में तेजी आई है। शनिवार को भी कई बार बूंदाबांदी हुई। इस दौरान किसान तिरपाल से धान ढकते नजर आए। आगामी चार दिन भी बारिश का अनुमान है। ऐसे में उन किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। जिनका धान या तो मंडी में खुला पड़ा है या ट्रालियों में लादकर वे मंडी ला रहे हैं।
करीब डेढ़ दिन बाद शनिवार सुबह करनाल की अनाज मंडी में गेट पास कटने का कार्य शुरू हुआ। ऐसे में मंडी के दोनों प्रवेश द्वारों पर सैकड़ों की संख्या में ट्रालियां कतार में खड़ी रहीं। वहीं दिनभर हुई बूंदाबांदी के बीच किसान बार-बार धान को ढकने या किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास करते नजर आए। स्थिति का जायजा लेने के लिए उपायुक्त अनीश यादव ने भी इंद्री और घरौंडा की अनाज मंडी का दौरा किया।
एजेंसियों ने भी नहीं उठाया धान, डीसी हुए सख्त
आंकड़ों पर निगाह डालें तो धान की खरीद का कार्य जिले में 15 मंडी/परचेज सेंटरों पर किया जा रहा है। मंडियों में करीब 4 लाख 43 हजार 659 मीट्रिक टन धान की खरीद सरकारी एजेंसी द्वारा की गई। लेकिन एजेंसियों की ओर से भी अभी तक खरीदे गए इस सारे धान का उठान नहीं कराया गया। इधर उपायुक्त अनीश यादव ने भी सख्ती दिखाते हुए एजेंसियों को खरीदी गई धान के तुरंत उठान के आदेश जारी किए हैं।
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धान भीगा तो होगा नुकसान
एनडीआरआई में जिला कृषि मौसम सेवा के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि अगले 24 घंटों में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। नौ अक्तूबर को जिले में कुछ स्थानों पर हल्की तो कुछ स्थानों पर मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार मौसम धीमी गति से करनाल व आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। ऐसा लो प्रेशर एरिया के कारण हो रहा है, जिसमें कहीं कुछ देर के लिए भारी बारिश भी संभव है। शनिवार को अधिकतम तापमान 28.8 और न्यूनतम 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बारिश होने पर धान भीगेगा तो बड़ा नुकसान हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि धान की कटाई करते समय वह बदलते मौसम का खास ध्यान रखें। कटाई के बाद धान के भंडारण की उचित व्यवस्था करें। सरसों की बिजाई के लिए खेतों को तैयार करें और मौसम को देखते हुए बिजाई रोक दें।
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करनाल। जिलेभर की मंडियों में डेढ़ लाख मीट्रिक टन से ज्यादा धान आ चुका है, जो कि खुले में पड़ा है। जिनका रखवाला किसान के अलावा कोई नहीं है। ऐसे में खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ी दी है। मौसम विभाग ने करीब एक सप्ताह पहले ही बारिश की संभावना जताई थी। बावजूद इसके अभी तक धान ढकने के इंतजाम नहीं किए गए। न ही लिफ्टिंग में तेजी आई है। शनिवार को भी कई बार बूंदाबांदी हुई। इस दौरान किसान तिरपाल से धान ढकते नजर आए। आगामी चार दिन भी बारिश का अनुमान है। ऐसे में उन किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं। जिनका धान या तो मंडी में खुला पड़ा है या ट्रालियों में लादकर वे मंडी ला रहे हैं।
करीब डेढ़ दिन बाद शनिवार सुबह करनाल की अनाज मंडी में गेट पास कटने का कार्य शुरू हुआ। ऐसे में मंडी के दोनों प्रवेश द्वारों पर सैकड़ों की संख्या में ट्रालियां कतार में खड़ी रहीं। वहीं दिनभर हुई बूंदाबांदी के बीच किसान बार-बार धान को ढकने या किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास करते नजर आए। स्थिति का जायजा लेने के लिए उपायुक्त अनीश यादव ने भी इंद्री और घरौंडा की अनाज मंडी का दौरा किया।
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एजेंसियों ने भी नहीं उठाया धान, डीसी हुए सख्त
आंकड़ों पर निगाह डालें तो धान की खरीद का कार्य जिले में 15 मंडी/परचेज सेंटरों पर किया जा रहा है। मंडियों में करीब 4 लाख 43 हजार 659 मीट्रिक टन धान की खरीद सरकारी एजेंसी द्वारा की गई। लेकिन एजेंसियों की ओर से भी अभी तक खरीदे गए इस सारे धान का उठान नहीं कराया गया। इधर उपायुक्त अनीश यादव ने भी सख्ती दिखाते हुए एजेंसियों को खरीदी गई धान के तुरंत उठान के आदेश जारी किए हैं।
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धान भीगा तो होगा नुकसान
एनडीआरआई में जिला कृषि मौसम सेवा के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. योगेश कुमार ने बताया कि अगले 24 घंटों में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। नौ अक्तूबर को जिले में कुछ स्थानों पर हल्की तो कुछ स्थानों पर मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार मौसम धीमी गति से करनाल व आसपास के क्षेत्रों को प्रभावित करेगा। ऐसा लो प्रेशर एरिया के कारण हो रहा है, जिसमें कहीं कुछ देर के लिए भारी बारिश भी संभव है। शनिवार को अधिकतम तापमान 28.8 और न्यूनतम 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बारिश होने पर धान भीगेगा तो बड़ा नुकसान हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि धान की कटाई करते समय वह बदलते मौसम का खास ध्यान रखें। कटाई के बाद धान के भंडारण की उचित व्यवस्था करें। सरसों की बिजाई के लिए खेतों को तैयार करें और मौसम को देखते हुए बिजाई रोक दें।